पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • No Corona In The Most Naxal affected Area Of Jharkhand; Hospital Not Started In Begusarai, Bihar, Even After Spending 9 Crores

गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट:झारखंड के सबसे नक्सल प्रभावित इलाके में कोरोना नहीं; बिहार के बेगूसराय में 9 करोड़ खर्च होने के बाद भी अस्पताल शुरू नहीं हुआ

एक महीने पहले

गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट की सीरीज के तहत भास्कर शुक्रवार को झारखंड के उस सबसे नक्सल प्रभावित इलाके में पहुंचा, जहां न प्रशासन पहुंच पाता है, न शहर से कोई व्यक्ति वहां जाता है। यहां 150 घरों में कोरोना का कोई मामला नहीं है क्योंकि यहां रहने वाले लोग बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं।

उधर, बिहार के बेगूसराय में प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इलाकों में अब तक वैक्सीन नहीं पहुंच पाई है। यहां 9 करोड़ खर्च कर एक अस्पताल तो बना, लेकिन कभी शुरू नहीं हो पाया। पढ़ें, बिहार और झारखंड के गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट...

1. लोग घरों से बाहर सोते हैं, जड़ी-बूटियों से अपना इलाज करते हैं
- चतरा जिले से पंकज त्रिपाठी और कुंदन कुमार की रिपोर्ट

झारखंड का चतरा जिला। पहाड़ों, जंगलों और हरी-भरी वादियां। इटखोरी का भद्रकाली मंदिर, मौर्यवंश के अवशेष और बौद्ध धर्म की पुरानी प्रतिमाएं। यहीं यहां की पहचान है। पर अब यह जिला देश के सबसे नक्सलवाद प्रभावित इलाके और अफीम की खेती के लिए जाना जाने लगा है।

पहाड़ों पर बसे गांवों तक पहुंचना मुश्किल है। प्रशासन यहां जाता नहीं, चरमपंथियों की यहां चलती है। शहरों से कम संपर्क इन्हें कोरोना से बचाए हुए है। यही कारण है कि जिले में कोरोना का संक्रमण मुख्यालयों तक सीमित है। गांवों में कोई बीमार नहीं। लोग घरों से बाहर सोते हैं, पारंपरिक जड़ी-बूटियों से इलाज करते हैं, खूब मेहनत करते हैं। सेहतमंद हैं।

कई गांव के आदिवासी तो कोरोना जानते ही नहीं। कुंदा प्रखंड के एकता गांव निवासी नागेश्वर गंझू अपनी पत्नी को साइकिल पर बैठाकर इलाज के लिए प्रखंड मुख्यालय ले जाते मिले। वे बताते हैं कि पत्नी बूढ़ी हो गई है। शरीर में बहुत दर्द था तो इलाज के लिए प्रखंड मुख्यालय ले जा रहे हैं। गांव के सभी लोग ऐसे ही जाते हैं। कोरोना कहीं नहीं है।

2011 की जनगणना के मुताबिक, 10.42 लाख लोगों की आबादी वाले इस जिले में 12 प्रखंड, 154 पंचायत और 1474 गांव हैं। ज्यादातर गांव पहाड़ों की तलहटी में बसे हैं। यहां लंबे समय तक जंगल की सरकार चलती रही है, अब नक्सलवाद पर कुछ अंकुश लगा है। लॉकडाउन में भी पुलिस दिन-रात जंगलों की खाक छान रही है ताकि बीमार होने पर इलाज के लिए अगर उग्रवादी जंगल से बाहर आएं तो उन्हें तत्काल पकड़ा जाए।

जिले में सीआरपीएफ और पुलिस का नक्सलियों के खिलाफ कॉम्बिंग ऑपरेशन चल रहा है।
जिले में सीआरपीएफ और पुलिस का नक्सलियों के खिलाफ कॉम्बिंग ऑपरेशन चल रहा है।

दबिश का असर भी हुआ है पिछले तीन माह में कई बड़े उग्रवादियों ने सरेंडर किया। इनमें पंद्रह लाख का इनामी एरिया कमांडर मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, पांच लाख का इनामी बैरियाचक गांव का नागेश्वर ऊर्फ तरुण गंझू शामिल है।

लोग कहीं बाहर नहीं जाते, किसी को नहीं है कोई संक्रमण
जबड़ा पंचायत के उप मुखिया लालदेव कुमार शाव ने बताया कि सरिया टांडा आदिवासी टोला के लोग ना तो कहीं बाहर जाते हैं और ना ही बाहर के लोग यहां आते हैं। लगभग सौ घरों की आबादी वाले इस टोला में सभी लोग स्वस्थ हैं। यहां लोग अपने-अपने घरों के बाहर सोते हैं। किसी प्रकार की कोई परेशानी होने पर जड़ी-बूटी खाते हैं।

