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नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने इसरो की तारीफ करते हुए कहा- इससे आने वाले अभियानों में मदद मिलेगी

एक वर्ष पहले
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री जैरी लिनेंजर।
  • पूर्व अंतरिक्ष यात्री जैरी लिनेंजर ने मिशन को बेहद सफल बताया, इसरो को दी बधाई
  • लिनेंजर ने कहा, ये कोशिश आने वाले अभियानों के लिए काफी सहायक सिद्ध होगी

नेशनल डेस्क. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री जैरी लिनेंजर ने चांद की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम मॉड्यूल की सॉफ्ट लैंडिंग कराने को भारत का \'साहसिक प्रयास\' बताया है, साथ ही कहा है कि इससे मिले सबक भविष्य के अभियानों के दौरान देश के लिए बेहद मददगार साबित होंगे। ये बात उन्होंने शनिवार को भारत के चंद्रयान-2 अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। 
 
पीटीआई को दिए ईमेल इंटरव्यू में लिनेंजर ने बताया, \'हमें बहुत ज्यादा निराश नहीं होना चाहिए। भारत कुछ बहुत... बहुत ही कठिन करने की कोशिश कर रहा था। वास्तव में लैंडर के नीचे आने तक सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा था।\' लिनेंगर के मुताबिक दुर्भाग्य से लैंडर होवर प्वाइंट तक भी नहीं पहुंच सका, जो कि चांद की सतह से करीब 400 मीटर की ऊंचाई पर है। उन्होंने कहा, अगर वो उस प्वाइंट पर भी पहुंच जाता और उसके बाद अगर सफल नहीं भी होता तो भी ये काफी मददगार होता। क्योंकि तब रडार के एल्टिमीटर (ऊंचाई मापने का एक यंत्र) और लेजरों का परीक्षण किया जा सकता था।
 

मिशन को बताया बेहद सफल
 
एक अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष मामलों के विश्लेषक के रूप में लिनेंजर ने कहा कि कुल मिलाकर मिशन बेहद सफल रहा है। उन्होंने कहा, \'अगर आप थोड़ा पीछे हटकर बड़ी तस्वीर देखें, तो भी ये कोशिश आने वाले अभियानों के लिए काफी सहायक सिद्ध होगी।\' चांद की सतह पर चंद्रयान-2 की लैंडिंग प्रक्रिया का लाइव प्रसारण नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर हुआ था और प्रसारण के दौरान लिनेंजर ने भी उसमें हिस्सा लिया था। लिनेंजर ने रूसी स्पेस स्टेशन \'मिर\' पर तब पांच महीनों के लिए उड़ान भरी थी, जब कि वो साल 1986 से 2001 के बीच धरती की निचली कक्षा से संचालित होता था।
 

इसरो को आगे के अभियानों के लिए दी बधाई
 
आगे उन्होंने कहा, \'खास बात ये है कि ऑर्बिटर अगले साल तक बहुत मूल्यवान जानकारियां देना जारी रखेगा। और सभी संकेतों से पता चल रहा है कि ऑर्बिटर के सभी सिस्टम अच्छी हालत में हैं।\' इसके साथ ही लिनेंजर ने चंद्रमा पर लैंडिंग की \'मुश्किल\' कोशिश करने के लिए इसरो को भी बधाई दी। उन्होंने कहा \'मैं इस साहसिक प्रयास से मिले सबकों के आधार पर भविष्य में पूर्ण सफलता देखने को लेकर काफी उत्साहित हूं।\'
 

चांद पर उतरने से पहले टूट गया संपर्क
 
चंद्रयान-2 मिशन को 22 जुलाई को जीएसएलवी एमके III द्वारा लॉन्च किया गया था। चंद्रयान-2 के साथ गए लैंडर \'विक्रम\' को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की इसरो की योजना तब अधूरी रह गई, जब चंद्रमा पर लैंडिंग से महज 69 सेकंड पहले और 2.1 किलोमीटर दूर उसका संपर्क टूट गया। हालांकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अब भी चंद्रमा की सतह से 119 किमी से 127 किमी की ऊंचाई पर घूम रहा है। 2379 किलो वजनी ऑर्बिटर के साथ 8 पेलोड हैं और यह एक साल काम करेगा। यानी लैंडर और रोवर की स्थिति पता नहीं चलने पर भी मिशन जारी रहेगा।

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