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महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी 3 महीने बढ़ी:पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम अभी हिरासत में रहेंगी, पिछले साल 5 अगस्त के बाद से ही नजरबंद

श्रीनगर7 दिन पहले
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पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही महबूबा मुफ्ती हिरासत में हैं।
  • पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 में जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया था, इसके तहत किसी को भी बिना ट्रायल के 2 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है
  • जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला को 15 मार्च और 10 दिन बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला को 25 मार्च को रिहा किया गया था
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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूब मुफ्ती की नजरबंदी तीन महीने और बढ़ा दी गई है। पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत यह फैसला लिया गया है। पिछले साल 5 अगस्त को राज्य से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। उस दिन आधी रात को महबूबा समेत जम्मू-कश्मीर के सैकड़ों नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद से ही वे नजरबंद हैं।

6 फरवरी को महबूबा की हिरासत की अवधि समाप्त होने से पहले ही उन पर पब्लिक सेक्युरिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं, अप्रैल में उन्हें अस्थाई जेल से श्रीनगर की गुपकार रोड स्थित उनके आधिकारिक आवास पर शिफ्ट कर दिया गया था।

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के 1 साल होने वाले हैं

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के 5 अगस्त को एक साल होने वाले हैं। इस दौरान महबूबा को चार बार नजरबंद रखने का स्थान बदला गया है। सबसे पहले उन्हें श्रीनगर के हरि निवास गेस्ट हाउस में रखा गया था। दूसरी बार उन्हें चश्मा शाही इलाके में पर्यटन विभाग के गेस्ट हाउस भेज दिया गया था। इसके बाद से उन्हें श्रीनगर के ही ट्रांसपोर्ट यार्ड के सरकारी क्वार्टर में रखा गया था। यह चौथी बार है जब उन्हें अस्थाई जेल से किसी दूसरे स्थान पर भेजा गया है।

फारूक और उमर अब्दुल्ला रिहा हो चुके हैं

महबूबा जम्मू-कश्मीर की अकेली ऐसी बड़ी नेता हैं, जिन्हें अभी तक नजरबंद रखा गया है। उनके साथ ही हिरासत में लिए गए पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को रिहा किया जा चुका है। फारूक को 15 मार्च को रिहा किया गया था। वहीं, उमर को इसके 10 दिन बाद 25 मार्च को रिहा किया गया था। रिहाई के बाद उमर ने सभी नेताओं की नजरबंदी खत्म करने की मांग की थी।

लकड़ी तस्करों के खिलाफ बना था पब्लिक सेफ्टी एक्ट

पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 में जम्मू-कश्मीर में लागू कर दिया गया था। इसके तहत किसी को भी बिना ट्रायल के 2 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। पहले तो यह कानून लकड़ी की तस्करी करने वालों के खिलाफ बना था, लेकिन धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल अन्य आपराधिक मामलों में भी होने लगा। इसका खासकर तब इस्तेमाल किया गया, जब 2010 में जम्मू-कश्मीर में कई महीनों तक हालात खराब रहे।

1949 में संविधान में जोड़ा गया अनुच्छेद 370

26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने विलय संधि पर दस्तखत किए थे। उसी समय अनुच्छेद 370 की नींव पड़ गई थी, जब समझौते के तहत केंद्र को सिर्फ विदेश, रक्षा और संचार मामलों में दखल का अधिकार मिला था। 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 को पहली बार भारतीय संविधान में जोड़ा गया।

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