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हेराल्ड केस में सभी नेताओं ने वोरा का नाम लिया:कहा- वित्तीय फैसले मोतीलाल वोरा लेते थे, लेकिन इसका सबूत नहीं दे सके

नई दिल्ली12 दिन पहले
मोतीलाल वोरा (बीच में) 2000 से 2018 यानी 18 साल तक कांग्रेस के कोषाध्यक्ष भी रहे थे। वोरा का 21 दिसंबर 2020 को निधन हो गया था। - फाइल फोटो

नेशनल हेराल्ड केस में सभी कांग्रेस नेताओं ने वित्तीय लेनदेन की जानकारी से अपना पल्ला झाड़ लिया है। ED सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल तक ने कहा कि लेनदेन से जुड़ा हर फैसला मोतीलाल वोरा लेते थे। हालांकि, वे इसका सबूत नहीं दे सके।

जांच में ED को कई फर्जी कंपनियां मिलीं
कांग्रेस नेता मल्लिार्जुन खड़गे यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एक मात्र कर्मचारी हैं। ऐसे में ED के पास पूछताछ के लिए खड़गे को बुलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच के दौरान ईडी को कई फर्जी कंपनियां मिलीं। जिनसे यंग इंडिया का लेनदेन होता था। ईडी को कंपनी के 90 करोड़ की लेनदेन पर शक है।

खड़गे से ईडी ने 8 घंटे पूछताछ की
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से 8 घंटे पूछताछ की थी। जांच एजेंसी ने उनसे यंग इंडिया के ऑफिस में ही पूछताछ की। पूछताछ दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू हुई। इस दौरान ऑफिस की तलाशी भी ली गई।

नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की छापेमारी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग।
नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की छापेमारी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग।

खड़गे 8 घंटे बाद रात करीब 8:30 बजे दफ्तर से बाहर निकले। इधर, ED के समन पर राज्यसभा में भी विपक्ष के नेता खड़गे ने गुरुवार को ही सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि क्या संसद की कार्यवाही के दौरान बुलाना सही है? इस पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जवाब दिया कि कोई गलत करेगा तो एजेंसियां तो एक्शन लेंगी ही। इसके बाद दोनों में बहस शुरू हो गई।

यंग इंडिया का दफ्तर सील
इससे पहले बुधवार को भी यहां तलाशी ली जा चुकी है। छापेमारी के बाद ईडी ने नेशनल हेराल्ड की बिल्डिंग में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस सील कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने नेता बीजेपी पर हमलावर हो गए और देश के लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया।

कौंन है मोतीलाल वोरा
मोतीलाल वोरा कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। वे दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2000 से 2018 तक (18 साल) पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रहे थे। 21 दिसंबर 2021 में उनका निधन हो गया था। 1970 में कांग्रेस में शामिल हुए। 1972 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद 1977 और 1980 में भी विधायक चुने गए। अर्जुन सिंह की कैबिनेट में पहले उच्च शिक्षा विभाग में राज्य मंत्री रहे। 1983 में कैबिनेट मंत्री बनाए गए। 1981-84 के दौरान वे मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन भी रहे।

मोतीलाल वोरा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रहे।
मोतीलाल वोरा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रहे।

13 फरवरी 1985 में वोरा को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। 13 फरवरी 1988 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर 14 फरवरी 1988 में केंद्र के स्वास्थ्य-परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार संभाला। अप्रैल 1988 में वोरा मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। 26 मई 1993 से 3 मई 1996 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

जानिए नेशनल हेराल्ड केस क्या है?
नेशनल हेराल्ड केस का मामला सबसे पहले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में उठाया था। अगस्त 2014 में ED ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के ही मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे को आरोपी बनाया गया था। नीचे ग्राफिक्स से समझिए इस पूरे केस को...