जम्मू-कश्मीर / पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत 3 नेताओं की नजरबंदी 3 महीने बढ़ी, उमर अब्दुल्ला ने फैसले को अमानवीय बताया

पीएसए के तहत महबूबा मुफ्ती की हिरासत गुरुवार को खत्म हो रही थी। (फाइल) पीएसए के तहत महबूबा मुफ्ती की हिरासत गुरुवार को खत्म हो रही थी। (फाइल)
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पीएसए के तहत महबूबा मुफ्ती की हिरासत गुरुवार को खत्म हो रही थी। (फाइल)पीएसए के तहत महबूबा मुफ्ती की हिरासत गुरुवार को खत्म हो रही थी। (फाइल)

  • महबूबा मुफ्ती अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से हिरासत में, 5 फरवरी को लगाया गया था पीएसए
  • कोरोना संकट के चलते महबूबा को उनके घर में शिफ्ट किया, उमर और फारूक अब्दुल्ला रिहा हो चुके हैं

दैनिक भास्कर

May 06, 2020, 01:53 AM IST

श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को फिलहाल रिहाई नहीं मिलेगी। मंगलवार को महबूबा समेत तीन नेताओं की हिरासत 3 महीने के लिए बढ़ा दी गई। इनमें पूर्व मंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर और पीडीपी नेता सरताज मदानी भी शामिल हैं। तीनों नेता 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही हिरासत में हैं। इसी साल 5 फरवरी को इन पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) लगाया गया था। गुरुवार को हिरासत की अवधि खत्म हो रही थी। कोरोना संकट को देखते हुए महबूबा को अस्थायी जेल से उनके घर में शिफ्ट कर दिया गया है।

उमर अब्दुल्ला ने सरकार के फैसले को क्रूर बताया
महबूबा मुफ्ती की हिरासत बढ़ाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे क्रूर और अमानवीय बताया है। उमर ने ट्वीट किया, ''उन्होंने (महबूबा मुफ्ती) कुछ नहीं किया और कुछ नहीं बोला। इसके बावजूद उनके साथ इस तरह का अन्याय किया जा रहा है।''

फारूक और उमर अब्दुल्ला हो चुके हैं रिहा
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला को रिहा किया जा चुका है। इन दोनों के ऊपर भी पीएसए लगाया गया था। जिसे पिछले महीने वापस ले लिया गया। फारूक और उमर ने महबूबा समेत सभी नेताओं को नजरबंदी से रिहा करने की अपील की थी।

क्या है पीएसए?
जम्मू-कश्मीर में 1978 में अस्तित्व में आए जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत किसी व्यक्ति को बिना ट्रायल के ही 6 महीने जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार इस अवधि को 2 साल तक बढ़ा सकती है। दरअसल इसमें दो प्रावधान हैं। पहला लोक व्यवस्था और दूसरा राज्य की सुरक्षा को खतरा। पहले प्रावधान के तहत किसी को बिना मुकदमा छह महीने और दूसरे प्रावधान के तहत दो साल तक जेल में रखा जा सकता है।

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