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डॉक्टरों के जज्बे के आगे तूफान भी बौना:केरल में मेडिकल टीमें नदी पार कर और 17 किमी पैदल चल जंगलों में बसे गांव पहुंच रहीं

पलक्कड़ (केरल)13 दिन पहलेलेखक: के ए शाजी
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तूफान की वजह से कटे इलाकों में भी जांच के लिए डॉक्टर पहुंच रहे हैं। - Dainik Bhaskar
तूफान की वजह से कटे इलाकों में भी जांच के लिए डॉक्टर पहुंच रहे हैं।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में तूफान भी हमारे डॉक्टर्स का रास्ता रोक नहीं पा रहा है। इन्हीं में से एक हैं केरल की 40 वर्षीय महिला डॉक्टर केए सुखान्या हैं। ताऊते तूफान ने पलक्कड़ जिले के अट्टापदी जिले के जंगलों में बसे गांवों के रास्ते काट दिए। यहां की भवानी नदी भी हिलोरें मार रही थी। लेकिन यह तूफान सुखान्या की टीम को पश्चिमी घाट के जंगलों में बसे मुरुगला आदिवासी बस्ती जाने से नहीं रोक सका।

इनके साथ हेल्थ इंस्पेक्टर सुनील वासु, सहायक हेल्थ इंस्पेक्टर शाजू और ड्राइवर संजेश भी थे। 17 किमी पैदल चलने और उफनती नदी को पार करने के बाद यह दल यहां पहुंचा। बीते दिनों की गई इस यात्रा पर सुखान्या कहती हैं कि यह हमारी ड्यूटी का हिस्सा है। कई जगह पानी गर्दन तक था। 30 किमी की यात्रा में हम 13 किमी ही एंबुलेंस से तय कर पाए। बाकी यात्रा टीम ने पैदल और नदी पार कर पूरी की।

गांव पहुंचने पर और जांच के बाद हमें सात लोगों में कोविड के लक्षण दिखे। हमें पुदुर कस्बे के कोविड सेंटर तक लाने में उनसे काफी मिन्नतें करनी पड़ीं। अब यहां इनकी देखभाल की जा रही है। 32,956 आदिवासियों का घर, अट्टापडी केरल का सबसे पिछड़ा क्षेत्र है, जो तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के साथ सीमा साझा करता है।

इस दूरदराज के इलाके ने दूसरी लहर में महामारी का तेजी से प्रसार देखा है। यहां के नोडल स्वास्थ्य अधिकारी आर. प्रभुदास बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को तूफान और भारी बारिश के चलते इन दिनों दूरस्थ आदिवासी बस्तियों तक पहुंचने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। बावजूद इसके डॉक्टरों की टीम दूरदराज के सभी गांवों में पहुंच रही है। साथ ही, दूरदराज इलाकों में हर पीएचसी में एक डॉक्टर को तैनात किया गया है।

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