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एनआरसी / फौजियों के गांव के जवान नागरिकता के लिए लड़ रहे, सूची से बाहर हुए लोगों को सरकार कानूनी मदद देगी

NRC Final List Updates: Assam govt to provide legal aid to Fauji Gaon & needy people
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NRC Final List Updates: Assam govt to provide legal aid to Fauji Gaon & needy people

  • फौजी गांव के दिलबर हुसैन सेना में जवान और छोटा भाई सीआईएसएफ में, दोनों एनआरसी में शामिल नहीं
  • असम सरकार जरूरतमंदों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के जरिए सहायता प्रदान करेगी

दैनिक भास्कर

Sep 03, 2019, 01:52 PM IST

दिसपुर. असम में बारपेटा जिले के फौजी गांव (सारुहारिद) में रहने वाले करीब 200 परिवार के 20 लोग भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने सोमवार को बताया कि ज्यादातर जवानों के नाम 31 अगस्त को जारी हुए नेशनल सिटिजन रजिस्टर (एनआरसी) लिस्ट में नहीं आए। अब यह सभी भारतीय नागरिकता पाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, गृह मंत्रालय ने कहा है कि जिन लोगों के नाम सूची में नहीं आए हैं, उन्हें राज्य सरकार कानूनी मदद देगी।

 

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर कहा, ‘‘एनआरसी की आखिरी लिस्ट में शामिल नहीं हुए जरूरत मंद लोगों को राज्य सरकार कानूनी सहायता देगी। सरकार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के जरिए सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक प्रबंध किए हैं।’’

 

 

सेना में जवान दिलबर ने व्यथा बताई
फौजी गांव के दिलबर हुसैन ने कहा कि वह और छोटा भाई मिजानुर अली भारतीय नागरिकता के लिए अयोग्य करार दिए गए। एनआरसी की आखिरी लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। मिजानुर भी सीआईएसएफ में सेवाएं दे रहा है। एनआरसी में नाम नहीं आने से दोनों दुखी हैं। दिलबार ने कहा कि उनका बड़ा भाई शैदुल इस्लाम सेना में सुबेदार है। शैदुल ने करगिल जंग भी लड़ी थी। उसका नाम लिस्ट में आ चुका है।

 

3 करोड़ 11 लाख 21 हजार 4 लोग वैध करार
एनआरसी के स्टेट कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला के मुताबिक, अंतिम सूची से 19 लाख 6 हजार 657 लोग बाहर हैं। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने कोई दावा पेश नहीं किया था। 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार 4 लोगों को वैध करार दिया गया। अगर कोई लिस्ट से सहमत नहीं है तो वह फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है। असम में 33 जिले हैं, इनमें से 9 जिलों में मुस्लिम आबादी आधी से ज्यादा है। बताया जाता है कि इन्हीं जिलों में बीते दशकों से बांग्लादेशियों की घुसपैठ काफी हुई है।

 

असम अकेला राज्य जहां एनआरसी लागू
असम देश का अकेला राज्य है, जहां सिटिजन रजिस्टर है। इस तरह का पहला रजिस्ट्रेशन साल 1951 में किया गया था। 2018 तक 3 साल में राज्य के 3.29 करोड़ लोगों ने नागरिकता साबित करने के लिए 6.5 करोड़ दस्तावेज सरकार को भेजे। ये दस्तावेज करीब 500 ट्रकों के वजन के बराबर थे। इसमें 14 तरह के प्रमाणपत्र थे। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 900 करोड़ रु. खर्च हुए।

 

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