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चुनाव बाद हिंसा पर घिरी ममता सरकार:मानवाधिकार आयोग ने कोर्ट से कहा- बंगाल में कानून का शासन नहीं, बल्कि शासक का कानून; CBI जांच की जाए

कोलकाता4 महीने पहले

बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच कर रहे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कलकत्ता हाईकोर्ट में बेहद गंभीर रिपोर्ट सब्मिट की है। आयोग ने हिंसा को लेकर अदालत से कहा कि बंगाल में कानून का शासन नहीं, बल्कि शासक का कानून चलता है। बंगाल हिंसा के मामलों की जांच राज्य से बाहर की जानी चाहिए।

इस बीच, 13 जुलाई को कोर्ट में पेश की गई इस रिपोर्ट के कुछ न्यूज चैनल और वेबसाइट्स पर खुलासे के बाद ममता बनर्जी ने ऐतराज जाहिर किया है। ममता ने कहा कि आयोग को न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए और इस रिपोर्ट को लीक नहीं किया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट को केवल कोर्ट के सामने रखना चाहिए।

आयोग की रिपोर्ट के 4 सबसे बड़े पॉइंट
1.
बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों की जांच CBI से कराई जानी चाहिए। मर्डर और रेप जैसे गंभीर अपराधों की जांच होनी चाहिए।
2. बंगाल में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा ये दिखाती है कि पीड़ितों की दुर्दशा को लेकर राज्य की सरकार ने भयानक तरीके से उदासीनता दिखाई है।
3. हिंसा के मामलों से जाहिर होता है कि ये सत्ताधारी पार्टी के समर्थन से हुई है। ये उन लोगों से बदला लेने के लिए की गई, जिन्होंने चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को समर्थन देने की जुर्रत की।
4. राज्य सरकार के कुछ अंग और अधिकारी हिंसा की इन घटनाओं में मूक दर्शक बने रहे और कुछ इन हिंसक घटनाओं में खुद शामिल रहे हैं।

ममता का UP के बहाने PM पर निशाना
ममता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अच्छी तरह जानते हैं कि यूपी में कानून का राज नहीं है। ऐसी हालत में वहां पर कितने आयोग भेजे जा चुके हैं? हाथरस से लेकर उन्नाव तक कई घटनाएं हो चुकी हैं। हालत ये है कि पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया, लेकिन उन्होंने बंगाल को बदनाम किया। ज्यादातर हिंसा चुनाव से पहले हुई है।

हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

  • इससे पहले 2 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना था कि बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा हुई। कोर्ट ने ममता सरकार को गलत ठहराते हुए कहा था कि जब लोग मारे जा रहे थे और नाबालिगों से रेप हो रहा था तो सरकार इसे नकार रही थी और वह गलत थी। हिंसा का खामियाजा भुगतने वाले लोगों के बीच बंगाल सरकार विश्वास का माहौल बनाने में नाकाम रही।
  • इसके बाद 13 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के शव का DNA टेस्ट का आदेश दिया था। बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में बेलियागाठा के अभिजीत सरकार की हत्या कर दी गई थी। आरोप लगाया गया था कि अभिजीत का मर्डर तृणमूल समर्थकों ने किया है। इसके बाद उनके परिवार ने हाईकोर्ट में अपील की।
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