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निर्भया के दुष्कर्मियों का आखिरी दिन तिहाड़ में / चारों दोषियों की फांसी से 12 घंटे पहले तक अजीब हरकतें; विनय अनाप-शनाप बोलने लगा, पवन ने जेल स्टाफ को गालियां दीं

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  • मुकेश सिंह फांसी के लिए मानसिक तौर पर तैयार दिख रहा था
  • अक्षय ठाकुर को उम्मीद थी कि फांसी टल जाएगी

दैनिक भास्कर

Mar 20, 2020, 06:25 AM IST

नई दिल्ली. निर्भया के चारों दुष्कर्मियों की बिहैवियर स्टडी कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक फांसी से एक दिन पहले चारों अजीबोगरीब हरकत कर रहे थे। वे अपनी बैरक से बार-बार बाहर झांकते रहे थे। स्टाफ को बुला रहे थे। दोषी विनय शर्मा और पवन गुप्ता सबसे ज्यादा आसामान्य व्यवहार कर रहे थे। मुकेश और अक्षय काफी हद तक सामान्य थे।  (पढ़ें, भास्कर आर्काइव से: 23 साल 7 महीने पहले इंदौर में हत्या के दोषी को दी गई फांसी की आंखों देखी रिपोर्ट)

फांसी से पहले जेल में चारों दुष्कर्मियों का व्यवहार

विनय शर्मा: इसकी मानसिक स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी। विनय अपने बैरक में कुछ भी अनाप-शनाप बोल रहा था। उसने बार-बार यह दिखाने की भी कोशिश की कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि लगातार आधे घंटे बात करने के बाद उसका बर्ताव हो सामान्य हो जाता था।
पहले वह जेल नंबर 4 में था। वहां उसे एक अन्य कैदी से प्यार हो गया था। सजा के पहले तक जेल नंबर तीन में रहा। यहां जेल स्टाफ से उसने बार-बार कहा कि दोस्त से मिलवाओ। कुछ दिन पहले उसे चिट्ठी भी लिखी थी। जवाब में दूसरे कैदी ने भी विनय को चिट्‌ठी लिखी। जेल स्टाफ ने उसे चिट्ठी पढ़कर भी सुनाया। कुछ दिन पहले ही विनय ने यह कहते हुए खाना ही छोड़ दिया था कि उसे अपने दोस्त के पास जाना है। इसके बाद डीजी जेल ने उसे समझाया कि ऐसा मत करो।  
पवन गुप्ता: स्टाफ के साथ जेल में ही गाली-गलौज की। कभी कहा कि बैरक से बाहर निकालो। सबसे ज्यादा सेवादार को गाली दी। बार-बार दरवाजे को भी खटखटाए। 
मुकेश सिंह: सबसे शांत रहा। किसी से कुछ नहीं बोला। जेल अधिकारियों के मुताबिक, मुकेश मानसिक तौर पर तैयार लगा। उसने मान लिया कि फांसी होना तय है। इसलिए हमेशा बस चुपचाप देखता रहता था।
अक्षय ठाकुर: इसे लग रहा था कि फांसी टल सकती है, इसलिए बेचैन था। जब पता चला कि पत्नी ने तलाक के लिए अर्जी लगाई, तब खुश दिखा। जेल स्टाफ और वकील से बार-बार खबर लेता रहता था। 


जेल नंबर-3 में थे चारों दुष्कर्मी, चार अलग-अलग कमरों में बंद रहे
चारों दुष्कर्मी जेल नंबर-3 में वार्ड-8 के ए-ब्लॉक में बंद थे। यहां 10 कमरे हैं। इनमें से छह खाली हैं। चारों अलग-अलग कमरों में रखे गए। इनके कमरों में बाहर से सिर्फ हल्की धूप आती है। दिन में एक बार एक-एक घंटे के लिए बाहर निकाले जाते थे। इस दौरान एक-दूसरे से बात करते थे। हालांकि, जहां बातचीत करते हैं, वहां इनके बीच जाली लगी हुई है। इस दौरान इनके साथ जेल कर्मी भी रहते थे। वे कई बार कहते हैं कि उन्हें एक साथ बैठकर बात करना है। 


जिस वार्ड में ये चारों दुष्कर्मी बंद छे, वहां से फांसी घर सिर्फ 5 मीटर की दूरी
जिस वार्ड में ये चारों दुष्कर्मी बंद थे, वहां से फांसी घर केवल 5 मीटर की दूरी पर है। पहले फांसी घर में दो अलग-अलग चबूतरे थे। अब एक नया चबूतरा बनाया गया है। इसे बनाने में 25 लाख रुपए खर्च हुए हैं। 

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