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ममता बनर्जी-सीबीआई विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही है सुनवाई, कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ पेश किए जा रहे हैं सबूत

4 वर्ष पहले
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नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. Mamata Banerjee vs CBI:कोलकाता में ममता बनर्जी (mamata banerjee) और सीबीआई (CBI) के बीच विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)सुनवाई हुई। कल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने कहा था कि अगर सीबीआई (CBI) के पास कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार(IPS Rajeev Kumar) पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप है तो उसके सबूत पेश करें। आज सीबीआई (CBI)उन्हीं सबूतों को पेश किया। बता दें कि कोलकाता में ममता बनर्जी (mamata banerjee)तीन दिनों से धरने पर बैठी हैं। रविवार शाम शारदा चिटफंट घोटाले केस (Saradha chit fund ghotala) में सीबीआई, कोलकाता पुलिस कमिश्नर विवेक कुमार से पूछताछ करने के लिए उनके घर गई थी। वहां स्थानीय पुलिस ने सभी 40 सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।

ममता बनर्जी तीन दिन से धरना दे रही हैं : पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सीबीआई के एक्शन के विरोध में ममता बनर्जी रविवार की रात 9 बजे से धरने पर बैठी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के दबाव में सीबीआई ने ये कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमें डराना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि बिना किसी नोटिस के सीबीआई पूछताछ के लिए पुलिस कमिश्नर के घर पहुंची थी।

क्या है शारदा चिटफंट घोटाला : शारदा चिटफंट घोटाला (Saradha chit fund ghotala) अप्रैल 2013 में सामने आया था। आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किए। खुलासे के बाद जब एजेंटों से निवेशकों ने पैसे मांगने शुरू किये तो कई एजेंटों ने जान तक दे दी थी। घोटाले में पश्चिम बंगाल सरकार पर भी सवाल उठे थे।

- शारदा ग्रुप से जुड़े पश्चिम बंगाल के कथित चिटफंड घोटाले के 2,460 करोड़ रुपए तक का होने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल पुलिस और ईडी की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 80 पर्सेंट जमाकर्ताओं के पैसे का भुगतान किया जाना बाकी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, उड़िसा और असम की पुलिस को आदेश दिया गया था कि वे सीबीआई के साथ जांच में सहयोग करें और इस घोटाले की सभी जानकारी सीबीआई को दें।