भास्कर सरोकार / 74 सांसद बोले- दुष्कर्मी को सजा समय पर मिले, इसके लिए कानून में संशोधन को तैयार

निर्भया कांड के दोषी फांसी से बचने के लिए उठा रहे कानून का फायदा। निर्भया कांड के दोषी फांसी से बचने के लिए उठा रहे कानून का फायदा।
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निर्भया कांड के दोषी फांसी से बचने के लिए उठा रहे कानून का फायदा।निर्भया कांड के दोषी फांसी से बचने के लिए उठा रहे कानून का फायदा।

  • 69 सांसदों ने कहा- रिव्यू, क्यूरेटिव, दया याचिका के लिए समयसीमा तय होना जरूरी
  • 44 सांसदों का दावा- कानून में संशोधनों का प्रस्ताव कोई भी दल लाए, उसका समर्थन करेंगे
  • 32 सांसदों का वादा- अपनी पार्टी से आगामी बजट सत्र में संशोधन का प्रस्ताव लाने को कहेंगे

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 08:28 AM IST

नई दिल्ली/जालंधर/रांची/पटना/अहमदाबाद/भोपाल/रायपुर/पानीपत. निर्भया कांड के दरिंदों की फांसी बार-बार टलने से आम आदमी और न्यायिक तंत्र ही नहीं, बल्कि देश का राजनीतिक नेतृत्व भी विचलित है। भास्कर ने सियासी दलों, 9 राज्यों के 76 सांसदों और 2 पूर्व कानून मंत्रियों से चुनिंदा सवाल पूछे, जो अपराधियों को फांसी से बचाने वाली कानूनी खामियों पर आधारित थे। जैसे- रिव्यू पिटीशन, क्यूरेटिव और दया अर्जी दायर करने की समयसीमा क्यों नहीं है? राष्ट्रपति के पास जाने वाली दया अर्जियों पर फैसले के लिए समयसीमा तय होनी चाहिए या नहीं? क्योंकि कानूनी प्रावधानों में अस्पष्टता का फायदा उठाकर फांसी की सजा पाए 2324 दोषी अब भी जिंदा हैं। ताजा मामला निर्भया के चार दोषियों का है। 


भाजपा के 53 सांसदों समेत 74 सांसदों ने कहा कि कानून में संशोधन जरूरी है। 65 सांसदों ने फांसी के फैसले से अमल तक समयसीमा तय करने की वकालत की। 44 सांसदों ने कहा कि संशोधन का प्रस्ताव कोई भी पार्टी लेकर आए, वे समर्थन करेंगे।

4 अहम बदलाव, जिन्हें सांसदों ने जल्द इंसाफ के लिए जरूरी बताया

  1. कोर्ट से फांसी की सजा सुनाई जाती है, लेकिन उस पर अमल की प्रक्रियाएं समयबद्ध नहीं हैं। इसलिए दोषी बचे हुए हैं। सुनिश्चित करना होगा कि निर्भया जैसा मामला दोबारा सामने न आए, जिसमें ढाई साल से फांसी नहीं हो पाई है।
  2. किसी एक दोषी को राहत मिले तो उस केस से जुड़े सभी दोषियों को राहत मिल जाती है। लेकिन, जब किसी एक दोषी की याचिका खारिज हो जाती है तो अन्य दोषी याचिका दायर कर सकते हैं। इसलिए इस प्रावधान में भी तत्काल सुधार करना होगा।
  3. आर्टिकल 72 के तहत राष्ट्रपति और आर्टिकल 161 के तहत राज्यपाल को अपराधी को माफ करने का हक है। लेकिन, उनके लिए फैसला लेने की कोई तय समयसीमा नहीं है। इसलिए अब दया अर्जी पर फैसले के लिए समयसीमा की जरूरत है।
  4. निर्भया मामले में जेल प्रशासन ने फांसी की सजा पर अमल नहीं किया। इसलिए कानून में ये बात जोड़नी होगी कि अगर जेल प्रशासन या सरकार कोई भी समयसीमा में सजा पर अमल न कराए तो जिम्मेदार अथॉरिटी/अफसर पर कार्रवाई होगी।

सांसद चाहते हैं इसी बजट सत्र में पारित हो संशोधन

38 सांसदों ने कहा कि कानून में संशोधन का प्रस्ताव 31 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में आना चाहिए। 32 सांसदों ने कहा कि वे अपनी पार्टी से प्रस्ताव लाने को कहेंगे। दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर, मनोज तिवारी समेत 24 सांसदों ने कहा कि वे संशोधन की मांग संसद में भी उठाएंगे। 

दो पूर्व कानून मंत्री बोले: संसद और कोर्ट को मिलकर कदम उठाने होंगे

निर्भया के मामले में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई। सभी तरह की याचिकाएं सुनी गईं। फिर भी फांसी में देरी हो रही है। यह अस्वीकार्य हैै। संसद और कोर्ट को मिलकर ऐसी खामियों को दूर करना होगा।'
डीवी सदानंद गौड़ा
संसद में कानून बना सकते हैं, लेकिन उसके संवैधानिक पहलुओं की जांच सुप्रीम कोर्ट कर सकता है। इसलिए दोनों ही संस्थाओं को एक साथ कदम उठाने होंगे। किसी एक के पहल करने से बात नहीं बनेगी।
सलमान खुर्शीद
पार्टियों की अपनी-अपनी राय

कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- ‘‘अब देश प्रक्रियाओं की आड़ नहीं ले सकता।’’ राजद के मनोज झा ने कहा- ‘‘जघन्य केसों को फास्ट ट्रैक करना होगा। लॉ कमीशन इसकी सिफारिश कर चुका है।’’ जदयू की कहकशां परवीन, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी, माकपा के सौगत बोस ने कहा कि प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

मोदी-शाह की बैठक में उठेगा संशोधन का मुद्दा

संसद सत्र के दौरान हर मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सांसदों की बैठक लेते हैं। हम मध्य प्रदेश के सांसदों के मुख्य सचेतक सुधीर गुप्ता से कहेंगे कि प्राइवेट बिल लाएं। साथ ही शीर्ष नेताओं से बात करें।’
डाॅ. कृष्णपाल सिंह यादव, सांसद, गुना

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