लोकसभा चुनाव / मोदी आज तेलंगाना में प्रचार करेंगे, राहुल की भी तीन जनसभाएं

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  • मोदी ने गुरुवार को मेरठ से की थी लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत
  • महागठबंधन को लेकर कहा था- सपा का स, रालोद का र, बसपा का ब मतलब ‘सराब’, अच्छी सेहत के लिए इससे बचें

Apr 01, 2019, 08:51 AM IST

वर्धा/हैदराबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के वर्धा में चुनावी सभा में कांग्रेस और एनसीपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये दोनों पार्टियां वोट बैंक की राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। कांग्रेस ने देश के करोड़ों लोगों पर हिंदू आंतकवाद का दाग लगाने की कोशिश की। हिंदू कभी आतंकवाद करे, क्या इतिहास में ऐसी कोई घटना हुई?

 

प्रधानमंत्री ने कहा- ''राकांपा प्रमुख शरद पवार कभी प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते थे, लेकिन अब उन्होंने चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है। वे जानते हैं कि हवा का रुख किधर है। शरद पवार ने ऐलान भी किया था कि वे चुनाव लड़ेंगे। लेकिन बाद में कहा कि मैं राज्यसभा में ही खुश हूं। इस बार भी कई लोगों को जनता ने चुनाव से पहले ही मैदान छोड़कर भगा दिया है। एनसीपी में इस वक्त बड़ा पारिवारिक युद्ध चल रहा है। पार्टी उनके हाथ से निकलती जा रही है। स्थिति यह है कि पवार जी के भतीजे पार्टी में कब्जा करते जा रहे हैं। पवार जी को इसीलिए टिकट बांटने में दिक्कत आ रही है।''

 

‘शौचालय का चौकीदार बनना मेरे लिए गर्व की बात’

माेदी ने कहा- ''कुछ दिन पहले ही एक वरिष्ठ नेता ने कहा था कि मैं शौचालय का चौकीदार हूं। मैं इसे गर्व से स्वीकार करता हूं कि मैंने शौचालय की चौकीदारी की है। आपकी गाली मेरे लिए गहना है। जब मैं शौचालय का चौकीदार बनता हूं तो मैं भारत की करोड़ों माता-बहनों की इज्जत का भी चौकीदार बनता हूं।'' 

 

दरअसल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हाल ही में एक न्यूज चैनल पर भाजपा और उसके नेताओं से सवाल किए थे। उन्होंने पूछा- प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मैं चौकीदार हूं। वे किसके चौकीदार हैं महिलाओं के, किसानों के या शौचालय के? मोदी और शिवराज जरा बताएं कि उनकी पार्टी से किसने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। क्या वे हमें राष्ट्रवाद का पाठ पढाएंगे?

 

हिंदुस्तान का हीरो चाहिए या पाकिस्तान का?

मोदी ने कहा- ''विदर्भ की जनता से पूछना चाहता हूं- आपके किसकी जरूरत है जो हिंदुस्तान के हीरो हैं उनकी या जो पाकिस्तान के हीरो हैं उनकी? आप मुझे बताइए सबूत मांगने वालों को सबक सिखाना चाहिए या नहीं। यह वही कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन है जिसने आजाद मैदान में भीड़ को शहीदों के स्मारक को जूते से रौंदने की छूट दी थी। इतना ही नहीं, तब की कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने ये भी सुनिश्चित किया था कि आजाद मैदान में हिंसा करने वालों पर कार्रवाई न हो।''

 

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