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मंत्रियों की शपथ का सर्वार्थ सिद्धि योग:मोदी का चैलेंज गवर्नेंस क्वालिटी सुधारना, महामारी-इकोनॉमी का बेहतर मैनेजमेंट; कैबिनेट विस्तार की 5 बड़ी वजहें

नई दिल्ली17 दिन पहलेलेखक: शीला भट्ट
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 6 बजे अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगे। लगभग हर बड़ा काम शुभ मुहूर्त पर करने वाली मोदी सरकार ने नए मंत्रियों को शपथ दिलाने का भी मुहूर्त तय किया है। जब मंत्री शपथ लेंगे इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इसमें किया गया कोई भी काम सफल होता है।

जब महामारी, खराब अर्थव्यवस्था और महंगाई से देश जूझ रहा है, ऐसे में हर लिहाज से मोदी सरकार के लिए ये विस्तार अभी बेहद जरूरी है। इसके अलावा संसद का मानसून सत्र 19 जुलाई से शुरू हो रहा है और नए मंत्रियों को अपने मंत्रालयों में घुलने-मिलने के लिए वक्त चाहिए होगा। कैबिनेट एक्सपेंशन की 5 वजहें...

पहली वजह: गवर्नेंस की क्वालिटी सुधारना
कोरोना की दूसरी लहर में केंद्र सरकार के मिस मैनेजमेंट की हर ओर आलोचना हुई। गवर्नेंस में क्वालिटी की कमी नजर आई। स्मार्ट सिटी हो या फिर कैशलेस इकोनॉमी, मोदी का कोई भी पसंदीदा प्रोजेक्ट ट्रैक पर नहीं है। मोदी को टॉप लेवल पर ज्यादा काबिलियत वाली टीम की जरूरत है।

दूसरी वजह: जनता की निराशा दूर करना
इकोनॉमी में ऐसी गिरावट कभी नहीं आई, जैसी अभी है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दामों पर जनता के गुस्से को शांत करना जरूरी है। रोजगार के मौके कम हो रहे हैं और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते जा रहे हैं, इससे भी लोग निराश हैं। ऐसे में दिशाहीन हो चुकी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकार के भीतर उच्च स्तर पर ज्यादा क्षमता की जरूरत होगी।

तीसरी वजह: जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ काबिलियत में संतुलन
मोदी को कैबिनेट में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ काबिल मंत्रियों का संतुलन बैठाना है। कैबिनेट में फील गुड फैक्टर को बढ़ाने के लिए भी नए चेहरों को शामिल करना जरूरी हो गया है।

चौथी वजह: राज्यों में पार्टी और नेताओं का मनोबल ऊंचा करना
2014 से मोदी सरकार ने कई जीत और हार का सामना किया। हाल में बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा और समर्थकों के उत्साह पर बुरा असर पड़ा है। अगर सांसदों में से काबिल लोगों को कैबिनेट में शामिल किया जाता है तो जिस राज्य से मंत्री शामिल किए गए हैं, वहां पार्टी और उसके नेताओं का मनोबल बढ़ेगा।

पांचवीं वजह: मोदी और भाजपा की ताकत बढ़ेगी
पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में अभी सियासी खींचतान चल रही। क्षेत्रीय और जातीय गणित के आधार पर नेताओं को कैबिनेट में शामिल कर सत्ता का मौका देने से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी। उधर, पशुपति पारस और JDU के 4 मंत्री बनाने से उन्हें क्षेत्र से लेकर केंद्र तक समीकरण साधने में मदद मिलेगी।

समीकरणों के साथ नक्षत्रों का भी ख्याल
ज्योतिष के मुताबिक, आज दिनभर जया तिथि रहेगी। इस तिथि में किए गए कामों से दुश्मनों पर जीत मिलती है। शाम को करीब 6 बजे चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस तिथि और मंगल के नक्षत्र में किए गए कामों में जीत मिलती है। साथ ही सफलता देने वाला सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा, जो कि कल सुबह सूर्योदय के बाद खत्म होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया हर काम सफल होता है।

टीम मोदी में 24 नए चेहरे, इनकी एवरेज एज 53 साल
मोेदी मंत्रिमंडल में 24 नए चेहरों के नाम फाइनल हो गए हैं। इनके अलावा खाली 28 पद को देखते हुए 4 और चेहरों को शपथ दिलाई जा सकती है। यानी कुल 28 मंत्री शपथ ले सकते हैं। कुछ के प्रमोशन होंगे और कुछ के डिमोशन। कुल 43 मंत्री शपथ लेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, आज शामिल होने वाले मंत्रियों में 12 अनुसूचित जाति, 8 आदिवासी और 7 पिछड़े वर्ग से हो सकते हैं। अभी जो नाम फाइनल हुए हैं, उनमें ज्योतिरादित्य, मीनाक्षी लेखी, सर्वानंद सोनोवाल, हिना गावित और अनुप्रिया पटेल जैसे युवा चेहरे हैं। टीम मोदी के नए साथियों की एवरेज एज 53 साल है।

शपथ से पहले 11 पुराने मंत्री हटे

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर के वक्त चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं उनके इस्तीफे की वजह बनीं। वहीं, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौधरी, महिला बाल विकास मंत्री देबोश्री चौधरी, उर्वरक और रसायन मंत्री सदानंद गौड़ा, श्रम राज्य मंत्री संतोष गंगवार, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, बाबुल सुप्रियो, प्रताप सारंगी और रतन लाल कटारिया से भी इस्तीफा लिया जा चुका है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने मंगलवार को ही इस्तीफा दे दिया था। उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है। सभी को मिलाकर कुल 11 मंत्रियों का इस्तीफा हो चुका है।