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जस्टिस मिश्रा ने प्रधानमंत्री मोदी को दूरदर्शी बताया; मोदी ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की मूल भावना को जीवंत रखा

2 वर्ष पहले
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जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया लोकतंत्र की रीढ़ है। - Dainik Bhaskar
जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया लोकतंत्र की रीढ़ है।
  • मोदी ने कहा- न्यायिक व्यवस्था में हर भारतीय को आस्था, 130 करोड़ देशवासियों ने बड़े फैसलों को सहर्ष स्वीकार किया
  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा बोले- न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना समय की मांग, क्योंकि यह लोकतंत्र की रीढ़

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस (आईजेसी) को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के सामने आज डेटा प्रोटेक्शन और साइबर क्राइम जैसी चुनौतियां है। तकनीक के इस्तेमाल से अदालतों के कामकाज में तेजी आएगी। शाम के सत्र में जस्टिस अरुण मिश्रा ने प्रधानमंत्री मोदी को दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा- मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत की छवि एक जिम्मेदार और दोस्ताना रवैये वाले देश के तौर पर उभरी है।


इससे पहले, आईजेसी में मोदी ने कहा- देश महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। जब उन्होंने अपने जीवन का पहला मुकदमा लड़ा, तो उनसे कहा गया था कि इसके लिए कमीशन देना पड़ेगा। इस पर गांधीजी ने कह दिया था कि केस मिले न मिले, कमीशन नहीं दूंगा। भारतीय समाज में रूल ऑफ लॉ सामाजिक संस्कार है। गांधीजी को संस्कार परिवार से मिले थे।

जस्टिस मिश्रा ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया लोकतंत्र की रीढ़
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नेतृत्व के लिए तारीफ हासिल करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शी व्यक्ति हैं। उनके अगुआई में भारत दुनिया में एक जिम्मेदार और दोस्ताना रुख रखने वाला देश बनकर उभरा है। उन्होंने कहा- न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना समय की मांग है, क्योंकि यह लोकतंत्र की रीढ़ है। विधायिका इसका दिल है और कार्यपालिका दिमाग है। इन सभी अंगों को स्वतंत्र रूप से काम करना होता है। लेकिन, इनके आपसी तालमेल से ही लोकतंत्र कामयाब होता है।

‘हर भारतीय की न्यायिक व्यवस्था पर आस्था’
इससे पहले मोदी ने कहा, ‘‘हर भारतीय की न्यायिक व्यवस्था पर आस्था है। पिछले दिनों कई बड़े फैसले लिए गए। इन्हें लेकर कई आशंकाएं जाहिर की जा रही थीं, लेकिन 130 करोड़ देशवासियों ने इन्हें सहर्ष स्वीकार किया। यही हमारी न्याय प्रणाली की ताकत है। पिछले दिनों हमारे संविधान के 70 साल पूरे हुए। इसकी आत्मा को सुप्रीम कोर्ट ने जीवंत रखा है। कई बार कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका से समस्याओं का उचित रास्ता ढूंढा गया है। देश में ऐसे 1500 पुराने कानूनों को खत्म किया गया, जिनकी प्रासंगिकता खत्म हो गई थी। समाज को मजबूती देने वाले तीन तलाक जैसे नए कानून भी उतनी ही तेजी से बनाए गए।’’

तकनीक से अदालतों के कामकाज में तेजी आ रही
मोदी ने कहा- तकनीक अदालतों के कामकाज में तेजी ला रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से कोर्ट की कार्यप्रणाली आसान होगी। इसके अलावा डेटा प्रोटेक्शन और साइबर क्राइम जैसे विषय कोर्ट के सामने चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इस कॉन्फ्रेंस में ऐसे कई विषयों पर मंथन होगा और नए समाधान निकलकर सामने आएंगे। सुप्रीम कोर्ट परिसर में हो रहे सम्मेलन में 20 देशों के जज शामिल हैं।

मोदी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का जिक्र किया
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा संविधान समानता के अधिकार के तहत लैंगिक समानता को मजबूती देता है। पहली बार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के तहत शैक्षणिक संस्थानों में बेटियों की संख्या बेटों से ज्यादा हो गई है। सेनाओं में भी लड़कियों को समानता दी जा रही है। परिवर्तन के दौर में हम नई परिभाषाएं गढ़ रहे हैं। हमने इस अवधारणा को बदला है कि तेजी से विकास नहीं हो सकता है। 5 साल पहले भारत विश्व की 11वीं बड़ी अर्थव्यवस्था था, अब हम 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। हमने दुनिया को बताया है कि कैसे पर्यावरण की चिंता करते हुए विकास हो। सुप्रीम कोर्ट ने भी पर्यवारण से जुड़े मामलों पर अहम फैसले दिए।’’