दिल्ली के इमाम ने भागवत को बताया राष्ट्रपिता:RSS चीफ पहली बार मस्जिद पहुंचे; इमाम बोले- हमारा DNA एक, सिर्फ इबादत का तरीका अलग

नई दिल्ली14 दिन पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार सुबह दिल्ली के इमाम हाउस पहुंचे। ये ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन का ऑफिस है। कस्तूरबा गांधी मार्ग पर बनी इस मस्जिद के बंद कमरे में भागवत करीब एक घंटे चीफ इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी के साथ रहे। किसी मुस्लिम धार्मिक संगठन के प्रमुख से RSS चीफ की मस्जिद में यह पहली मुलाकात है।

डॉ. इलियासी ने कहा कि हमारा DNA एक ही है, सिर्फ इबादत करने का तरीका अलग है। RSS प्रमुख ने उनके बुलावे पर उत्तरी दिल्ली में मदरसा ताजवीदुल कुरान का दौरा किया था। वहां वे बच्चों से भी मिले।

मुलाकात के ठीक बाद भास्कर ने चीफ इमाम से बात की और RSS चीफ से मुलाकात के बारे में पूछा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने मोहन भागवत को राष्ट्रपिता और राष्ट्रऋषि बताया। उन्होंने कहा कि वे पारिवारिक कार्यक्रम में उनके बुलावे पर आए थे। उनके साथ सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश और रामलाल भी मौजूद रहे।

पढ़िए चीफ इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी से बातचीत…

सवाल: RSS चीफ इमाम संगठन के दफ्तर आए। यह मस्जिद भी है। उनसे मुलाकात को किस तरह देखते हैं?
ये बहुत अच्छी बात और खबर है। इस मुलाकात के बारे में सभी को अच्छा ही सोचना चाहिए। ये देश के लिए अच्छा पैगाम है। इमाम हाउस में मोहन भागवत का आना, हम सबके लिए सौभाग्य और खुशी की बात है। मैं उनका शुक्रगुजार हूं कि मेरे निमंत्रण पर वे यहां आए।

मोहन भागवत आज हमारे राष्ट्रऋषि हैं। वे इस देश के राष्ट्रपिता हैं। राष्ट्रपिता का हमारे पास आना खुशी की बात है। मुझे लगता है कि यही मोहब्बत का पैगाम हमें सभी को देना चाहिए।

RSS ने हाल में मुस्लिमों से संपर्क बढ़ाया है। इस दौरान मोहन भागवत कई बार समुदाय के नेताओं के साथ मिल चुके हैं।
RSS ने हाल में मुस्लिमों से संपर्क बढ़ाया है। इस दौरान मोहन भागवत कई बार समुदाय के नेताओं के साथ मिल चुके हैं।

सवाल: रामनवमी से लेकर हिजाब के मुद्दे पर कई बार हिंदू-मुस्लिम समुदाय आमने-सामने आए हैं। ऐसे में RSS चीफ का आपसे मिलना क्या मैसेज देता है?
हकीकत यही है कि आप अपना नजरिया बदलिए, नजारा बदल जाएगा। आपस में मिलकर मोहब्बत से रहें, यही हमारा पैगाम है। आज हमारा देश तेजी के साथ नई ऊंचाइयों पर जा रहा है। मोहन भागवत ने सभी को एक होकर चलने की बात कही है। ये इसी बात का संदेश है कि हम एक हैं और भारतीय हैं। इसी तरह से हमें अपने देश को आगे लेकर जाना चाहिए। हमारे देश की विशेषता है अनेकता में एकता।

सवाल: ज्ञानवापी मस्जिद वाले विवाद की शुरुआत हुई तब मोहन भागवत ने कहा था कि ‘हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों खोजना?’ इस पर आप क्या कहेंगे?
मोहन भागवत ने जो कहा, वह ठीक कहा। यही वह संदेश है, जिससे कि सब आपस में जुड़े रहें और मोहब्बत से रहें। जहां मोहब्बत होती है, वहां अच्छा माहौल बनता है। सभी को इसी तरह से मिलकर रहना चाहिए।

सवाल: एक वर्ग का मानना है कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो रहा है। क्या आप भी यही मानते हैं?
मुझे लगता है कि हम सभी को प्यार-मोहब्बत से रहना चाहिए। कोरोना के बाद हमारा देश PM मोदी के नेतृत्व में ऊंचाई पर पहुंचा है। हम सभी को मिलकर उनका सहयोग करना चाहिए।

ऑर्गेनाइजेशन से 5 लाख इमाम जुड़े
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के साथ देशभर के करीब 5 लाख इमाम जुड़े हैं। संगठन की स्थापना 1976 में हुई थी। संगठन को हजरत मौलाना उमर अहमद इलियासी ने बनाया था। अभी संगठन के चीफ इमाम हजरत मौलाना उमर अहमद इलियासी हैं।

सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत करने की कवायद
डॉ. उमर अहमद से मुलाकात पर संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि RSS चीफ हर क्षेत्र के लोगों से मिलते हैं। यह संघ की नॉर्मल डायलॉग प्रोसेस का ही एक हिस्सा है।

हिजाब और ज्ञानवापी पर भी चर्चा
RSS के करीबी सूत्रों के मुताबिक संघ के विचारों के प्रचार और धार्मिक समावेश को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में इमामों के साथ बैठक की गई थी। इसमें ज्ञानवापी मस्जिद, हिजाब विवाद और जनसंख्या नियंत्रण पर भी बात हुई।

जमीअत-उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना अरशद मदनी ने भी 30 अगस्त 2019 को दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय पहुंचकर मोहन भागवत से मुलाकात की थी। तब नवंबर में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला था।
जमीअत-उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना अरशद मदनी ने भी 30 अगस्त 2019 को दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय पहुंचकर मोहन भागवत से मुलाकात की थी। तब नवंबर में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला था।

22 अगस्त को भी मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिले थे भागवत
22 अगस्त को संघ प्रमुख से मुस्लिम बुद्धिजीवियों की 5 सदस्यों की टीम ने मुलाकात की थी। इनमें पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति जमीरुद्दीन शाह और कारोबारी सईद शेरवानी शामिल थे।

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हिजाब अनिवार्य करने का महिलाएं लगातार विरोध करती रही हैं। पहली बार वे सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामनेई के खिलाफ खड़ी हुई हैं।
हिजाब अनिवार्य करने का महिलाएं लगातार विरोध करती रही हैं। पहली बार वे सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामनेई के खिलाफ खड़ी हुई हैं।

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