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ममता के सलाहकार पर एक्शन की तैयारी:PM की मीटिंग से गायब रहने पर केंद्र ने अलपन से 3 दिन में जवाब मांगा, कहा- आप पर आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत एक्शन क्यों न लिया जाए

नई दिल्ली19 दिन पहले

केंद्र ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नए मुख्य सलाहकार अलपन बंधोपाध्याय पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक से गायब रहने पर केंद्र ने अलपन को कारण बताओ नोटिस भेजा है, जिस पर उन्हें 3 दिन के भीतर जवाब देना होगा। अलपन से पूछा गया कि उन पर आपदा प्रबंधन एक्ट की धारा 51(b) के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

केंद्र ने बताई मीटिंग में 15 मिनट के इंतजार की कहानी
केंद्र ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'प्रधानमंत्री मोदी आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई दौरा करने के बाद कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। इसके बाद उन्हें यहां पर बंगाल की मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव के साथ बैठक करनी थी। प्रधानमंत्री को मीटिंग रूम में राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए 15 मिनट इंतजार करना पड़ा। जब मुख्य सचिव नहीं पहुंचे थे तो उन्हें अधिकारियों ने फोन लगाया और पूछा कि वो इस मीटिंग में शामिल होंगे या नहीं? इसके बाद मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री मीटिंग रूम में आए और तुरंत ही चले भी गए।

इसे प्रधानमंत्री की रिव्यू मीटिंग से अनुपस्थित रहना ही माना जाएगा। प्रधानमंत्री नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के चेयरमैन भी हैं। अलपन बंधोपाध्याय की ये हरकत केंद्र द्वारा कानूनी तौर पर दिए गए निर्देशों को दरकिनार करना ही माना जाएगा। ऐसे में उन पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 51(b) लगाई जाती है। हमने अलपन से लिखित में ये जवाब मांगा है कि आपदा राहत एक्ट का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ धारा 51(b) के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। उन्हें 3 दिन के भीतर कारण बताना होगा।'

प्रधानमंत्री यास तूफान से हुए नुकसान की समीक्षा करने 28 मई को बंगाल गए थे। बैठक में ममता बनर्जी और अलपन को भी पहुंचना था, लेकिन वो नहीं गए। दोनों साउथ 24 परगना में एक दूसरी समीक्षा बैठक कर रहे थे।
प्रधानमंत्री यास तूफान से हुए नुकसान की समीक्षा करने 28 मई को बंगाल गए थे। बैठक में ममता बनर्जी और अलपन को भी पहुंचना था, लेकिन वो नहीं गए। दोनों साउथ 24 परगना में एक दूसरी समीक्षा बैठक कर रहे थे।

ममता का मास्टर स्ट्रोक, केंद्र का नया दांव.. पूरी कहानी के 5 अहम पॉइंट
1.
केंद्र ने अलपन को दिल्ली बुलाने के आदेश दिए थे। वो नहीं गए। इस मामले पर भास्कर ने रिटायर्ड सीनियर ब्यूरोक्रेट्स से लीगल एक्शन को लेकर बात की थी। भारत सरकार के पूर्व सेक्रेटरी जवाहर सरकार ने तब कहा था कि केंद्र भले चीफ सेक्रेटरी को दिल्ली रिपोर्ट करने का आदेश दे रहा हो, लेकिन इसे लागू करना मुश्किल हो सकता है।

2. सरकार ने कहा था कि अलपन को रिलीव करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है। इसके अलावा राज्य यानी अलपन के केस में बंगाल सरकार ऑल इंडिया सर्विस रूल्स का हवाला देकर आदेश का विनम्र तरीके से जवाब दे सकती थी। ऐसे में केंद्र के लिए किसी IAS या IPS अधिकारी का एकतरफा तबादला करना मुश्किल होता, जो उसके कंट्रोल में नहीं है।

3. ममता ने मास्टर स्ट्रोक चलकर इस सबकी नौबत ही नहीं आने दी। उन्होंने ही मुख्य सचिव के तौर पर अलपन का कार्यकाल 3 महीने बढ़ाया था। ये 31 मई को खत्म हो रहा था। जैसे ही केंद्र ने अलपन को नोटिस भेजा, ममता ने उन्हें तुरंत रिटायर कर मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया। कहा कि अलपन दिल्ली जाना नहीं चाहते हैं।

4. इसके बावजूद केंद्र बैकफुट पर नहीं आया। उसने तत्काल कहा कि हम कार्रवाई करेंगे, भले ही अलपन रिटायर क्यों न हो गए हों। चार्जशीट भेजेंगे और अलपन के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। अब इस कार्रवाई के लिए केंद्र ने अलपन पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा लगा दी है। उन्हें नोटिस का जवाब भी 3 दिन के भीतर देना है।

5. अब अगर अलपन नोटिस का जवाब नहीं भेजते हैं या फिर उनके जवाब से केंद्र सरकार संतुष्ट नहीं होती है तो उनके खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 51b के तहत कार्रवाई हो सकती है या फिर FIR दर्ज की जा सकती है।

क्या है आपदा प्रबंधन एक्ट की धारा 51

  • केंद्र और राज्य के किसी भी अधिकारी को या इन सरकारों द्वारा अधिकृत व्यक्ति के कामों में बिना उचित कारण के बाधा डालने पर एक्शन लिया जा सकता है। इसके अलावा केंद्र, राज्य, राष्ट्रीय समिति, या राज्य की समिति द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन न करने पर भी एक्शन का प्रावधान है।
  • इस एक्ट के तहत एक वर्ष की जेल या जुर्माना हो सकता है। जेल और जुर्माना दोनों भी लागू किए जा सकते हैं। अगर काम में बाधा से या फिर निर्देशों को न मानने से किसी की जान जाती है या नुकसान होता है तो ऐसा करने वाले व्यक्ति को 2 साल की सजा दी जा सकती है।
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