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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अपडेट करने के लिए 3900 करोड़ रु. का फंड, सरकार ने कहा- कोई दस्तावेज नहीं देना होगा

2 वर्ष पहले
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  • 2011 की जनगणना के समय भी एनपीआर के लिए डाटा इकट्ठा किया गया था, 2015 में इसे अपडेट किया गया
  • अब 2021 की जनगणना के लिए आंकड़े जुटाने के दौरान एनपीआर को अपडेट किया जाएगा, अप्रैल, 2020 से शुरुआत होगी

नई दिल्ली. केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) अपडेट करने को मंजूरी दे दी है। एनपीआर अपडेशन के लिए कैबिनेट ने 3900 करोड़ रुपए के फंड आवंटन को भी स्वीकृति दी है। इसमें देश के नागरिकों का डाटा होगा। अगले साल अप्रैल से एनपीआर अपडेट करने का काम शुरु किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि एनपीआर अपडेशन के दौरान व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी को ही सही माना जाएगा, उसे कोई दस्तावेज नहीं देना होगा।

Q&A में एनपीआर से जुड़ी सारी जानकारी:

1. एनपीआर क्या है और किसके लिए है?
एनपीआर देश के सभी स्थानीय निवासियों का ब्यौरा है। देश के हर स्थानीय निवासी को एनपीआर में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। अगर कोई बाहरी (विदेशी) व्यक्ति देश के किसी हिस्से में छह महीने से ज्यादा समय से रह रहा है, तो उसका ब्यौरा भी एनपीआर में दर्ज होगा।

2. क्या पहली बार एनपीआर लाया जा रहा है?
नहीं, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में इसे शुरू किया गया। अब केवल इसे अपडेट किया जा रहा है। 2011 की जनगणना के लिए 2010 में घर-घर जाने के दौरान ही एनपीआर के लिए जानकारी इकठ्ठा की गई थी। इस डाटा को 2015 में घर-घर सर्वे करके अपडेट किया गया था। इस जानकारी का डिजिटलाइजेशन भी किया गया। 

3. किस कानून में एनपीआर का प्रावधान है?
'नागरिकता कानून 1955' और 'नागरिकता पंजीयन व राष्ट्रीय पहचान पत्र आवंटन नियम, 2003' के मुताबिक एनपीआर तैयार किया जाता है। सरकार ने अगस्त में इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी किया था।

4. एनपीआर के लिए आंकड़े कब और कहां से इकठ्ठा किए जाएंगे?
रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस (जनगणना) कमिश्नर के मुताबिक, असम को छोड़कर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से सितंबर 2020 तक घर-घर जाकर लोगों से जानकारी ली जाएगी। इसी दौरान एनपीआर को अपडेट किया जाएगा।

5. एनपीआर, एनआरसी और सीएए में क्या फर्क है?

  • एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर): इसका इस्तेमाल सरकार अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए करती है। लोगों के बायोमेट्रिक डाटा के जरिए योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलती है। अगर कोई बाहरी व्यक्ति देश के किसी हिस्से में छह महीने से ज्यादा समय से रह रहा है, तो उसका ब्योरा भी एनपीआर में दर्ज किया जाता है। एनपीआर में लोगों द्वारा दी गई सूचना को ही सही माना जाता है। यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होता।
  • एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर): इसके जरिए देश में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की पहचान की जाती है। सरकार इसके लिए सूचना जारी करके किसी भी क्षेत्र में रहने वाले लोगों से उनकी पहचान के वैध दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहती है। इन दस्तावेजों का परीक्षण किया जाता है। इसके बाद वैध नागरिकों की सूची प्रकाशित की जाती है। इसमें दावे-आपत्ति का प्रावधान भी होता है। इसके बाद नागरिकता की अंतिम सूची जारी की जाती है। इस सूची में शामिल लोगों को ही राज्य या देश का नागरिक माना जाता है। हाल ही में असम में एनआरसी लागू की गई है।
  • सीएए (नागरिकता संशोधन कानून): नए कानून के तहत पाक, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। जो 31 दिसंबर 2014 से पहले आ गए हैं, उन्हें नागरिकता मिलेगी। उन्हें संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकार हासिल होंगे। सीएए सहित कोई भी कानून इन अधिकारों को नहीं छीन सकता। सीएए से मुस्लिम भी प्रभावित नहीं होंगे। किसी भी देश या धर्म का नागरिक भारत के नागरिकता कानून 1955 की धारा 6 के तहत आवेदन कर सकता है। मौजूदा संशोधन उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करता है।

6. एनपीआर लाने का उद्देश्य क्या है?
एनपीआर का उद्देश्य देश के हर स्थानीय निवासी की पहचान का संपूर्ण डाटाबेस तैयार करना है। इसमें उसका परिचय और बायोमेट्रिक ब्यौरा शामिल रहेगा। सरल शब्दों में यह देश के हर नागरिक की जानकारी को एक जगह इकठ्ठा करने का काम है।
 

7. एनपीआर के मुताबिक स्थानीय निवासी कौन है?
जनसंख्या रजिस्टर में शामिल करने के लिए स्थानीय निवासी का अर्थ किसी स्थान पर 6 महीनों या उससे ज्यादा समय से रह रहा व्यक्ति है। उस स्थान पर अगले 6 महीनों या उससे ज्यादा वक्त तक उसी स्थान पर रहने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को भी स्थानीय निवासी माना जाएगा। इसमें लोगों द्वारा दी गई सूचना को ही दर्ज किया जाएगा।

8. एनपीआर में कौन सी जानकारी ली जाती है?
सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से उनके बारे में जानकारी लेते हैं। हर स्थानीय निवासी से नाम, माता-पिता, लिंग, वैवाहिक स्थिति, पति/पत्नी का नाम, घर के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, जन्मस्थान, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, निवास की अवधि, शैक्षणिक योग्यता, व्यवसाय की जानकारी मांगी जाती है। इसे नोट करके उसकी रसीद भी दी जाती है।