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नीतीश कुमार को बीजेपी पर संदेह:महाराष्ट्र की तरह उन्हें बेदखल करने का प्लान बना रही पार्टी, पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया

नई दिल्ली2 महीने पहले
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बिहार में सत्‍ताधारी जनता दल यूनाइटेड की गठबंधन में सहयोगी पार्टी से तनातनी बढ़ती जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का डर है। सूत्रों का कहना है कि नीतीश को लगता है कि पार्टी उन्हें बेदखल करने में जुटी है। उन्हें लग रहा है कि बिहार में भी महाराष्ट्र की तर्ज पर काम चल रहा है। यही वजह है कि रविवार को वे नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हुए। यही नहीं नीतीश कुमार ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। हाल ही में महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिरी है। वहीं उनकी ही पार्टी के बागी नेता एकनाथ शिंदे अब राज्य के मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी के साथ मिलकर काम करते हुए एकनाथ शिंदे ने शिवसेना ने बड़े विद्रोह की अगुवाई की, फिर अल्पमत में उद्धव ठाकरे को पद से इस्तीफा देना पड़ा। उद्धव अब सुप्रीम कोर्ट में अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह बचाने के लिए लड़ रहे हैं।

नीतीश और उद्धव का भाजपा से पुराना रिश्ता
नीतीश कुमार भी उद्धव ठाकरे की तरह क्षेत्रीय नेता हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी लंबे समय से भाजपा के साथ गठबंधन में थी। ठीक उसी तरह नीतीश की पार्टी का भी बीजेपी से पुराना रिश्ता है। उन्‍होंने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन के लिए बीजेपी को छोड़ा है।

दोनों पार्टियों में अंतर सिर्फ इतना है कि नीतीश जहां विपक्षी पार्टियों को छोड़कर 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ वापस लौट आए। वहीं, उद्धव ने कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के साथ गठजोड़ के लिए बीजेपी का साथ छोड़ा दिया।

बिहार में महाराष्ट्र वाला प्लान दोहरा रही भाजपा
अब नीतीश भी अपना अस्तित्व बचाने के लिए बीजेपी के हमले का सामना कर रहे हैं। नीतीश का कहना है कि महाराष्ट्र में जो हुआ, वह भाजपा की योजना थी। बिहार सीएम को लगता है कि सहयोगियों के खिलाफ बीजेपी की रणनीति का वह शिकार बन रही है।

अमित शाह की शह है जिन्‍होंने करीबियों को उनकी संयुक्‍त सरकार के खिलाफ खड़ा किया है। यह साजिश हो या न हो लेकिन यही वजह है कि नीतीश कुमार ने अपनी ही पार्टी जेडीयू के आरसीपी सिंह को निशाने पर लिया। आरसीपी को नीतीश ने वर्ष 2021 में केंद्र सरकार में जेडी का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए चुना था।