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बयान / मेधा पाटकर ने कहा- एक व्यक्ति के लिए सरदार सरोवर बांध जल्दी भरा गया, 192 गांव जलमग्न हुए



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  • सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा- बांध के समय से पहले भर जाने से लोगों को मुश्किलें हो रही
  • पाटकर ने कहा- बांध से पैदा होने वाली बिजली पर मध्यप्रदेश का भी हक, लेकिन उसे नहीं मिल रहा

Dainik Bhaskar

Sep 18, 2019, 05:46 PM IST

भोपाल. नर्मदा बचाओ आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी से कहा कि केवल एक व्यक्ति के लिए सरदार सरोवर बांध को समय से पहले भरा गया। इस कारण मध्यप्रदेश के तीन जिले धार, बड़वानी और अलीराजपुर के लगभग 192 गांव जलमग्न हो गए। दरअसल, पाटकर का इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर था। 

 

उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार द्वारा बांध के जलस्तर को निर्धारित समय से पहले 138.68 मी. बढ़ा दिया गया। अब इन गांवों के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पाटकर ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के बावजूद अभी तक सरदार सरोवर बांध से प्रभावित लोगों का पुनर्वास नहीं हुआ है।

 

शिवराज सरकार इसके लिए जिम्मेदार: पाटकर

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दावा कर रही है कि इन्हें गुजरात सरकार से मुआवजे के तौर पर 1,857 करोड़ रुपए नहीं मिले हैं। शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली मध्यप्रदेश की पूर्व सरकार इसके लिए जिम्मेदार है, जिसने पुनर्वास कार्य पूरा करने का दावा करते हुए शपथपत्र सौंप दिया और प्रभावित परिवारों का अधिकार छीन लिया।

 

पाटकर ने कहा- गुजरात सरकार के लिए संविधान मायने नहीं रखता
पाटकर ने कहा कि गुजरात की रूपाणी सरकार ने पहले कहा था कि सरदार सरोवर 15 अक्टूबर तक भरा जाएगा। बाद में इसके लिए 30 सितंबर का समय तय किया गया। ऐसे में मोदी के जन्मदिन से पहले 17 सितंबर को ही बांध कैसे भर गया? उन्होंने कहा कि अब स्पष्ट हो गया है कि गुजरात सरकार के लिए संविधान कोई मायने नहीं रखता।

 

पाटकर ने कहा- मध्य प्रदेश के साथ भेदभाव हो रहा
पाटकर के मुताबिक, सरदार सरोवर परियोजना एक अंतरराज्यीय परियोजना है। ऐसे में मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव क्यों हो रहा है? शिवराज सिंह सरकार ने मोदी और गुजरात सरकार के सामने समर्पण कर दिया। शिवराज ने अपने राज्य के बारे में कभी सच नहीं बोला। बांध से पैदा होने वाली बिजली में मध्यप्रदेश का भी हक है लेकिन पूर्व सरकार इस पर भी मौन रही है।

 
 

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