वे कहते हैं कि यहां के लोग मलेरिया और बुखार के लिए चिरायता, हड़जोड़, गिलोय, कोरकोरो का छाल, पपीता का पत्ता, नीम का पत्ता, पेट खराब होने पर बेल जैसे पौधों और जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करते हैं। नवादा माचा, संदली, हाकार खाप, उटीर गनिया जैसे गांवों में भी लोग ऐसे ही रह रहे हैं।

तबीयत बिगड़ी तो रिक्शे से 60 किलोमीटर दूर जाने की ठानी
बालूमाथ से चतरा की ओर जा रहे एक युवक की अचानक तबीयत खराब होने पर उसे चक्कर आने लगा। सांस लेने में मुश्किल होने लगी। लॉकडाउन के चलते कोई गाड़ी नहीं मिल रही थी। ऐसे में एक रिक्शेवाले ने उसकी मदद की। उसके पास जितने भी पैसे थे, रिक्शे वाले को दिए। वहां से 60 किलोमीटर दूर डोभी में अपना घर बताते हुए वहां पहुंचा देने की बात कही।

लॉकडाउन के चलते कोई गाड़ी नहीं मिल रही थी। रिक्शेवाले ने की मदद।
लॉकडाउन के चलते कोई गाड़ी नहीं मिल रही थी। रिक्शेवाले ने की मदद।

सत्यनारायण दास नाम के रिक्शा वाले ने बीमार युवक की बात मानकर उसे बैठाया और 60 किलोमीटर का सफर शुरू कर दिया। पूछे जाने पर गुमला बाजार टोली निवासी सत्यनारायण ने बताया कि यह युवक अभी कुछ बात करने की स्थिति में नहीं है। उसने डोभी पहुंचाने को कहा है। फिलहाल उसकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब है। रास्ते में कहीं कोई अस्पताल मिलेगा तो वहां इलाज करवा देंगे।

2. नब्बे हजार की आबादी के लिए 9 करोड़ खर्च, पर इलाज के लिए जाना पड़ता है 13 किमी दूर
- बेगूसराय से कमल किशोर विनीत और अभिषेक मिश्र की
रिपोर्ट

बेगूसराय का मंझौल और जयमंगलागढ़। हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इलाका। जब भास्कर ने मंझौल के रहने वाले पुष्पराज से पूछा तो उन्होंने बताया कि हमारा इलाका चारों तरफ से पेड़ों से घिरा है। यहां कई ऐसे बरगद और पीपल के पेड़ हैं जो सौ-सौ साल पुराने हैं। इसलिए हम लोगों को ऑक्सीजन की कभी कमी नहीं होती है। यही कारण है कि पूरे बेगूसराय में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैला, लेकिन हमारे अनुमंडल में यह पांव नहीं पसार सका।

हालांकि, यहां बीते दो माह में 20 लोगों की मौत हुई है। इनमें पांच लोग कोरोना संक्रमित थे। 15 अन्य की जांच नहीं हुई, लेकिन उनमें लक्षण जरूर दिखे।

जयमंगलागढ़ के पास मिले पूर्व पंचायत समिति सदस्य रामनरेश सदा बताते हैं कि मंझौल में कोरोना का खतरा कम रहने के कई कारण रहे। हमारा इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरा-पूरा है।

अस्पताल स्थानीय लोगों के रहने का ठिकाना बना
अनुमंडल में आम लोगों के इलाज के लिए सरकार ने नौ करोड़ रुपए की लागत से अस्पताल बनवाया, लेकिन यहां उपकरण, बेड की व्यवस्था नहीं की गई। इस कारण अस्पताल शुरू नहीं हो सका। अब यह इमारत स्थानीय लोगों का आश्रय स्थल बन गई है।

पास के गांव की महिला रामसुंदरी देवी कहती हैं कि हम गरीब लोग यहीं रहते हैं और अपने मवेशियों को बांधते हैं। खाना-पकाना भी हम लोग यहीं करते हैं। मंझौल के एसडीओ ई. मुकेश कुमार कहते हैं कि अनुमंडलीय अस्पताल की जानकारी मुझे नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ही इसकी देखरेख करता है। जिलाधिकारी ने निर्माण पूरा करने के लिए कहा है।

इस बार विधानसभा के बजट सत्र में स्थानीय विधायक राजवंशी महतो और विधान परिषद में रजनीश कुमार के सवाल उठाने पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने 6 महीने में अस्पताल शुरू करने का आश्वासन दिया था।

अब तक नहीं शुरू किया गया है टीकाकरण
मंझौल में संक्रमितों की संख्या कम रहने के कारण जिला प्रशासन ने यहां कोई कोविड केयर सेंटर नहीं बनाया है। जयमंगलागढ़ गांव के टोला सेवक सिकंदर सदा ने बताया कि एक बार कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच की गई थी, लेकिन कोई भी पॉजिटिव मरीज नहीं मिला था। हालांकि, अब तक कैंप लगाकर टीकाकरण शुरू नहीं किया गया है। कुछ लोगों ने बेगूसराय अस्पताल जाकर टीका लगवाया है।

खबरें और भी हैं...