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  • Mother got a call children are suffering from hunger in the jam; CRPF jawans walk 12 km from the icy road and bring food

मंडे पॉजिटिव / मां का फोन आया- बच्चे भूख से तड़प रहे हैं; सीआरपीएफ के जवान बर्फीले रास्ते से 12 किमी पैदल चलकर खाना ले आए

सीआरपीएफ ने हाईवे पर फंसे परिवार को मदद देने की तस्वीर रविवार को जारी की। सीआरपीएफ ने हाईवे पर फंसे परिवार को मदद देने की तस्वीर रविवार को जारी की।
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सीआरपीएफ ने हाईवे पर फंसे परिवार को मदद देने की तस्वीर रविवार को जारी की।सीआरपीएफ ने हाईवे पर फंसे परिवार को मदद देने की तस्वीर रविवार को जारी की।

  • जम्मू-कश्मीर में भूखे बच्चों की पुकार सुनकर सुरक्षाबलों का नया अवतार सामने आया
  • जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर जाम में फंस गया था एक परिवार, इसमें दो बच्चे भी शामिल थे

दैनिक भास्कर

Jan 06, 2020, 08:15 AM IST

रामबन. सीआरपीएफ की ‘मददगार’ हेल्पलाइन पर 2 जनवरी को शाम 5:30 बजे एक महिला का फोन आया कि उसका परिवार जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर जाम में फंसा हुआ है। बच्चे भूखे हैं, कुछ मदद कीजिए। आसिफा नाम की महिला के फोन पर सीआरपीएफ की 167 बटालियन की डी कंपनी तुरंत एक्शन में आई और पैदल ही बर्फीले रास्ते पर निकल पड़ी। करीब 12 किमी चलकर उस परिवार के लिए खाना पहुंचा दिया। इस टीम के इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह ने पूरी घटना पर भास्कर के इश्फाक-उल-हसन से बात की। पढ़िए रघुवीर सिंह की जुबानी...

यह हमारे लिए अलग तरह का टास्क था, बच्चों की मुस्कान देखकर हमें सुकून मिला

हमें शाम 5:30 बजे आदेश मिला- ‘हाईवे पर जाम में एक परिवार फंसा हुआ है, जिसमें दो बच्चे हैं। उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया है। उनके लिए खाना पहुंचाना है।’ ये काम हमारे लिए अलग तरह का था। दरअसल, हमें ऐसे टास्क का अंदाजा नहीं था। खैर, हमने तुरंत 6 लोगों की टीम बनाई। दाल-चावल, दो-ढाई लीटर दूध, छह लीटर गर्म पानी, फल और बिस्कुट के पैकेट बांधकर निकल पड़े। 2 किमी पैदल चलने के बाद हमें लंबा जाम दिखा, लेकिन, उस परिवार तक पहुंचने में कुल 12 किमी चलना पड़ा। हमारे पास उस परिवार का फोन नंबर आ गया था, इसलिए उन्हें खोजने में दिक्कत नहीं हुई। वो लाेग भूस्खलन की वजह से फंसे हुए थे।

खाना देखते ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ गई

इनमें 3-4 साल के दो बच्चे थे। हमने उनसे कहा- घबराने की जरूरत नहीं। खाना आ गया है। यह सुनकर उनके चेहरे पर चमक आ गई। बच्चों के होंठों पर मुस्कान आ गई। हमने उस परिवार से कहा कि हमारे साथ चलिए, लेकिन गाड़ी में बैठी दोनों महिलाओं ने पैदल चलने में असमर्थता जताई। हमने कहा कि अगर जाम नहीं खुलता है तो हम आपको उठाकर ही अगले स्टेशन तक चलेंगे। लेकिन, वो लोग वहीं रुकना चाहते थे। वहां सैकड़ों गाड़ियां फंसी हुई थीं। इसलिए किसी तरह का कोई खतरा नहीं था। उन्हें सिर्फ खाना चाहिए था।

परिवार ने फोन कर शुक्रिया कहा, ये पल सुकून देने वाला था

उनके खाना खाने तक हम रुके रहे। रात के 8 बज चुके थे। हमने उन्हें फोन नंबर दिए और कहा कि अगर और खाने की जरूरत पड़े तो बताइगा। उसके बाद हम 12 किमी पैदल चलकर रात 11 बजे वापस कैंप पहुंच गए। उस परिवार का कोई फोन नहीं आया तो हमने उन्हें फोन किया। उन्होंने कहा कि खाना बचा हुआ है। सुबह जब वे जम्मू पहुंच गए तो उन्होंने फोन करके शुिक्रया कहा। ये बात बहुत सुकून देने 
वाली थी।

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