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मुहिम / मिट्‌टी और शिरामिक से बने बच्चियों के चेहरों पर उकेरी कन्या भ्रूण की तकलीफ



ceramic and clay figures, some broken and some glazed, Odia artist Biswajita Moharana sculpts
कलाकृतियां। कलाकृतियां।
ceramic and clay figures, some broken and some glazed, Odia artist Biswajita Moharana sculpts
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ceramic and clay figures, some broken and some glazed, Odia artist Biswajita Moharana sculpts
कलाकृतियां।कलाकृतियां।
ceramic and clay figures, some broken and some glazed, Odia artist Biswajita Moharana sculpts
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  • ओडिशा की कलाकार बिश्वजीत मोहराणा भ्रूण हत्या के खिलाफ और बेटी बचाने के लिए लोगों को कर रहीं जागरूक
  • इनका दावा है कि नवजात बच्चियों के चेहरे वाली कलाकृतियां लोगों पर मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक असर छोड़ती हैं

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2019, 07:01 PM IST

भुवनेश्वर. ओडिशा की कलाकार बिश्वजीत मोहराणा कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लोगों को जागरुक कर रही हैं। वे मिट्‌टी और शिरामिक से नवजात बच्चियों के चेहरे बनातीं हैं। फिर उन पर रंगों से भ्रूण को हुई तकलीफों को उकेरती हैं। इनका दावा है कि कलाकृतियां लोगों पर मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक असर छोड़ती हैं। इसलिए मैंने इस माध्यम को चुना।

गड्‌ढे में कन्याओं के भ्रूण मिलने की घटना ने आहत किया था

  1. बिश्वजीत मानती हैं, बेटी जिंदगी में प्यार और उम्मीद का तोहफा है। फिर भी बेटियों को गर्भ में या फिर जन्म के बाद मारकर मेडिकल वेस्ट बनाया जा रहा है। वह बताती हैं कि 2007 में एक गड्‌ढे में 60 कन्याओं के भ्रूण पाए गए थे। इस खबर ने मुझे इस बुराई के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा दी।

     

    आर्ट

     

  2. पिछले साल उन्होंने भुवनेश्वर आर्टिस्ट एसोसिएशन की प्रदर्शनी में भी भाग लिया था। उन्होंने अपने प्रोजेक्ट का नाम लक्ष्मी की अनकही कहानी (द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ लक्ष्मी) रखा, जो काफी चर्चित भी हुआ। बिश्वजीत के मुताबिक, देश में भले ही लक्ष्मी की पूजा होती हो, लेकिन वह सुरक्षित नहीं है। एक लड़की जो आने वाले समय में सभ्यता की धुरी बनती हैं, उसे गर्भ में मारा जा रहा है।

  3. विश्व भारती विश्वविद्यालय से पास आउट 35 साल की बिश्वजीत का मानना है, "मेरे काम का पूरा फोकस गर्भ में लिंग जांचकर बेटियों की हत्या रोकने को लेकर है। चूंकि कला का प्रभाव सीधे लोगों पर और जल्दी पड़ता है। इसलिए मैंने यह माध्यम चुना है।"  वह कई शहरों में सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सम्मानित हो चुकी हैं।

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