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निर्भया को इंसाफ / सुप्रीम कोर्ट में तड़के 3:15 बजे तक सुनवाई हुई, दोषी पवन ने दया याचिका खारिज करने को चुनौती दी थी

निर्भया मामले में चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह फांसी दी जानी है। निर्भया मामले में चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह फांसी दी जानी है।
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निर्भया मामले में चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह फांसी दी जानी है।निर्भया मामले में चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह फांसी दी जानी है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- अब समय आ गया है, जब आपके मुवक्किल भगवान से मिलेंगे
  • निर्भया की मां ने कहा- आज का दिन और आज का सूरज देश की बेटियों और महिलाओं के नाम
  • 24 घंटे के भीतर दोषियों की 8 याचिकाएं खारिज हुईं, इसमें दो दया याचिकाएं भी शामिल हैं

दैनिक भास्कर

Mar 20, 2020, 09:26 AM IST

नई दिल्ली. आखिरकार सात साल बाद यह तय हो गया है कि आज सुबह साढ़े पांच बजे का वक्त तारीख में निर्भया को इंसाफ मिलने के वक्त के तौर पर दर्ज हो गया। दोषियों के सामने जो आखिरी रास्ता बचा था, वह भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही बंद हो गया। दरअसल, दुष्कर्मी पवन ने दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी। रात ढाई बजे सुप्रीम कोर्ट खुला, सवा तीन बजे तक सुनवाई हुई। इसके बाद तीन जजों की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद 5.30 बजे तिहाड़ में जेल नंबर तीन में दुष्कर्मी मुकेश, पवन, विनय और अक्षय की फांसी दे दी गई।

सुप्रीम कोर्ट के बाहर मौजूद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, "7 साल की लंबी लड़ाई के बाद अब बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। देश की बच्चियों, पूरे देश को इंसाफ मिला। आज का दिन देश की बच्चियों के नाम, निर्भया के नाम। आज का दिन निर्भया दिवस के तौर पर याद किया जाए।" जब एपी सिंह दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा फांसी रोकने की याचिका खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट गए थे, तब भी आशा देवी ने पूरे यकीन से कहा था कि फांसी तो 5.30 बजे होगी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी, बेंच ने क्या कहा?

एपी सिंह ने बेंच के सामने पवन के स्कूली दस्तावेज पेश किए। कहा कि वारदात के समय पवन नाबालिग था।

बेंच ने कहा- यह दस्तावेज पहले ही इस अदालत में रख चुके हैं। आप इन दस्तावेजों को बार-बार रख रहे हैं। नाबालिग होने का दावा लोअर कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट खारिज कर चुकी है। आप जो आधार बता रहे हैं, उन पर पहले ही बहस हो चुकी है। दया याचिका को चैलेंज करने का क्या आधार है।

एपी सिंह ने कहा- मेरे मुवक्किल की फांसी में केवल दो घंटे बचे हैं।

बेंच ने पवन के नाबालिग होने के दावे को स्वीकार करने से इनकार किया।

एपी सिंह ने कहा- पवन को पिछले साल जेल में पुलिसवालों ने पीटा। फांसी पर एक-दो दिन के लिए रोक लगाई जाए ताकि वह इस मामले में अपना बयान दर्ज करा सके।

बेंच ने कहा कि यह दस्तावेज आप पहले ही यहां पेश कर चुके हैं। आप किस आधार पर राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दे रहे हैं। हम यह याचिका सुनने को तैयार नहीं है।

यह सात याचिकाएं खारिज हुईं

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को पवन गुप्ता की और अक्षय ठाकुर की दूसरी दया याचिका नामंजूर कर दी।
  • अक्षय ने राष्ट्रपति की ओर से दूसरी दया याचिका ठुकराने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, अदालत ने इसे भी खारिज किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। मुकेश ने दावा किया था कि गैंगरेप के वक्त वह दिल्ली में ही नहीं था।
  • सुप्रीम कोर्ट में ही दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो गई।
  • दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 दोषियों की फांसी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया।
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी पर रोक की याचिका खारिज की।

दिल्ली हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणियां
आपके मुवक्किल भगवान से मिलेंगे:
फांसी पर रोक की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- 4-5 घंटे हैं, कोई तथ्य है तो सीधे उस पर आइए। हमारे पास वक्त बहुत कम बचा है। अब समय आ गया है, जब आपके मुवक्किल भगवान से मिलेंगे। समय बर्बाद मत कीजिए।
आखिरी वक्त मदद नहीं कर सकते: अदालत ने कहा- अगर आप महत्वपूर्ण तथ्य नहीं बता सकते, तो हम आखिरी वक्त में आपकी मदद नहीं कर सकते। आपके पास 4-5 घंटे हैं। अगर आपके पास कोई तथ्य है, तो सीधे उस पर आइए।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंजाम तक पहुंच रहा: याचिका पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा- इस अर्जी में कोई नया तथ्य नहीं है। दोषियों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब अंजाम तक पहुंच रहा है। हम फांसी पर रोक नहीं लगा सकते। 
10 बजे सुनवाई के लिए बैठे हैं, सुविधाओं का बहाना न बनाएं: सुनवाई के दौरान कोर्ट के सवालों पर एपी सिंह ने फोटोकॉपी मशीन और कोरोनावायरस की वजह से मुश्किलों की बात कही। इस पर कोर्ट ने कहा- सुविधाओं की कमी का बहाना मत बनाइए आज आप तीन कोर्ट में जा चुके हैं। आप यह नहीं कह सकते कि सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। हम रात को 10 बजे आपके मामले की सुनवाई के लिए यहां बैठे हैं।

दलीलें नहीं होतीं तो 4-4 बार डेथ वॉरंट नहीं रोका जाता- एपी सिंह
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद एपी सिंह ने कहा कि मामले में मीडिया ट्रायल हुआ और सरकार द्वारा इसे प्रेस्टीज इश्यू बना लिया गया। अगर हमारी याचिकाओं में तथ्य नहीं होते तो इससे पहले डेथ वॉरंट क्यों रोके जाते। दलीलें थीं इसीलिए चार-चार बार डेथ वॉरंट रोकना पड़ा। दलीलें हैं इसीलिए सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हुआ है।

एपी सिंह का विवादित बयान, एक्टिविस्ट ने आपत्ति जताई
एपी सिंह ने कहा- एक मां के लिए आप सात साल से नाचते घूम रहे हो। यह मां नहीं है क्या। क्या आठ साल से कम उम्र का कोई विक्टीम है। चोर की मां की बात है तो फिर उस कारण पर जाओ कि रात 12.30 बजे तक क्यों नहीं पता था कि बेटी कहां है। यह बात छोड़ दीजिए। फिर बातें बढ़ेंगी। 
इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट में मौजूद एक महिला एक्टिविस्ट ने आपत्ति जाहिर की और वकील एपी सिंह से बयान पर माफी मांगने को कहा।


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तीन डेथ वॉरंट खारिज 

  • पहली बार- 22 जनवरी को सुबह 6 बजे फांसी होनी थी, लेकिन टल गई।
  • दूसरी बार- 1 फरवरी को फांसी देने का डेथ वॉरंट जारी किया गया, लेकिन फांसी नहीं हुई।
  • तीसरी बार- 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी होनी थी, लेकिन दोषी पवन के पास कानूनी विकल्प बचे होने के चलते फांसी टली।
  • चौथी बार- दिल्ली कोर्ट ने 20 मार्च को सुबह 5.30 बजे फांसी का आदेश दिया था।

16 दिसंबर 2012: 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की थी
दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 16 दिसंबर 2012 की रात 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के 9 महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।

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