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पटेल जयंती / जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 से अलगाववाद की दीवार खड़ी की गई, हमने इसे गिरा दिया: मोदी



Narendra Modi Tribute to Sardar Patel 144th birth anniversary President & Amit Shah
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  • मोदी सरकार ने सरदार पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की घोषणा की थी
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- जो युद्ध नहीं जीत सकते, वे अलगाववाद से हमारी एकता में छेद करने की कोशिश कर रहे
  • ‘संसद ने 5 अगस्त को भारी बहुमत से अनुच्छेद 370 हटाने का जो महान निर्णय किया, उसे मैं सरदार पटेल को समर्पित करता हूं’

Dainik Bhaskar

Oct 31, 2019, 11:25 AM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती के मौके पर गुरुवार को गुजरात के केवड़िया में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने राष्ट्रीय एकता के लिए शपथ भी दिलाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 से अलगाववाद की दीवार खड़ी की गई, हमने इसे गिरा दिया। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इससे पहले मोदी ने बुधवार को गांधीनगर में मां हीरा बा से मिले। मोदी सरकार ने पटेल जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की घोषणा की थी।


मोदी ने यह भी कहा, ‘‘जिस तरह किसी तीर्थस्थल आकर अनुभूति मिलती है, वैसे ही मुझे केवड़िया आकर मिलती है। देश के अलग-अलग हिस्सों से मिले लोहे और मिट्टी से स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनाई गई है। इसलिए यह प्रतिमा विविधता में एकता का जीता-जागता संदेश है। आज से ठीक एक साल पहले प्रतिमा को देश को समर्पित किया गया था। यह प्रतिमा भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को आकर्षित कर रही है। सरदार पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित कर देश गौरव का अनुभव कर रहा है।’’

 

‘भारत की पहचान विविधता में एकता’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश के अलग-अलग हिस्सों में स्त्री-पुरुष ने रन फॉर यूनिटी में हिस्सा लिया। पूरी दुनिया में अलग-अलग देश, अलग-अलग पंथ, विचारधाराएं, रंगरूप में लोग जुड़ते गए, कारवां बनता चला गया। भारत की पहचान विविधता में एकता है। यह हमारा गर्व, गौरव, गरिमा है। हमारे यहां विविधता को सेलिब्रेट किया जाता है। हमें विविधता में विरोधाभास नहीं सामर्थ्य दिखता है। यह हमें जीने का जज्बा देता है। जब हम देश की सैकड़ों बोलियों पर गर्व करते हैं तो भाव का बंधन बन जाता है। जब भिन्न-भिन्न खान-पान को विशेषता समझते हैं तो अपनेपन की मिठास आ जाती है। अलग-अलग त्योहारों में शामिल होते हैं तो नई महक आने लगती है, भारतीयता का भाव चारों दिशाओं में फैलता है।’’

 

  • ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत ही नेशन बिल्डिंग है। यह किसी और देश के भाग्य में नहीं मिलेगी। दक्षिण में जन्मे शंकर उत्तर में मठों की स्थापना करते हैं। बंगाल में जन्मे विवेकानंद को कन्याकुमारी में ज्ञान मिला। पोरबंदर में जन्मे गांधी चंपारण में ब्रिटिशों से लोहा लिया। रामेश्वरम में जन्मे एपीजे अब्दुल कलाम दिल्ली में सबसे ऊंचे पद पर आसीन हुए। हम भारत के लोग- ये सिर्फ 3-4 शब्द नहीं हैं, यह हजारों साल से चली आ रही एकता को समेटे हुए है।’’
  • ‘‘जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए जाते हैं तो भूल जाते हैं कि अमुक खिलाड़ी किस जिले, किस राज्य का है। उसकी भाषा क्या है। जब तिरंगा लहरता है तो कश्मीर से कन्याकुमारी और महाराष्ट्र से मणिपुर तक सबके दिल खिल उठते हैं। जब सरदार पटेल ने रियासतों के एकीकरण की बात कही थी, तब वे उसी भाव से चले आए थे। भारतीयता का ये भाव सदियों की गुलामी के बावजूद भी हिंदुस्तान के किसी कोने में लुप्त नहीं हुई। पटेल जब एकता का मंत्र लेकर निकले तो सभी उसके छत्र में खड़े हो गए। एक भारत का सपना संजोने वाला एक और नाम था, वे चाणक्य थे। उनके बाद ये विचार पटेल के मन में आया। अंग्रेज तो भारत को छिन्न-भिन्न कर देना चाहते थे।’’
  • ‘‘दुनिया को हमारी ये विविधता जादूगरी लगती है, लेकिन हमारे लिए यह अंतर्प्रवाहित जीवनधारा है। जिस जीवनधारा पर पटेल का अखंड विश्वास था। 21वीं सदी में भारतीयों के लिए यही एकता विरोधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। मैं प्रत्येक देशवासी को यह चुनौती याद दिला रहा हूं। कई आए, कई चले गए। बड़े-बड़े मकसद, सपने लेकर आए थे, कुछ बात तो है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। हमारी एकता के बीच छेद करने की कोशिश कर रहे हैं। अलगाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सदियों से जीवित रही एकता को ललकारा जा रहा है। ऐसी कई कोशिशों के बावजूद हमारी एकता को कोई मिटा नहीं सका। जब हमारी विविधताओं के बीच एकता के मार्ग पर चलते हैं तो ऐसी बातों को चकनाचूर कर देते हैं। हम भारतीयों को एकजुट रहकर इनका मुकाबला करना है। यही सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।’’

  • ‘‘पूरे देश में जम्मू-कश्मीर ही एकमात्र स्थान था, जहां आतंकवाद ने 40 हजार लोगों की जान ले ली। अनेक माताएं अपने बेटों को खो चुकी हैं। अनेक बच्चे अपने माता-पिता खो चुके हैं। दशकों तक वहां अनुच्छेद 370 लागू रहा। इसने अस्थायी दीवार बना रखी थी। जो दीवार कश्मीर में अलगाववाद फैला रही थी। आज में सरदार पटेल की सामने सिर झुकाकर कहना चाहता हूं कि वह दीवार गिरा दी गई है। सरदार साहब की जयंती पर कहना चाहता हूं कि भारत की संसद ने भारी बहुमत से 5 अगस्त को जो महान निर्णय किया था, उसे में पटेल को समर्पित करता हूं। ये हमारा सौभाग्य है कि सरदार साहब के सपने को पूरा करने का अवसर मिला। आज से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नए मार्ग पर कदम बढ़ा रहे हैं।’’

 

 

‘पटेल ने रियासतों को जोड़ने का काम किया’

शाह ने दिल्ली में रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा, ‘‘देश आजाद होने के बाद 550 से ज्यादा रियासतों में भारत को बांटने का काम अंग्रेजों ने किया था। देश और दुनिया मानती थी कि भारत को आजादी तो मिलेगी, लेकिन हिंदुस्तान बिखर जाएगा। लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल ने एक के बाद एक रियासतों को देश के साथ जोड़ने का काम किया।’’

 

‘सरदार ने देश को अखंड बनाया’

 

  • सरदार पटेल ने 550 से ज्यादा रियासतों को एक करके देश को अखंड बनाया, लेकिन एक कसक छूट गयी थी जम्मू और कश्मीर। जम्मू और कश्मीर का भारत के साथ विलय तो हुआ, लेकिन अनुच्छेद 370 और 35A के कारण जम्मू और कश्मीर हमारे लिए जैसे एक समस्या बनकर रह गया।
  • 70 साल में किसी ने अनुच्छेद 370 को छूना भी मुनासिब नहीं समझा। 2019 में देश की जनता ने फिरसे एक बार मोदी जी को देश का प्रधानमंत्री बनाया और 5 अगस्त को देश की पार्लियामेंट ने अनुच्छेद 370 और 35A को हटाकर सरदार साहब का अधूरा स्वप्न पूरा करने का काम किया।

 

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