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दिल्ली / 30 खरगोशों और 150 इंसानों पर परीक्षण के बाद स्वदेशी डेंटल इम्प्लांट तैयार, 3 गुना सस्ता

प्रो. नरेश भटनागर प्रो. नरेश भटनागर
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प्रो. नरेश भटनागरप्रो. नरेश भटनागर

  • 10 साल के शोध के बाद आईआईटी दिल्ली और भारतीय वैज्ञानिकों को सफलता मिली
  • पहली बार नेनो टेक्नाेलॉजी से डेंटल इम्प्लांट तकनीक भी विकसित होगी
  • भारतीय डेंटल इम्प्लांट की कीमत 7.5 हजार, जबकि स्वीडन के इम्प्लांट की कीमत 20 हजार रुपए हाेती है

Dainik Bhaskar

Dec 01, 2019, 11:39 AM IST

नई दिल्ली (अमित कुमार निरंजन). अब आप स्वदेशी कृत्रिम दांत (डेंटल इम्प्लांट) भी लगवा सकेंगे। आईआईटी दिल्ली और मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के वैज्ञानिकों ने एक दशक की मेहनत से भारतीय डेंटल इम्प्लांट तैयार किया है। अभी तक भारत में चीन, अमेरिका, यूरोप, इजराइल, कोरिया से ये इम्प्लांट मंगाए जाते हैं। भारतीय डेंटल इम्प्लांट तीन गुना ज्यादा सस्ते पड़ेंगे। भारतीय डेंटल इम्प्लांट की कीमत 7.5 हजार रुपए हाे सकती है, जबकि इसी गुणवत्ता के स्वीडन के इम्प्लांट की कीमत 20 हजार रुपए हाेती है। देश में हर साल 5-6 लाख मरीज डेंटल इम्प्लांट करवाते हैं। 

इस प्रोजेक्ट पर मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के पूर्व डायरेक्टर महेश वर्मा और आईआईटी दिल्ली के प्रो. नरेश भटनागर ने काम किया है। प्रो. भटनागर ने बताया कि यह प्राेजेक्ट सीएसआईआर की मदद से शुरू किया गया था।

टीम ने पांच हजार से ज्यादा पेटेंट पर शोध किए

टीम ने दुनियाभर के पांच हजार से ज्यादा पेटेंट पर शोध किए। उसके बाद 250 डिजाइन टेस्ट किए। 249 फेल हुए। 250वें टेस्ट में बेहतर मॉडल मिल पाया। यह काम 2011 तक पूरा हो चुका था। इसके बाद 30 खरगोशों पर क्लीनिकल ट्रायल किया गया। इसके बाद 150 मरीजों पर परीक्षण किया गया। दोनों सफल रहे। उसके बाद कंपनियों से बिड मंगाई गई। देश की एक कंपनी ने 2017 में तकनीक खरीद कर फरीदाबाद में प्लांट लगाया। पिछले महीने ही इसका पेटेंट मिला है। दो हफ्ते पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी थी।

एक सिटिंग में डेंटल इम्प्लांट होगा
प्रो. भटनागर ने बताया कि अभी इम्प्लांट के लिए दांतों में ड्रिल करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में दांतों की हड्‌डी की चीरफाड़ हो जाती है और डॉक्टर के साथ 4-5 सिटिंग करनी पड़ती है। आईआईटी द्वारा विकसित बोन थ्रेड फॉर्मिंग डिजाइन में चीरफाड़ नहीं होगी। यह हडि्डयां इम्प्लांट को जकड़ लेंगी। इससे रिकवरी जल्दी होगी। नैनो टेक्नाेलॉजी के आधार पर ड्रग इल्यूटिंग डेंटल इम्प्लांट भी बनाया जा रहा है, जो घाव तेजी से रिकवर करेगा। डॉक्टर के साथ एक सिटिंग में डेंटल इम्प्लांट हो जाएगा। 

भारत में मेडिकल डिवाइस की टेस्टिंग के नियम सख्त नहीं
प्रो. भटनागर ने बताया कि भारत में विदेशों से आने वाले मेडिकल डिवाइस की टेस्टिंग के नियम सख्त नहीं हैं। भारत में सिर्फ यहीं बनने वाले डिवाइस की जांच होती है। विदेशी कंपनियां अपने देश के टेस्ट सर्टिफिकेट दिखाकर यहां डेंटल इम्प्लांट बेचती हैं। ये काफी महंगे हाेते हैं। अभी सबसे ज्यादा इजराइल का डेंटल इंप्लांट प्रयोग किया जाता है। सस्ता विकल्प उपलब्ध होने से विदेशी इम्प्लांट पर निर्भरता कम होगी। 

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