वेप केयर और \'सांस\' को फोर्ब्स मैग्जीन में जगह मिली, इन्हें सीकर के इंजीनियर ने बनाया

4 वर्ष पहले
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  • पेशे से बेंगलुरू में इंजीनियर नीतेश जांगिड़ को युवा डॉक्टर की तौर पर देखा जा रहा
  • वेप केयर वेंटीलेटर पर रहने वाले मरीजों में वेंटीलेटर एसोसिएटेड निमोनिया नामक बीमारी को रोक सकता है

सीकर (राजेश सिंघल). राजस्थान में सीकर जिले के नीतेश जांगिड़। उम्र 30 साल। फोर्ब्स मैग्जीन में छपने के बाद काफी चर्चा में हैं। वे पेशे से बेंगलुरू में इंजीनियर हैं। लेकिन, इन्हें युवा डॉक्टर के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी वजह है- दो ऐसे आविष्कार, जो जीवन रक्षक हैं। पहला- वेप केयर और दूसरा-\'सांस\'। यह दो उपकरण हैं, जो मरीजों को नया जीवन दे रहे हैं।

 

नीतेश बेंगलुरू में सीओज लैब के को-फाउंडर हैं। पहले इनके आविष्कार को लेकर चर्चा कर लेते हैं। खास बात यह है कि मशीन बिना बिजली के भी इस्तेमाल की जा सकती है। वेप केयर वेंटीलेटर पर रहने वाले मरीजों में वेंटीलेटर एसोसिएटेड निमोनिया नामक बीमारी को रोक सकता है। यह संक्रामक बीमारी है। कितनी खतरनाक है, वह इस आंकड़े से समझ सकते हैं। देश में छह लाख लोगों को यह बीमारी हर साल होती है, जिसकी वजह से 2.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है।

 

पूरी दुनिया में आठ लाख लोग हर साल मर जाते हैं। इन्हें इस मशीन से बचाया जा सकता है। दूसरा उपकरण \'सांस\'- छोटे कस्बों में यह उपकरण बच्चों को नया जीवन दे सकता है। सांस को बनाने में भारत व यूएस सरकार ने मदद की है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इस मशीन को स्टूडेंट्स को दिखाने के लिए भी रखा है। नीतेश ने बताया कि मैंने एक मरीज को वेंटीलेटर पर देखा था। उसके बाद इन्हें बनाने का आइडिया आया।