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  • Widespread Mask Use And Data driven Social Distancing Measures In India May Help Prevent Over 200,000 COVID 19 related Deaths In India By December 1

कोरोना पर रिपोर्ट में दावा:भारत में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग से 1 दिसंबर तक 2 लाख मौतों को रोका जा सकता है, लॉकडाउन में ढील से करीब 5 लाख मौतें हो सकती हैं

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
महाराष्ट्र के कराद में पीपीई किट पहनकर कोरोना मरीजों के शव जलाते परिजन। देश में 65 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
  • अगर महामारी बढ़ती है तो 13 राज्यों में उस समय तक कुल 10,000 से ज्यादा मौतें होंगी
  • फिलहाल केवल महाराष्ट्र ऐसा राज्य है, जहां पहले ही यह आंकड़ा पार हो चुका है

भारत में मास्क का इस्तेमाल करके और सोशल डिस्टेंसिंग अपनाकर 1 दिसंबर तक कोरोना से होने वाली दो लाख मौतों को रोका जा सकता है। वहीं, अगर लॉकडाउन में ढील दी गई तो करीब 5 लाख लोगों की जान जा सकती है। यह बात एक स्टडी में सामने आई है। इसके मुताबिक, बीमारी लंबे समय तक पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा बनी रहेगी।

यह स्टडी अमेरिका में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) ने की है। इसके मुताबिक, हमारे पास देश में कोरोना से होने वाली मौतों को और सीमित करने का एक अवसर है। यह रिपोर्ट मास्क के इस्तेमाल, सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरी पाबंदियों की जरूरतों के बारे में बताती है। पब्लिक हेल्थ अधिकारियों द्वारा ऐसी ही सलाह दी भी जाती है।

मास्क वायरस को फैलने से रोकने में काफी मददगार

आईएचएमई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर मरे ने कहा कि भारत में महामारी बढ़ रही है। अभी भी बड़ी आबादी के इसकी चपेट में आने का खतरा बना हुआ है। मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग से वायरस को फैलने से रोकने में काफी मदद मिलेगी। हमारी स्टडी से पता चलता है लोग और सरकार मौजूदा समय और आने वाले समय में कौन से काम या फैसले लेते हैं, इस पर महामारी का असर निर्भर करता है।

पहले ही 5 लाख मौत होने की आशंका जाहिर की गई थी

इस स्टडी से सामने आई बातों को हरियाणा के अशोका यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स और बायोलॉजी के प्रोफेसर गौतम मेनन ने भी सच माना है। मेनन ने कहा- यह बिल्कुल सच है कि मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग ने महामारी को काफी हद तक धीमा कर दिया है।

उन्होंने कहा- आईएचएमई की स्टडी में दिसंबर से संक्रमण के आंकड़े हर दिन 60 लाख के ऊपर होने का अनुमान लगाया गया था। अगर इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया तो हर दिन करीब 5 लाख मौतें होने की आशंका जाहिर की गई थी।

हालांकि, आईएचएमई के अनुमान दूसरे मॉडल और स्टडी के मुकाबले कम हैं। दूसरे मॉडल के हिसाब से 15 दिसंबर तक ही संक्रमण के पीक पर पहुंचने की आशंका जाहिर की जा रही थी।

भारत ने महामारी पर काफी हद तक सफलता पाई

आईएचएमई के रिसर्चर्स ने कहा कि कोरोना की रोकथाम के लिए भारत की कोशिशों को काफी हद तक सफलता भी मिली है। उन्होंने इसके लिए दिल्ली समेत कुछ दूसरे शहरी इलाकों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, बड़े स्तर पर टेस्टिंग, मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीजों को जरूरी करने से संक्रमण कम करने में मदद मिली है।

उनके मॉडलिंग स्टडी में पाया गया कि अगर अच्छी स्थिति रही तो भारत में 1 दिसंबर तक कुल 2,91,145 मौतें हो सकती हैं। इसमें यह भी कहा गया कि अगस्त के अंत तक देश में 60 हजार से ज्यादा मौतें हो जाएंगी। स्टडी के मुताबिक, यदि लॉकडाउन से जुड़ी पाबंदियों में ढील दी जाती है और मास्क का इस्तेमाल नहीं होता है तो भारत में 1 दिसंबर तक कुल 4,92,380 मौतें हो सकती हैं।

महाराष्ट्र में 10 हजार से ज्यादा मौतें

अगर महामारी बढ़ती है तो 13 राज्यों में दिसंबर तक कुल 10,000 से ज्यादा मौतें होंगी। फिलहाल सिर्फ महाराष्ट्र ऐसा राज्य है, जहां यह आंकड़ा पहले ही पार हो चुका है। मरे ने कहा कि जिन राज्यों के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं हैं वहां मौतें ज्यादा होंगी। इसका असर वहां की अर्थव्यवस्था पर भी होगा।

वैक्सीन के आने तक महामारी बढ़ने का खतरा

रिसर्चर्स ने कहा कि जब तक कोरोना का वैक्सीन बड़े पैमाने पर मिलना शुरू नहीं होता, तब तक भारत की ज्यादातर आबादी के इसकी चपेट में आने की आशंका है। हर राज्य में मॉनीटरिंग ट्रेंड, मास्क के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, सोशल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई को लेकर जागरूकता पैदा की जानी चाहिए। इससे भारत के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर महामारी के असर को कम किया जा सकता है।

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