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मुस्लिम टीचर ने किया अपने हिन्दू साथी का अंतिम संस्कार, हिन्दू रीति-रिवाज के मुताबिक सिर और मूंछें भी मुड़वाईं, परिवार के साथ 11 दिन मनाएंगे शोक

मुस्लिम टीचर ने बताई ये फैसला लेने की बेहद इमोशनल वजह

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2018, 07:31 PM IST
Muslim man performs last rites of Hindu colleague in west bengal

जलपाईगुड़ी. पश्चिम बंगाल में धार्मिक एकता की एक बड़ी मिसाल देखने को मिली। यहां एक मुस्लिम टीचर ने अपने हिंदू साथी का अंतिम संस्कार किया। उसने हिन्दू रीति-रिवाजों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के लिए अपना सिर और मूंछें भी मुड़वाईं और अब 11 दिन परिवार के साथ शोक भी मनाएंगे। दरअसल उनके दोस्त के परिवार में सिर्फ तीन बेटियां ही थीं, इसलिए उन्होंने अपना फर्ज निभाया। वो उन्हें अपना साथी और मेंटर मानते थे, जिनसे उन्हें मानवता की ये सीख मिली थी और इसीलिए उन्होंने ये फैसला लिया। मुस्लिम टीचर ने कहा कि वो मेरे तीसरे पिता थे।

हिन्दू दोस्त का अंतिम संस्कार
- मामला जलपाईगुड़ी जिले के बनरहट का है, जहां अशफाक सरकारी हाई स्कूल में पढ़ाते हैं। उनके दोस्त संजन कुमार विश्वास भी यहीं पढ़ाया करते थे।
- संजन 2005 में रिटायर हो गए थे और स्कूल में उनका साथ छूट गया था लेकिन उनकी दोस्ती बरकरार थी। अशफाक उन्हें अपना मेंटर मानते थे क्योंकि जब उन्होंने स्कूल ज्वाइन किया तो उनसे बहुत कुछ सीखा था।
- संजन की मौत के बाद उनके परिवार में उनकी सिर्फ तीन बेटियां ही थीं इसलिए उन्होंने अंतिम संस्कार का फैसला किया। अब उनके साथ उनकी पत्नी और 11 साल का बेटा भी शोक मनाएंगे।

बुरे वक्त में दिया सहारा
- अशफाक ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि स्कूल जिस साल अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा था, उसी साल मेरा अप्वाइंटमेंट हुआ था।
- स्कूल में कई ऐसे लोग थे जो धर्म के आधार पर मेरे अप्वाइंटमेंट का विरोध कर रहे थे, लेकिन संजन मेरे साथ पूरे भरोसे के साथ खड़े रहे।
- उन्होंने मुझे सभी बातें नजरअंदाज करने को कहा। इतना ही नहीं, मुझे जब तक अपने लिए वहां घर नहीं मिल गया, तब तक उन्होंने मुझे अपने घर में रखा।
- अशफाक ने कहा कि वो धर्म में नहीं मानवता में विश्वास करते थे और ये बात मैंने उनसे ही सीखी है। उन्हीं के दिखाए मानवता के रास्ते में मैंने चलने का फैसला किया।

'मेरे पिता की तरह थे'
- अशफाक ने कहा कि मैं उदारवादी विचारों वाला व्यक्ति हूं और ये सब संजन सर की वजह से है। मैं हमेशा कहता हूं कि मेरे तीन पिता है- एक जिन्होंने मुझे जन्म दिया, दूसरे मेरे गुरु और तीसरे संजन सर। उन्होंने कभी किसी की बात की परवाह नहीं की और जो सही था वही किया। मैं भी वही कर रहा हूं।

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