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निर्भया केस / पिता ने कहा- सुप्रीम कोर्ट तय करे कि दोषी कितनी याचिकाएं लगा सकता है; मां बोलीं- चारों की फांसी से ही चैन मिलेगा

निर्भया के माता-पिता दोषियों को फांसी न हो पाने से दुःखी हैं। -फाइल निर्भया के माता-पिता दोषियों को फांसी न हो पाने से दुःखी हैं। -फाइल
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निर्भया के माता-पिता दोषियों को फांसी न हो पाने से दुःखी हैं। -फाइलनिर्भया के माता-पिता दोषियों को फांसी न हो पाने से दुःखी हैं। -फाइल

  • सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले के एक दोषी पवन की वारदात के समय नाबालिग होने की याचिका खारिज की
  • इससे पहले दिल्ली की अदालत ने 17 जनवरी को नया डेथ वॉरंट जारी कर दोषियों को 1 फरवरी को फांसी का आदेश दिया

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 09:46 PM IST

नई दिल्ली. निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से दोषियों की तरफ से दाखिल की जा सकने वाली याचिकाओं की संख्या पर निर्देश जारी करने की अपील की है। सोमवार को उन्होंने कहा- सुप्रीम कोर्ट तय करे कि एक दोषी कितनी याचिकाएं दाखिल कर सकता है। ऐसा करने से ही महिलाओं को निश्चित समय में न्याय मिल सकता है। वहीं, निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि दोषियों की फांसी होने पर ही उन्हें चैन मिलेगा। सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के एक दोषी पवन गुप्ता की याचिका खारिज की थी। उसने 2012 में हाईकोर्ट में वारदात के समय खुद के नाबालिग होने की याचिका खारिज होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

मुझे खुशी है कि अदालत ने दोषी की याचिका रद्द की: निर्भया के पिता 

  • ‘‘जब भी जब भी इस मामले में कोई याचिका दाखिल होती है, तो हमारे दिलों की धड़कन बढ़ जाती है। हालांकि, आखिर में हमें सकारात्मक खबर ही मिलती है। यह केवल निर्भया का मामला नहीं है, बल्कि यह केस देश की सारी बेटियों से संबंधित है। हम कोर्ट से निवेदन करते हैं कि वह इस बारे में दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि निर्भया और दूसरी बेटियों को वक्त पर इंसाफ मिल सके।’’
  • ‘‘निचली अदालत, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को मिलाकर इस केस की सुनवाई तीन बार हो चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट को अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए याचिकाएं दाखिल करने के लिए समय सीमा तय करनी चाहिए।’’
  • निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, “एक बार फिर दोषियों की सजा से बचने की साजिश नाकाम हुई। फांसी में देर करने की उनकी रणनीति सुप्रीम कोर्ट ने नकार दी। मुझे तभी चैन मिलेगा, जब दोषियों को 1 फरवरी को फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा। वे जैसे किसी न किसी बहाने से देरी कर रहे हैं, उसको देखते हुए उन्हें एक-एक करके फांसी दे देनी चाहिए ताकि उन्हें समझ आए कि कानून से खेलने का मतलब क्या होता है।”

सुप्रीम कोर्ट में दोषी पवन की याचिका खारिज

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्भया के दुष्कर्मी पवन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने वारदात के वक्त खुद के नाबालिग होने का दावा किया था। कोर्ट ने कहा- याचिका में कोई नया आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच ने पवन के वकील एपी सिंह से कहा- पुनर्विचार याचिका में भी आपने यही मामला उठाया था। अब इसमें नई जानकारी क्या है, क्या यह विचार करने योग्य है? एपी सिंह ने दलील दी कि पवन के उम्र संबंधी दस्तावेजों की जानकारी पुलिस ने जानबूझकर छिपाई। हाईकोर्ट ने भी तथ्यों को नजरंदाज किया।

16 दिसंबर 2012 को 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की थी

16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों.. राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी।

ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है। इस केस में वारदात के 2578 दिन बाद पहला डेथ वॉरंट जारी हुआ था। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाए जाने का डेथ वॉरंट दिया था। 17 जनवरी को नया डेथ वॉरंट जारी किया गया, जिसमें 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश दिया गया।

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