दिल्ली / देशभर में मेडिकल पीजी डिप्लोमा खत्म, अधर में करीब 600 सीटें



MCI Finished Medical PG Diploma across the country
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MCI Finished Medical PG Diploma across the country

  • एमसीआई ने 25 से 30 कॉलेजों के डिप्लोमा कोर्स को डिग्री कोर्स में बदलने से किया इनकार
  • एमसीआई ने हाल ही में करीब 1000 डिप्लोमा सीट को डिग्री में बदला

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 06:35 AM IST

नई दिल्ली (पवन कुमार). केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के मेडिकल कॉलेजाें में प्रोफेसर्स की संख्या बढ़ाने के लिए पीजी डिप्लोमा कोर्स को डिग्री कोर्स में बदलने का निर्णय लिया था। इसके बाद डिप्लोमा कोर्स को डी-नोटिफाई (डिप्लोमा कोर्स खत्म) भी कर दिया गया। मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण के बाद हाल ही में एमसीआई ने करीब 1000 डिप्लोमा सीट को डिग्री में बदल दिया लेकिन करीब 600 सीटों को डिग्री कोर्स में बदलने से इनकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि 600 पीजी सीट पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि एमसीआई के निर्णय के बाद इन सीटों पर न तो डिप्लोमा कोर्स में दाखिला हो सकता है और न ही डिग्री कोर्स में।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के डिप्लोमा को डिग्री में बदलने का प्रस्ताव मिलने के बाद एमसीआई ने मेडिकल कॉलेजों की जांच की। इसके बाद करीब 25 से 30 मेडिकल कॉलेजों में चल रहे पीजी िडप्लोमा को डिग्री कोर्स में बदलने से इनकार कर दिया। कहीं स्टूडेंट्स की संख्या के तुलना में प्रोफेसर नहीं थे, कहीं इन्फ्रास्ट्रक्चर तो कहीं प्रयोगशाला स्टैंडर्ड का नहीं था। एमसीआई का कहना है कि डिप्लोमा सीट को डिग्री में तभी बदला जा सकता है जब उस मेडिकल कॉलेज में डिग्री कोर्स चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। 28 फरवरी तक सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों की संख्या स्पष्ट हो जानी चाहिए थी, जो अभी तक नहीं हो पाई है। 

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन मेडिकल कॉलेजों में पीजी डिप्लोमा सीट को डिग्री कोर्स में नहीं बदला जा सका है, वहां दुबारा से डिप्लोमा कोर्स को नोटिफाई कर दिया जाए इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। दूसरी काउंसलिंग के बाद इन डिप्लोमा सीटों पर दाखिला इसी सत्र (वर्ष-2019-20) से संभव है।

 

डिप्लोमा और डिग्री कोर्स में फर्क:

डिप्लोमा दो वर्ष का होता है जबकि डिग्री तीन वर्ष का होता है। डिग्री कोर्स करने के बाद मरीजों के इलाज के साथ-साथ मेडिकल छात्रों को पढ़ाने के लिए योग्य होते हैं जबकि डिप्लोमा के बाद सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टर के तौर पर मरीजों का इलाज कर सकते हैं। उधर सत्र-2017-18 और 2018-19 के पीजी डिप्लोमा स्टूडेंट्स का कहना है कि उनके कोर्स को भी अभी से ही डिग्री में कन्वर्ट किया जाना चाहिए।

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