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नई दिल्ली. आठ विपक्षी पार्टियों ने सोमवार को केंद्र से मांग की कि जम्मू-कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को तत्काल रिहा किया जाए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं कि इन लोगों की गतिविधियों ने राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला हो। विपक्ष ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक असहमति का मुंह बंद किया जा रहा है। 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद फारूक, उमर और महबूबा को हिरासत में हैं।
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी, जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई लीडर डी राजा, राजद के मनोज कुमार झा और पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने बयान जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को रिहा करने की मांग की।
मौलिक अधिकारों पर हमले बढ़ रहे हैं- विपक्ष
विपक्षी ने कहा- लोकतांत्रिक मानदंडों, नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता पर हमले बढ़ रहे हैं। नतीजतन असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की आवाज दबाई जा रही है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे लगे कि तीनों मुख्यमंत्री जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हों या उन्होंने अपनी गतिविधियों से राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला हो।
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