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तीन तलाक / विधेयक पेश करने की कैबिनेट से मंजूरी; इस बार सरकार को राज्यसभा से पास होने की उम्मीद



बुधवार शाम कैबिनेट मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत करते प्रकाश जावड़ेकर। बुधवार शाम कैबिनेट मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत करते प्रकाश जावड़ेकर।
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बुधवार शाम कैबिनेट मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत करते प्रकाश जावड़ेकर।बुधवार शाम कैबिनेट मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत करते प्रकाश जावड़ेकर।

  • संसद का बजट सत्र 17 जून से शुरू हो रहा, इसमें यह विधेयक पेश किया जाएगा
  • लोकसभा भंग होने की वजह से पूर्व में पेश अध्यादेश की अवधि समाप्त हो गई थी

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2019, 09:44 PM IST

नई दिल्ली. तीन तलाक पर प्रतिबंध के लिए केंद्र सरकार बजट सत्र में नया विधेयक पेश करेगी। बुधवार को कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी। जावड़ेकर ने कहा कि नया विधेयक फरवरी में पेश किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा। जावड़ेकर ने उम्मीद जताई कि इस बार यह बिल राज्यसभा से भी पास करा लिया जाएगा।

 

नई सरकार का पहला बजट सत्र 17 जून से आरंभ हो रहा है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा से तो पास करा लिया गया था लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण वहां ये पारित नहीं हो सका था।

 

संसदीय नियमों के अनुसार, जो विधेयक सीधे राज्यसभा में पेश किए जाते हैं, वो लोकसभा भंग होने की स्थिति में स्वत: समाप्त नहीं होते। वहीं, जो विधेयक लोकसभा में पेश किए जाते हैं और राज्यभा में लंबित रहते हैं, वो निचले सदन यानी लोकसभा भंग होने की स्थिति में अपने आप ही समाप्त हो जाते हैं। तीन तलाक बिल के साथ भी यही हुआ और इसी वजह से सरकार को नया विधेयक लाना पड़ रहा है।

 

फरवरी में लोकसभा में पास हो गया था बिल

लोकसभा में तीन तलाक पर कानूनी रोक वाला विधेयक फरवरी में पारित हो गया था। हालांकि, राज्यसभा में एनडीए सरकार के पास बहुमत का अभाव था, इसलिए ये वहां अटका रहा। अब सरकार बजट सत्र में इसे पेश करने और दोनों सदनों से पास कराने की उम्मीद कर रही है। अध्यादेश को भी कानून में तभी बदला जा सकता है जबकि संसद सत्र आरंभ होने के 45 दिन के भीतर वो पास करा लिया जाए। अन्यथा अध्यादेश की अवधि समाप्त हो जाती है। 

 

नए विधेयक में ये हुए थे बदलाव

 

  • अध्यादेश के आधार पर तैयार किए गए नए बिल के मुताबिक, आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी। मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं। उन्हें पति-पत्नी के बीच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा।
  • बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं।
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