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नारायण मूर्ति का इन्वेस्टमेंट डिवीजन:स्टार्टअप में निवेश के लिए पहले यह देखता हूं कि क्या आइडिया को सरल वाक्य में समझाया जा सकता है

बेंगलुरु8 महीने पहलेलेखक: स्कन्द विवेक धर
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फोटो- नारायण मूर्ति - Dainik Bhaskar
फोटो- नारायण मूर्ति

40 साल पहले आईटी कंपनी इन्फोसिस की स्थापना करने वाले एनआर नारायण मूर्ति अब आंत्रप्रेन्योर तैयार करने में जुटे हैं। अपनी सादगी, दूरदृष्टि और नैतिक मूल्यों के लिए जाने जाने वाले नारायण मूर्ति से दैनिक भास्कर ने देश के मौजूदा स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े मसलों पर बातचीत की। उनसे यह भी जाना कि किसी आइडिया में निवेश करने से पहले वे उसे किन मानकों पर परखते हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…

निवेश के लिए 6 पैमाने
हम पहले आइडिया के 6 टेस्ट करते हैं।
1.
क्या आइडिया को साधारण वाक्य में बता सकते हैं? यदि हां तो उसे ग्राहक, टीम और निवेशक आसानी से समझ पाएंगे।
2. आइडिया बाजार में पहले से मौजूद बिजनेस से कितना अलग और बेहतर है?
3. क्या मार्केट टेस्टिंग एक्सरसाइज हो चुकी है? यदि हां, तो कितनी सफल रही?
4. क्या आंत्रप्रेन्योर की ओर से आइडिया की वैल्यू का आकलन किया जा चुका है?
5. क्या उस आइडिया पर काम करने के लिए एक मेहनती और सक्षम टीम मौजूद है?
6. क्या लीडर-टीम में ईमानदारी, इनोवेशन, अनुशासन और लंबे सफर के लिए धैर्य है?

आंत्रप्रेन्योरशिप पर...
अच्छे वेतन वाली नौकरियों से ही भारत में गरीबी हटेगी। नौकरियां आंत्रप्रेन्योर सृजित करेंगे। सरकार की जिम्मेदारी नौकरी देना नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण बनाना है, जहां नौकरियां पैदा करने वालों को बढ़ावा मिले। मेरा मानना है कि सरकारी मशीनरी को किसी नए उद्यम में तब तक दखल नहीं देना चाहिए, जब तक वह सालाना 50 करोड़ रु. मुनाफे को हासिल न कर ले।

माैजूदा अवसरों पर…
सभी क्षेत्रों में बड़े अवसर हैं। एजुकेशन, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, इंश्योरेंस, हाउसिंग, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी यहां तक कि न्यूट्रीशस फूड, आप जो नाम लो और वहां मौका मौजूद है। हमने अभी सिर्फ सतह को खरोंचा है। स्टार्टअप्स के लिए जो क्षेत्र मुझे सबसे अधिक आकर्षित करता है, वह है हमारे मानव संसाधन की उत्पादकता को बढ़ाना। कुछ उद्यमी इस पर काम शुरू कर चुके हैं।

आर्थिक विकास पर…
मैं उदार पूंजीवाद में भरोसा करता हूं। मैंने आज तक एक भी ऐसा देश नहीं देखा, जिसने पूंजीवाद के किसी एक स्वरूप को अपनाए बिना गरीब दूर की हो। अमेरिका ने फेयर कैपिटलिज्म को अपनाया, चीन ने सरकार की अगुवाई वाले कैपिटलिज्म को अपनाया। सिंगापुर भी एक बड़ा उदाहरण है।

उदार पूंजीवाद का अर्थ है दिमाग में पूंजीवाद और दिल में उदारता। इसका अर्थ है कि लीडर्स अपना मुनाफा लेने से पहले यह सुनिश्चित करें कि सबसे निचले स्तर के कर्मचारी को उतनी वेतनवृद्धि दी जा रही है कि वह कम से कम अपनी मूलभूत जरूरतें पूरी कर सके। इस बात की चिंता की जाए कि कर्मचारियों को प्रदर्शन के आधार पर इन्सेंटिव मिल रहा है। मैं आश्वस्त हूं कि भारत अपनी गरीबी सिर्फ उदार पूंजीवाद से ही दूर कर सकता है।