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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा- खराब तबियत का हवाला देकर मुझे पैरवी से हटाया गया

8 महीने पहले
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अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की पैरवी करने वाले वकील राजीव धवन। (फाइल)
  • राजीव धवन केस से हटाए जाने के बाद समीक्षा याचिका में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे
  • जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की
  • राजीव धवन ने कहा- मैं बिल्कुल ठीक हूं, मुझे हटाने की वजह झूठी और दुर्भावनापूर्ण
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नई दिल्ली. अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड और मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को केस से हटा दिया गया है। अब वे अयोध्या मामले में दर्ज समीक्षा याचिकाओं में दखल नहीं दे पाएंगे। मंगलवार को फेसबुक पर धवन ने लिखा, “मुझे केस में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एजाज मकबूल ने बाबरी केस से हटाया है। एजाज पहले जमियत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। मुझे बताया गया कि जमियत-ए-हिंद के मदनीजी ने इशारा किया था कि मेरी तबियत ठीक नहीं है। यह पूरी तरह बकवास है।”


धवन ने कहा, “उनके पास अधिकार है कि वे अपने वकील एजाज मकबूल को मुझे हटाने का आदेश दें, लेकिन मुझे निकालने की जो वजह दी गई वो झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। मैंने खुद को हटाए जाने की मंजूरी का औपचारिक पत्र बिना किसी संकोच के भेज दिया है।”

धवन के पोस्ट पर जमीयत के वकील बोले- यह बड़ा मुद्दा नहीं
धवन के बयान पर जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने कहा, “यह कहना गलत है कि समीक्षा याचिका से राजीव धवन को उनकी तबियत की वजह से हटाया गया। मसला यह है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद खुद पुनर्विचार याचिका दाखिल करना चाहता था। याचिका में उनका नाम नहीं दिया गया, क्योंकि सोमवार को वे मौजूद नहीं थे, यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं।”

अदालत के फैसले में कई त्रुटियां: जमीयत 
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोमवार को पहली पुनर्विचार याचिका दायर हुई। जमीयत के सेक्रेटरी जनरल मौलाना सैयद अशद रशीदी ने यह याचिका दाखिल की। रशीदी मूल याचिकाकर्ता एम सिद्दीक के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने कहा- अदालत के फैसले में कई त्रुटियां हैं और संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा सकती है।

अदालत ने विवादित जमीन हिंदू पक्ष को सौंपी 
40 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने अयोध्या की विवादित जमीन हिंदू पक्ष को सौंपी थी। अदालत ने कहा था- विवादित जमीम पर मंदिर का निर्माण ट्रस्ट करेगा, जिसे 3 माह के भीतर केंद्र सरकार को बनाना है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।

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