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नई दिल्ली. निर्भया केस के एक दोषी पवन गुप्ता ने फांसी की तारीख से 10 दिन पहले सजा में देरी करने के लिए एक और पैंतरा आजमाया। पवन ने गुरुवार को अदालत में याचिका दायर कर मंडोली जेल के दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उसने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उससे मारपीट की, जिससे उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। याचिका पर सुनवाई करते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट प्रियांक नायक ने मंडोली जेल प्रशासन को नोटिस देकर 8 अप्रैल तक जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि दोषी की याचिका का उसकी फांसी की सजा पर कोई असर नहीं होगा।
निर्भया के दोषी फांसी की सजा टलवाने के लिए लगातार पैंतरेबाजी कर रहे हैं। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इनकी फांसी बरकरार रखी। इसके बावजूद, फांसी टलवाने के लिए वे किसी न किसी कानूनी पैंतरे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस साल जनवरी से लेकर अब तक दोषियों की फांसी 3 बार टल चुकी है।
20 मार्च को सुबह साढ़े 5 बजे होनी है फांसी
निर्भया के दोषी मुकेश सिंह ने 5 दिन पहले ही सजा से बचने के लिए नया पैंतरा चला था। उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि वकील ने उसे धोखा दिया है, इसलिए उसके कानूनी विकल्प बहाल किए जाएं। मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। ट्रायल कोर्ट ने 6 मार्च को चौथा डेथ वॉरंट जारी कर निर्भया के दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय सिंह (31) की फांसी 20 मार्च को सुबह साढ़े 5 बजे तय की है।
16 दिसंबर 2012: 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की थी
दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 16 दिसंबर, 2012 की रात 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। देश ने उसे निर्भया नाम दिया। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के 9 महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।
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