हरियाणा / प्रधानमंत्री बोले- हर ईमानदार को चौकीदार पर विश्वास; जो भ्रष्ट है उसको मोदी से कष्ट है

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2019, 05:19 PM IST


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  • प्रधानमंत्री मोदी स्वच्छ शक्ति-2019 कार्यक्रम में इन महिला पंच और सरपंच को पुरस्कार दिया
  • नरेंद्र मोदी ने कहा- ये चौकीदार इनकी धमकियों और गालीगलौज से डरने वाला नहीं है

कुरुक्षेत्र. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ शक्ति कार्यक्रम में 20 हजार महिला सरपंच और पंच को स्वच्छता का संकल्प दिलाने पहुंचे। उन्होंने इस कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान के तहत अपने गांवों को खुले शौच से मुक्त कराने के लिए 12 महिला पंच और सरपंचों को सम्मानित किया। इसी मंच से सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'हर ईमानदार को इस चौकीदार पर विश्वास है, लेकिन जो भ्रष्ट हैं उसको मोदी से कष्ट है। हरियाणा में भी जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों से कैसे कैसों का पसीना छूट रहा है। महा मिलावट के ये सारे चेहरे जांच एजेंसियों और कोर्ट को धमकाने में जुटे हैं। आप आश्वस्थ रहिए ये चौकीदार इनकी धमकियों और गालीगलौज से डरने वाला नहीं है। न रुकने वाला है और न झुकने वाला है। देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने का हमारा सफाई अभियान और तेज होने वाला है।'

 

मोदी ने कहा, 'आजादी के लगभग 70 वर्षों में स्वच्छता का जो दायरा 40 प्रतिशत था वह 98 प्रतिशत पहुंच गया है। साढ़े चार वर्षों में 10 करोड़ से अधिक टॉयलेट बनाए जा चुके हैं। 600 जिलों के गांवों ने खुले में शौच मुक्त कर दिया है। ये सभी काम इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि साढ़े चार वर्ष पहले पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उसी विश्वास पर चलते हुए बिचौलियों और गरीबों का हक लूटने वालों को सारी व्यवस्थाओं से बाहर कर दिया गया है।'

 

लाल किले से टॉयलेट की बात पर मेरा मजाक उड़ाया गया: मोदी
मोदी ने कहा, 2014 में देश में लगभग 30 करोड़ बहनों को टॉयलेट के लिए अंधेरे का इंतजार करना पड़ता था। लाल किले से मैंने देश की बहन बेटियों को अपमान से मुक्त दिलाने का संकल्प लिया। जो पहले सत्ता में थे उन्होंने कैसे-कैसे मेरा मजाक उड़ाया था। न जाने मुझे क्या क्या कहा गया। कितनी आलोचना की गई। ये कैसा प्रधानमंत्री है, जो लाल किले से टॉयलेट की बात करता है। मेरी सोच और समज को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की गई। ये टिप्पणियां करने वाले या तो वो लोग थे जिन्हें बहनों की परवाह ही नहीं थी। मुझे बहनों की परवाह थी। इसलिए मुझे सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए लोगों के तंज कभी नहीं चुभते। मेरा अपमान वे करते रहें।

 

कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने दिया था गीता उपदेश
उन्होंने कहा, 'कुरुक्षेत्र की वो धरती है जिस पर हजारों साल पहले एक स्वच्छता का अभियान हुआ था। श्रीकृष्ण के नेतृत्व में हुआ था और अनैतिकता को साफ करने का अभियान हुआ था। दुनिया में शायद गीता का संदेश अपने आप में अजूबा है कि युद्ध की भूमि में जहां जीवन मरण के खेल खेल जाते थे। जहां नैतिकता और अनैतिकता के बीच भीषण संग्राम था। उस धरती पर उसी वातावरण में हजारों साल तक जीवित रहने वाला एक संदेश उस भूमि में प्रकट हुआ। श्रीकृष्ण के मुख से प्रकट हुआ। जिसे हम गीता के नाम से जानते हैं। यही इस देश की विशेषता है।'

 

हरियाणा से आशिर्वाद लेकर ही प्रधानमंत्री बना था: मोदी
स्वच्छ भारत अभियान का अनुकरण दूसरे देश भी कर रहे हैं। भाजपा ने जब मुझे पीएम पद का उम्मीदवार बनाया था तो इसी हरियाणा से मैंने देशवासियों से आशीर्वाद लिया था। उस समय मैंने सेना के जवानों से आशीर्वाद लिया था, आज मैं देशभर की माताओं बहनों से आशीर्वाद ले रहा हूं। जहां भगवान श्रीकृष्ण ने विजय ध्वज फहराया था। वहां से आशीर्वाद ले रहा हूं। 

