लोकसभा का समापन सत्र / गले मिलने और गले पड़ने का अंतर मुझे संसद में ही पता चला: मोदी



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  • 16वीं लोकसभा की बुधवार को आखिरी बैठक थी, सदन स्थगित होने से पहले मोदी का संबोधन हुआ
  • मोदी ने कहा- पिछले पांच साल में विपक्ष ने भी इस सदन की ताकत बढ़ाई
  • उन्होंने कहा- संसद में भूकंप तो नहीं आया, आंखों की गुस्ताखियां देखने को जरूर मिलीं
  • मोदी ने कहा- हमने बिना कांग्रेस के गोत्र वाली पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 07:53 PM IST

नई दिल्ली.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 16वीं लोकसभा के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान मोदी ने कहा कि इस सदन में मुझे गले लगने और गले पड़ने का अंतर पता चला। मोदी संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई घटना का जिक्र कर रहे थे, जिसमें राहुल ने अपने भाषण के बाद अचानक मोदी को गले लगा लिया था। उन्होंने राहुल पर तंज कसा कि हम सुनते थे कि सदन में भूकंप आएगा। 5 साल हो रहे हैं, संसद में भूकंप तो नहीं आया... आंखों की गुस्ताखियां देखने को जरूर मिलीं।


5 साल में विपक्ष ने ताकत बढ़ाने का काम किया
मोदी ने कहा कि तीन दशक के बाद हमने पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई थी। आजादी के बाद पहली बार बिना कांग्रेस के गोत्र वाली सरकार बनाई थी। कांग्रेस का गोत्र नहीं, ऐसी पहली मिलीजुली सरकार अटलजी की थी और ऐसी पूर्ण बहुमत वाली सरकार 2014 में बनी। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की तारीफ भी की। मोदी ने कहा- अगर 5 साल के ब्योरे को देखें तो विपक्ष ने इसकी ताकत को बढ़ाने का काम किया। सदन के सभी साथियों का इसमें गौरवपूर्ण योगदान है।

 

'इस कार्यकाल में महिला सांसदों की भागीदारी बढ़ी'

मोदी ने कहा, "16वीं लोकसभा पर इस बात के लिए भी गर्व करेंगे कि देश में इतने चुनाव हुए, उसमें पहली बार महिला सांसदों की भागीदारी बढ़ी। 44 महिला सांसद पहली बार आईं। सभी महिलाओं ने सदन में अपनी मौजूदगी पर्याप्त रूप से दर्ज करवाई। इसके लिए हमें इनका अभिनंदन करना चाहिए। पहली बार स्पीकर महिला हैं, रजिस्ट्रार जनरल और सिक्युरिटी जनरल भी महिला के तौर पर यहां मौजूद हैं। हमारी रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री भी महिला हैं।''

 

'आज भारत का आत्मविश्वास बढ़ा'

प्रधानमंत्री ने कहा, ''आज देश दुनिया की छठे नंबर की अर्थव्यवस्था बना है। नीति-निर्धारण यहीं से हुआ है और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं। आज भारत का आत्मविश्वास बहुत बढ़ा है, आगे बढ़ने-जीतने के लिए-संकटों से उबरने के लिए इस ताकत की जरूरत होती है।''

 

'आज भारत की दुनियाभर में सुनवाई हो रही'

मोदी ने कहा, "अंतरिक्ष में हमने अपना अलग स्थान बनाया। वैश्विक परिवेश में भारत को गंभीरता से सुना जा रहा है। लोगों को भ्रम होता है कि मोदीजी-सुषमाजी के कार्यकाल में हमारी दुनिया में सुनवाई हो रही है। लेकिन, इसके पीछे एक सच्चाई है, जो है पूर्ण बहुमत की सरकार। दुनिया इसे पहचान देती है। 30 साल तक इसकी कमी से हमें बहुत नुकसान हुआ। उस देश का नेता जिसके पास पूर्ण बहुमत होता है, तो दुनिया जानती है कि इसकी अपनी एक ताकत है। इसका पूरा यश न मोदी को और न सुषमा को जाता है, ये सवासौ करोड़ देशवासियों के उस निर्णय को जाता है।''

 

'दुनियाभर में मानवता के कामों में भारत ने बड़ी भूमिका निभाई'
प्रधानमंत्री ने कहा- विदेशों में अनेक संस्थाओं में भारत को स्थान मिला, उसे सुना गया। बांग्लादेश में जमीन विवाद का इसी सदन में हल निकाला गया। हमारी अपनी एक विशेषता रही है कि हमने मिलजुलकर इस काम को किया है। हमारी विदेश नीति का एक नया पहलू उभरकर आया। दुनिया में मानवाधिकार, मानव मूल्यों पर दुनिया के किसी एक छोर का अधिकार रहा है, ऐसा लगता था। हमें मानवाधिकार विरोधी जैसी छवि बन गई थी। पिछले 5 साल में नेपाल में भूकंप, फिजी में साइक्लोन, श्रीलंका में पानी का संकट, म्यांमार की मुसीबत रही हो, यमन में फंसे हमारे लोगों को वापस लाने की बात हो। मानवता के काम में भारत ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। योगा के संबंध में यूएन में सबसे तेज रिजोल्यूशन पास किया गया, महात्मा गांधी, अंबेडकर का दुनिया के कई देशों में जन्मदिन मनाया जा रहा है। दुनिया के 125 देशों के प्रसिद्ध गायकों ने वैष्णव जन को गाकर 150वीं जयंती को बहुत बड़ी पहचान दी। 

 

'भ्रष्टाचार-कालेधन के खिलाफ कानून बना भावी सदियों की सेवा की'

