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चंद्रयान-2 / चांद की सतह पर पड़े 'विक्रम' के ऊपर से गुजरेगा नासा का ऑर्बिटर, तस्वीरें लेकर इसरो के साथ शेयर करेगा



अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ऑर्बिटर LRO। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ऑर्बिटर LRO।
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ऑर्बिटर LRO।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ऑर्बिटर LRO।

  • अपने ऑर्बिटर के जरिए नासा करेगा इसरो की मदद
  • चंद्रयान-2 के लैंडर 'विक्रम' की तस्वीरें लेगा नासा का ऑर्बिटर
  • 7 सितंबर को चंद्रमा पर लैंडिंग के दौरान टूटा था विक्रम से संपर्क
     

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2019, 05:51 PM IST

नेशनल डेस्क. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ऑर्बिटर आज (मंगलवार) को चंद्रमा के उस हिस्से के ऊपर से गुजरेगा, जहां इसरो के 'चंद्रयान-2' का लैंडर 'विक्रम' टेढ़ा पड़ा हुआ है। इस दौरान इसरो की मदद करने के लिए नासा अपने ऑर्बिटर की मदद से विक्रम के फोटोज भी लेगा, ताकि चंद्रयान-2 मिशन के विश्लेषण करने में मदद मिल सके। विक्रम से संपर्क के लिए अब सिर्फ 4 दिन ही शेष रह गए हैं। 20-21 सितंबर को चंद्रमा पर रात होते ही संपर्क की उम्मीद खत्म हो जाएगी।

 

नासा अपने LRO (लुनर रीकानसन्स ऑर्बिटर) की मदद से चांद की सतह पर पड़े 'विक्रम' के फोटो लेगा और इसरो के साथ शेयर करेगा। इस बारे में जानकारी देते हुए LRO प्रोजेक्ट के साइंटिस्ट नोह पेट्रो ने बताया, 'नासा इसरो के साथ चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की लैंडिंग साइट के आसपास के हिस्से की हवाई फोटो लेकर साझा करेगा, ताकि वो उसका विश्लेषण कर सके।'

 

वातावरण पर अध्ययन कर रहा है अमेरिकी ऑर्बिटर

 

7 सितंबर को जब चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लैंडिंग चांद पर होने वाली थी, उस दिन LRO ने शुरुआती कुछ घंटों का डाटा कलेक्ट कर लिया था। हाल ही में अमेरिका में हुए एक इवेंट के दौरान नासा के एक अधिकारी ने कहा था, कि 'LRO विक्रम लैंडर के उतरने के दौरान रॉकेट के प्रवाह से चंद्रमा के वातावरण में आए परिवर्तन पर अध्ययन कर रहा है।' 

 

नासा ने पहले भी की थी संपर्क की कोशिश

 

कुछ दिन पहले नासा ने भी लैंडर विक्रम के साथ संपर्क करने की कोशिश की थी। एजेंसी की जेट प्रोपल्शन लेबोरेट्री ने कुछ प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद में लैंडर पर रेडियो फ्रीक्वेंसी बीम को टारगेट किया था। हालांकि इसका कुछ फायदा नहीं हुआ। चंद्रयान-2 मिशन के लैंडर की लाइफ एक ल्यूनर डे यानी पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है। विक्रम से संपर्क टूटे करीब 10 दिन गुजर चुके हैं। जिसके बाद अब इसरो के पास दोबारा विक्रम से संपर्क स्थापित करने के लिए सिर्फ 4 दिन ही बचे हैं। 
 

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