 

वन रैंक वन पेंशन का वायदा भी यहीं से किया था, जो पूरा किया गया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की शुरुआत भी यहीं से की थी। कुछ लोगों ने यही सोचा कि हिंदुस्तान का इतिहास 1947 से शुरु होता है और एक ही परिवार से शुरु होता है। उसी ने देश को इतिहास की जड़ों से काटने का पाप किया।

 

स्वच्छता और ओडीएफ में बेहतर काम को लेकर पिछले साल पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की तरफ से आवेदन मांगे थे। इसके बाद देशभर से 12 महिला पंच-सरपंचों को चुना गया।

 

इन्हें सम्मानित किया गया राज्य 
रेखा हरियाणा
लक्ष्मी जाट मध्यप्रदेश
सोनूबेन कालेरानाथ, माधुरी गोडमारे महाराष्ट्र
भाग्यलक्ष्मी सरागली तेलंगाना
फांगफू याकिया अरुणाचल प्रदेश
अमरतबाई मणिकांत जोलाव दमनदीव
मार्शल मेघालय
रीटा रानी पंजाब
पींकू राव झारखंड
पुष्पा यूपी
राधिका तमिलनाडु

 

घर-घर जाकर मान-मनौव्वल की : ये सभी 15 महिलाएं अपने गांवों की पंचायत की मुखिया हैं। सभी ने खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के लिए एक जैसी बाधाएं पार कीं और मेहनत की। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के देहात में लोगों को समझाना काफी मुश्किल काम था। लोगों का विरोध भी झेला, लेकिन परवाह नहीं की। सरकार की तरफ से गांवों में टारगेट मिले, उनसे बढ़कर काम किया।

 

चित्रकारी से सजाए हैं शौचालय 

  • इन महिला सरपंचों के गांव जहां पूरी तरह खुले में शौच मुक्त हैं। वहीं, इन्होंने हर घर में शौचालयों को भी बाहर और अंदर से सजावटी बनाया है। पींकूराव, सोनूबेन, अमरतबाई और लक्ष्मी बताती हैं कि उन्होंने लोगों को शौचालय सुंदर बनाने के लिए प्रेरित किया। देखादेखी हर किसी ने अपने शौचालयों को सुंदर चित्रकारी से सजाया। प्रतियोगिता में उनके गांवों के शौचालय स्वच्छ और सुंदर निकले।  
  • तमिलनाडु की राधिका कहती हैं कि जब लोगों को घरों में शौचालय के लिए कहा, तो वे लड़ाई करने तक पर उतरे आए। हमने गाली-गलौच तक सुनी। मुझे गांव में 990 शौचालय का टारगेट मिला था, लेकिन डेढ़ हजार टायलेट अपने और आसपास के गांवों में बनवाए।
  • ब्राह्मी गांव की सरपंच माधुरी गोडमारे को भी ऐसे ही विरोध झेलना पड़ा। वे बताती हैं कि शुरू में लोग घरों में शौचालय बनाने को तैयार नहीं हुए। बाद में किसी तरह वे लोगों को मनाने में सफल रही। इसके साथ उन्होंने गांव में हर रविवार सामूहिक श्रमदान की परंपरा शुरू की। पिछले 42 रविवार से ग्रामीण एकजुट होकर गांव की सफाई करते हैं।
  • अरुणाचल से आई फांगफू बताती हैं कि उनके गांव में पांच घर हैं। वहां भी खुले में ही लोग शौच जाते थे। इन पांच घरों में शौचालय बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अब उनके गांव में सुंदर शौचालय हैं।
  • मेघालय से मार्शल बताती हैं कि उनके यहां करीब 180 घर हैं। वहां भी किसी घर में शौचालय नहीं था। उन्होंने पहले अपने घर में शौचालय बनाया। फिर घर-घर जाकर लोगों को मनाया। आज गांव ओडीएफ ही नहीं, स्वच्छता के मामले में भी अव्वल है। लोगों में सफाई की आदत पड़ चुकी है।
  • मोहाली की रीटा और मिर्जापुर की पुष्पा ने भी स्वच्छता को अपना मिशन बनाया है। पुष्पा बताती हैं कि वे अपने और आसपास के गांवों में ढाई हजार के करीब शौचालय बनवा चुकी हैं।

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