उन्होंने कहा, "करीब 219 बिल लाए गए और 203 बिल पारित हुए हैं। इस सदन में जो आज सदस्य हैं, वह जब भी इस 16वीं लोकसभा के बारे में बताएंगे तो वह गर्व से कहेंगे कि हम उस कार्यकाल के सदस्य थे, जिसमें कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कानून बनाए गए। बेनामी, दीवालिया, आर्थिक अपराध करने वाले भगोड़ों के खिलाफ कानून इसी सदन ने बनाया है। इस सदन ने आने वाली सदी की सेवा की है। क्रेडिट लेने की कोशिश किए बिना पूर्व वित्त मंत्री और तत्कालीन राष्ट्रपति के हाथों रात 12 बजे संयुक्त सत्र में जीएसटी को लागू किया गया। आधार को भी इसी सदन ने लागू किया, जिसने विश्व का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इस सदन ने सामाजिक न्याय के लिए उच्च वर्ण के गरीबों के लिए 10 % बिना किसी उलझन और कटुता के लागू किया।'

 

'ये पहला कार्यकाल था, बाकी मुलायमजी ने बता दिया'

मोदी ने कहा- ओबीसी के लिए कमीशन बनाने का विषय हो या एससी-एसटी एक्ट की बात हो, हमने इसे साथ किया। मैटरनिटी बेनिफिट के मामले में विश्व के समृद्ध देश आश्चर्य करते हैं कि इसे 12 हफ्ते से 26 हफ्ते कर दिया गया है। हमने 1400 से ज्यादा कानून खत्म किए। कानूनों के जंगल में हमने रास्ते खोजने की शुभ शुरुआत हुई है। कुछ बाकी है। यह मेरा पहला कार्यकाल है और बाकी बहुत कुछ है। उसे भी करेंगे, बाकी उसके लिए मुलायम सिंह जी ने आज बोल ही दिया है।

 

'सांसदों के वेतन पर आलोचनाओं से बचने का रास्ता निकाला'
"हम सभी सांसदों पर एक कलंक हमेशा लगा रहता था कि हम ही हमारे वेतन तय करते हैं और बढ़ाते हैं, देश की परवाह नहीं करते। वेतन बढ़ने पर टीका-टिप्पणी शुरू हो जाती थी। पहली बार सांसदों ने मिलकर इस आलोचना से मुक्ति का रास्ता खोज लिया। अब दूसरों का जब होगा, तब हमारा भी हो जाएगा। हमारे जितेंद्रजी ने अच्छा खाना खिलाया। लेकिन, अक्सर सुनते थे कि यहां सस्ता है और बाहर महंगा है। अब आपको जेब में थोड़ा नुकसान हो गया, लेकिन उस आलोचना से भी मुक्ति पाने का कदम हमने उठाया है।"

 

'सदन में जहाज उड़ाए गए, बड़े-बड़े लोगों ने उड़ाए'
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसा, "हम कभी-कभी सुनते थे कि भूकंप आएगा। 5 साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है, लेकिन भूकंप नहीं आया। कभी हवाई जहाज उड़े, बड़े-बड़े लोगों ने हवाई जहाज उड़ाया। लोकतंत्र की मर्यादा ऐसी है कि भूकंप भी पचा गया और कोई हवाई जहाज उतनी ऊंचाई तक नहीं जा पाया। कभी ऐसे शब्दों का प्रयोग भी हुआ, जिनका नहीं होना चाहिए। किसी भी सदस्य द्वारा कभी ऐसा हुआ हो तो क्षमा प्रार्थना करता हूं। मल्लिकार्जुनजी से हमारा भी थोड़ा-बहुत रहता था। लेकिन, कभी-कभी सुन नहीं पाता था तो बाद में पूरी डिटेल लेता था। मेरी विचार चेतना को जगाने के लिए यह बहुत काम आथा था। मेरे भाषण का खाद-पानी वहीं से मिल जाता था।"

 

'नतमस्तक होकर सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं'
उन्होंने कहा, "पहली बार यहां आया तो बहुत सी चीजें नई जानने को मिलीं, जिनका मुझे अर्थ ही नहीं मालूम था। पहली बार मुझे पता चला कि गले मिलना और गले पड़ने में क्या अंतर होता है। पहली बार सदन में देख रहा हूं कि आंखों से गुस्ताखियां होती हैं। यह खेल भी पहली बार इसी सदन में देखने को मिला। इसका देश के मीडिया ने भी बहुत मजा लिया। संसद की गरिमा बनाए रखना हर सदस्य का दायित्व होता है और हमने उसकी भरपूर कोशिश की है। इस बार हमारी सांसद महोदया के टैलेंट का भी अनुभव मिला। एक दिन भाषण दे रहा था राष्ट्रपतिजी के ऊपर तो सदन में अट्टहास सुनने को मिलता था। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री वालों को इसकी जरूरत है, तो उन्हें यू-ट्यूब से उन्हें इतने हिस्से के इस्तेमाल की मंजूरी दे देनी चाहिए। शायद एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री वाले भी ऐसा अट्टहास नहीं कर पाते होंगे। ऐसी वेशभूषा देखने को मिली। टीडीपी के साथी हमारे एन शिवप्रसादजी, क्या अद्भुत वेशभूषा पहनकर आते थे। सारा टेंशन उनके अटेंशन में बदल जाता था। हंसी-खुशी के बीच हमारा कार्यकाल बीता है और बहुत कुछ सीखा है। पहली पारी में आपने जो मदद की है, उसका बहुत आभारी हूं। सभी स्टाफ का धन्यवाद करता हूं। मैं नतमस्तक होकर सभी सांसदों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं धन्यवाद।"

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