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मनसुख हिरेन मौत मामला:सबूत की तलाश में NIA वझे को मीठी नदी ले गई, 12 गोताखोरों को पानी में उतारा; नदी से 2 कम्प्यूटर CPU, लैपटॉप और 2 नंबर प्लेट मिलीं

मुंबई3 महीने पहले

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर से बरामद विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो के कथित मालिक मनसुख हिरेन की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) रविवार को मामले में मुख्य आरोपी मुंबई पुलिस के सस्पेंड असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) सचिन वझे को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मीठी नदी के पुल पर ले गई।

दरअसल, NIA को इस बात का शक था कि एंटीलिया और मनसुख हिरेन की मौत से जुड़े कुछ सुराग नदी में फेंके गए हैं। इन्हीं सबूतों की तलाश में NIA ने 12 गोताखोरों को नदी में उतारा। गोताखोरों ने नदी से दो कंप्यूटर CPU, दो नंबर प्लेट, एक लैपटॉप और अन्य सामना बरामद किए।

वहीं NIA सूत्रों ने बताया कि कुछ सबूतों से वझे का सामना कराया गया। पूछताछ के बाद उसने स्वीकार किया कि मामले से जुड़े अहम साक्ष्य मीठी नदी में फेंक दिए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये सारी चीजें एंटीलिया और मनसुख हिरेन केस से जुड़ी हैं।

NIA की टीम API सचिन वझे को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मीठी नदी के पुल पर ले गई।
NIA की टीम API सचिन वझे को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मीठी नदी के पुल पर ले गई।

गोताखोरों ने ढूंढ निकालीं नंबर प्लेट
गोताखोरों ने नदी से नंबर प्लेट भी ढूंढ निकालीं। दोनों प्लेट्स पर एक ही नंबर MH02FP1539 लिखा हुआ है। ये नंबर एंटीलिया और मनसुख केस में उपयोग में लाई गई किसी कार की हो सकती हैं। बता दें कि NIA ने अब तक वझे से पांच कारें बरामद की हैं। एंटीलिया के पास खड़ी स्कॉर्पियो से भी कुछ नंबर प्लेट मिले थे। इनमें से कई नंबर मुकेश अंबानी की सुरक्षा में तैनात सरुक्षाकर्मियों के वाहनों से मिलती-जुलती पाई गई थीं।

NIA ने कहा-बरामद DVRs में वझे के सारे करतूत कैद हैं
NIA सूत्रों के मुताबिक, मीठी नदी से आज बरामद DVRs (डिजिटल वीडियो रिकाॅर्डर्स) वझे के हाउसिंग सोसायटी के हैं। यहीं पर 17 फरवरी से 24 फरवरी के बीच स्कॉर्पियो पार्क की गई थी। स्कॉर्पियो में मिले नंबर प्लेट्स जहां बनाए गए थे, वहां के वीडियो फुटेज भी इसमें शामिल हैं। जांच एजेंसी ने बताया कि मनसुख हिरेन की मौत के समय तक ये सभी साक्ष्य वझे ने अपने पास रखे थे।

मीठी नदी से आज बरामद डिजिटल वीडियो रिकाॅर्डर्स वझे के हाउसिंग सोसायटी के हैं।
मीठी नदी से आज बरामद डिजिटल वीडियो रिकाॅर्डर्स वझे के हाउसिंग सोसायटी के हैं।

NIA ने कुछ दिन पहले ही मनसुख मौत केस को ATS से अपने हाथ में लिया है। इससे पहले NIA के अधिकारी 25 मार्च की शाम वझे को ठाणे स्थित रेती बुंदर क्रीक लेकर गए थे। यहीं पर कारोबारी मनसुख हिरेन का शव मिला था। मनसुख हिरेन की पत्नी ने सचिन वाजे पर हत्या करवाने का आरोप लगाया था।

3 अप्रैल तक NIA की रिमांड पर है वझे
NIA ने सचिन वझे को कोर्ट में पेश कर 3 अप्रैल तक उसे रिमांड पर लिया है। वझे ने कोर्ट में कहा था कि मुझे बलि का बकरा बनाया गया है। वहीं, NIA के वकील ने कहा था कि वझे के घर से 62 कारतूस बरामद किए गए हैं। ये कारतूस घर में क्यों थे इसका जवाब वझे नहीं दे रहे हैं। इन्हें रखने का मकसद छिपा रहे हैं। इसके अलावा वझे को बतौर पुलिस अधिकारी 30 कारतूस सरकारी कोटे से दिए गए थे, लेकिन इनमें से सिर्फ 5 उसके पास से मिले, 25 बुलेट गायब हैं। ये बुलेट्स कहां गईं। इसका जवाब भी वझे नहीं दे रहे हैं।

मीठी नदी पर पुलिस और मीडिया का जमावड़ा था। स्थानीय लोग भी वझे को देखने पहुंचे।
मीठी नदी पर पुलिस और मीडिया का जमावड़ा था। स्थानीय लोग भी वझे को देखने पहुंचे।

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एक गाड़ी में जिलेटिन की छड़ें मिलने के मामले में गिरफ्तार किए गए निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे 3 अप्रैल तक NIA की हिरासत में हैं। वझे को पहले 25 मार्च तक NIA की हिरासत में भेजा गया था, जिसे बढ़ाकर 3 अप्रैल तक कर दिया गया है। NIA ने उसे 13 मार्च को गिरफ्तार किया था।

ATS ने हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया
मुंबई की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड ( ATS) ने इस गुत्थी को सुलझा लेने का दावा किया है। उसका कहना है कि हिरेन की हत्या में कुल 4 लोगों के शामिल होने के सबूत मिले हैं। इनमें से 3 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बात का खुलासा पिछले बुधवार को ठाणे कोर्ट के आदेश के बाद NIA को सौंपी रिपोर्ट में हुआ।

पड़ताल के दौरान ATS को यह भी पता चला कि मनसुख को क्लोरोफॉर्म सुंघाकर बेहोश किया गया और फिर आराम से उसकी सांस को रोककर हत्या कर दी गई। हत्या के वक्त सचिन वझे भी मौके पर मौजूद था। ATS को उसकी मोबाइल लोकेशन से इसके पुख्ता सबूत मिले हैं।

मारने के बाद चेहरे पर बांधे गए थे रूमाल
सूत्रों की मानें तो मनसुख के चेहरे पर बंधे 5 रूमालों में क्लोरोफॉर्म डाला गया था और माना जा रहा है कि सांस रोकने के बाद आरोपी कोई चांस नहीं लेना चाहते थे, इसलिए उन्होंने रूमाल को मनसुख के चेहरे पर बांध कर पानी में फेंका था। हालांकि चेहरे पर बंधे रूमालों को देखकर ही यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि मनसुख की हत्या हुई है और उन्होंने सुसाइड नहीं किया है।

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