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निर्भया केस का असर / केंद्र की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी- दया याचिका खारिज होने के 7 दिन में डेथ वॉरंट जारी हो, किसी दोषी की याचिका लंबित होने पर बाकियों की फांसी न टले

Nirbhaya Rapists Death Warrant | Nirbhaya Gang Rape Case Convict Latest News and Updates On Delhi Gang Rape And Murder Case 2012 Convict Curative Petition
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Nirbhaya Rapists Death Warrant | Nirbhaya Gang Rape Case Convict Latest News and Updates On Delhi Gang Rape And Murder Case 2012 Convict Curative Petition

  • सरकार ने याचिका में कहा- मौजूदा नियमों के चलते दोषी को कानून से खेलने और फांसी टालने का मौका मिल जाता है
  • केंद्र ने 2014 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले में बदलाव की मांग की, जिसमें दया याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही फांसी देने की व्यवस्था दी गई थी

दैनिक भास्कर

Jan 22, 2020, 10:22 PM IST

नई दिल्ली. निर्भया केस में दोषियों की फांसी में देरी से देश में उपजी नाराजगी के बीच बुधवार को केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा- मौत की सजा पर क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए समय सीमा तय की जाए। डेथ वॉरंट मिलने के बाद 7 दिन में ही दया याचिका लगाने का नियम रहे। दया याचिका खारिज होने के बाद 7 दिन में डेथ वॉरंट और अगले 7 दिन में फांसी हो, भले ही बाकी दोषियों की कोई भी याचिका लंबित हो। मौजूदा गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी दोषी की कोई भी याचिका लंबित होने पर उस केस से जुड़े बाकी दोषियों को भी फांसी नहीं दी जा सकती।

गृह मंत्रालय की याचिका के मुख्य बिंदु:

  • मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए समय सीमा तय हो।
  • डेथ वॉरंट जारी होने के बाद दया याचिका दाखिल करने के लिए 7 दिन का वक्त तय हो।
  • दया याचिका रद्द होने के 7 दिन के भीतर नया डेथ वॉरंट जारी किया जाए।
  • नया डेथ वॉरंट जारी होने के 7 दिन बाद दोषी को फांसी दे दी जाए।
  • केस से संबंधित किसी भी दोषी की रिव्यू/क्यूरेटिव/दया याचिका पर फैसला लंबित होने पर बाकी दोषियों की फांसी न रोकी जाए।

फांसी को लेकर मौजूदा प्रावधान और सरकार की याचिका:

प्रक्रिया सरकार की याचिका में समय सीमा मौजूदा प्रावधान
रिव्यू पिटीशन पूर्ववत (बदलने की मांग नहीं) फैसला आने के बाद 30 दिन
क्यूरेटिव पिटीशन रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद 7 दिन कोई समय सीमा नहीं
दया याचिका सभी याचिकाएं खारिज होने के बाद 7 दिन सामान्यतः 7 दिन / फांसी होने के ठीक पहले तक
डेथ वॉरंट दया याचिका खारिज होने के बाद 7 दिन कोई समय सीमा नहीं
फांसी डेथ वॉरंट जारी होने के बाद 7 दिन डेथ वॉरंट के बाद कम से कम 14 दिन

पीड़ित को ध्यान में रखकर बदलें गाइडलाइन्स

गृह मंत्रालय ने अपनी याचिका में मौत की सजा के मामलों में कानूनी प्रावधानों को 'दोषी केंद्रित' के बजाए 'पीड़ित केंद्रित' करने की अपील की। इसका मतलब यह है कि मौत की सजा के मामलों में तय गाइडलाइंस को दोषी की जगह पीड़ित को ध्यान में रखते हुए बदला जाए। याचिका में कहा गया- वर्तमान कानून के गाइडलाइंस दोषी को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इसके चलते वे सजा टालने के लिए कानूनी प्रावधानों से खिलवाड़ करते हैं। याचिका में मौत की सजा पाने वाले दोषी को मिले अधिकारों पर 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग की गई। जनवरी, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था- मौत की सजा पाए दोषी के भी कुछ अधिकार होते हैं और उसकी दया याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही उसे फांसी दी जाए।

निर्भया केस के दोषियों की फांसी लगातार टल रही

निर्भया के साथ दरिंदगी के चारों दोषियों की फांसी की सजा कानूनी पैंतरों की वजह से लगातार टल रही है। सोमवार को निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से दोषियों की तरफ से दाखिल की जा सकने वाली याचिकाओं की संख्या पर निर्देश जारी करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था- सुप्रीम कोर्ट तय करे कि एक दोषी कितनी याचिकाएं दाखिल कर सकता है। ऐसा करने से ही महिलाओं को निश्चित समय में न्याय मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के एक दोषी पवन गुप्ता की याचिका खारिज की थी। उसने 2012 में हाईकोर्ट में वारदात के समय खुद के नाबालिग होने की याचिका खारिज होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

16 दिसंबर 2012 को 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की

16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों...राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी।

ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है। इस केस में वारदात के 2578 दिन बाद पहला डेथ वॉरंट जारी हुआ था। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाए जाने का डेथ वॉरंट दिया था। 17 जनवरी को नया डेथ वॉरंट जारी किया गया, जिसमें 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश दिया गया।

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