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प.बंगाल में विकास के दावे और हकीकत:टाइगर लैंड ‘सुंदरबन’ में कई नदियां, पर यहां पानी का संकट ही मुख्य मुद्दा; खेती छोड़ मछली पकड़ने लगे किसान

9 महीने पहलेलेखक: बंगाल के सुंदरबन से विशाल पाटडिया
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में स्थानीय लोगों के लिए पानी का मुद्दा सबसे बड़ा है। इस इलाके में कई नदियां होने के बावजूद यहां पानी का संकट है।
  • एक ट्यूबवेल पर एक से सवा लाख खर्च के बाद भी पानी की गारंटी नहीं

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से 130 किमी दूर साउथ 24 परगना जिले में स्थित सुंदरबन आइलैंड बाघों के लिए मशहूर है। गोसबा, बसंती, सागर, कैनिंग वेस्ट, कैनिंग ईस्ट, कुलतूली, सागर जैसी सीटें इसी इलाके में पड़ती हैं। चुनाव आयोग ने पारंपरिक धोती पहने हुए बाघ को अपना प्रतीक बनाया है। लेकिन, यहां के स्थानीय लोग तृणमूल सरकार के विकास के दावों के बावजूद बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं। इस इलाके में हुगली, मातला, बिद्याधरी और गोसबा जैसी नदियां है। इसके बाद भी यहां पानी की किल्लत है।

खेती छोड़ मछली पकड़ रहे लोग

यहां के रहने वाले मानस सरदार कहते हैं कि पानी की समस्या इतनी बड़ी है कि ट्यूबवेल लगवाने में 1.25 लाख रुपए खर्च हो गए लेकिन पानी की समस्या खत्म नहीं हुई। यहां के पानी में भारी मात्रा में आर्सेनिक भी मिला हुआ है। सालों पहले यहां धान की खेती बड़े पैमाने पर होती थी। लेकिन, जमीन में सालिनिटी बढ़ने के चलते अब लोग मछली पालन करने लगे हैं।

जिसारी फार्मर्स क्लब के लोकल मेंबर विष्णुपद प्रधान कहते हैं कि यह आइलैंड मुसीबत में है। वॉटर लेवल काफी नीचे चला गया है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जमीन दिन पर दिन खारा होती जा रही है। इसलिए हम लोग दूसरे व्यवसाय की तरफ शिफ्ट होना पड़ रहा है।

सुंदरबन इलाके में ज्यादातर लोगों के पास पक्के घर नहीं है। यहां गरीबी और भूखमरी भी बड़ा मुद्दा है।
सुंदरबन इलाके में ज्यादातर लोगों के पास पक्के घर नहीं है। यहां गरीबी और भूखमरी भी बड़ा मुद्दा है।

कनेक्टविटी भी बड़ा इश्यू है

सुंदरबन में 100 से ज्यादा आइलैंड है, यहां 270 के करीब अभी बाघ हैं। हर साल बड़े लेवल पर टूरिस्ट यहां आते हैं। कोलकाता के रहने वाले स्वरोजित रॉय एक टूर ऑपरेटर हैं। पिछले 20 साल से वे यहां काम कर रहे हैं। कहते हैं,' इस इलाके में शायद ही कोई बढ़िया होटल है। रोड खराब होने के चलते कनेक्टविटी भी बड़ा इश्यू है। हम इसे इंटरनेशनल टूरिस्ट प्लेस कैसे कह सकते हैं? यहां तो कोई बुनियादी ढांचा नहीं है।

बाघ शांत हैं, राजनीतिक हिंसा बढ़ गई है

स्थानीय निवासी प्रलय कहते हैं कि गरीबी यहां सबसे बड़ा मुद्दा है। लोगों को अब बिजली, सड़क और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी शुरू हो गई हैं। एक समय था जब यहां के लोगों को भूखे रहना पड़ता था। जैसे-जैसे लोग गहरे जंगलों में जाना बंद कर रहे हैं, वैसे-वैसे उनका बाघों के साथ संघर्ष कम हो गया है। हालांकि, डेवलपमेंट नहीं होने के चलते, राजनीतिक हिंसा एक बड़ा मुद्दा है। आप कह सकते हैं कि बाघ जो वर्षों से प्रवृत्ति से हिंसक रहा है, वह शांत हो गया है और लोग राजनीतिक हिंसा में अधिक लिप्त हो गए हैं।

इस इलाके में हुगली, मातला, बिद्याधरी और गोसबा जैसी नदियां है। इसके बाद भी यहां पानी की किल्लत है।
इस इलाके में हुगली, मातला, बिद्याधरी और गोसबा जैसी नदियां है। इसके बाद भी यहां पानी की किल्लत है।

बंगाल का रॉयल टाइगर जीतेगा और गिर लायन हारेगा- TMC

TMC के विधायक जयंत नस्कर कहते हैं कि हमारे प्रयासों के बाद अब बाघों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। लोगों और बाघों के बीच संघर्ष कम हो गया है। हमने बाघों के हमले में जान गंवानों वालों को मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाकर तीन लाख रुपए कर दिया है। गोसबा और उसके आस-पास के इलाकों में गहरे कुएं खोदे हैं ताकि यहां रहने वालों लोगों के घरों में पाइप के जरिए पानी पहुंचाया जा सके।

नस्कर कहते हैं कि हमने पानी बचाने का अभियान भी शुरू किया है ताकि फसलों की सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं हो। इसके साथ ही हमने नदी के ऊपर तीन ओवर ब्रिज बनाने का भी प्रस्ताव रखा है ताकि कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके। हमें पक्का यकीन है कि बंगाल का रॉयल टाइगर जीतेगा और गिर लायन हारेगा।

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