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असम / रिश्वत लेकर नागरिकता रजिस्टर में नाम जोड़े जा रहे, 10 हजार रुपए लेते दो अधिकारी गिरफ्तार



प्रतीकात्मक तस्वीर। प्रतीकात्मक तस्वीर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।प्रतीकात्मक तस्वीर।

  • एंटी-करप्शन ब्यूरो ने दिसपुर से एनआरसी अधिकारी सैयद शाहजहां और राहुल पाराशर को गिरफ्तार किया
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एनआरसी का अंतिम प्रकाशन 31 जुलाई तक होगा

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 01:38 PM IST

दिसपुर. राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में रिश्वत लेकर नाम जोड़ने वाले दो अधिकारियों को एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को सैयद शाहजहां (48) और राहुल पाराशर (27) को 10 हजार रुपए बतौर रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। दोनों को गुवाहाटी स्थित दिसपुर एनआरसी केंद्र नंबर 8 के कार्यालय से दोनों को गिरफ्तार किया।

 

एसीबी के डायरेक्टर ने कहा, ‘सैयद शाहजहां फील्ड लेवल अफसर और राहुल पाराशर असिस्टेंट लोकल रजिस्ट्रार ऑफ सिटिजन रजिस्ट्रेशन के पद पर कार्यरत हैं। दिसपुर जिले की आनंद नगर निवासी कजरी घोष दत्त ने दोनों के खिलाफ शिकायत की थी। महिला के मुताबिक, उसका नाम एनआरसी ड्राफ्ट में नहीं है। शिकायतकर्ता ने जब इन एनआरसी ड्राफ्ट में नाम को शामिल करने के लिए आवेदन दिया, तो अधिकारियों 10 हजार रुपए बतौर रिश्वत मांगे थे।’

 

महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए

डायरेक्टर ने कहा, ‘आरोपियों के पास से रुपए और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर लिए हैं। एनआरसी सेवा केंद्र पर भी जांच की जा रही है। दोनों आरोपियों ने महिला के आवेदन में कुछ गलतियां निकाली थीं। इन गलतियों को दूर करने के एवज में दोनों ने महिला से 10 हजार रुपए की मांग की थी। फिलहाल, दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।’

 

दो राज्यों में हुआ था हंगामा
पिछले साल जुलाई में एनआरसी की सूची आने के बाद 40 लाख लोगों की नागरिकता पर खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद पूर्वोत्तर के दो राज्य पश्चिम बंगाल और असम में खासा राजनीतिक हंगामा हुआ था। तब एनआरसी में 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे, जबकि इसके लिए 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन दिया था।

 

एनआरसी का अंतिम प्रकाशन 31 जुलाई तक होगा
सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को सुनवाई करते हुए एनआरसी की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि एनआरसी का अंतिम प्रकाशन 31 जुलाई तक हो जाना चाहिए। सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एनएफ नरीमन की बेंच ने एनआरसी से छूट गए लोगों की नागरिकता के दावे को ‘वंशावली’ और भूमि के रिकार्ड के आधार पर फिर शामिल करने पर कहा था।

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