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निर्भया केस / सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ का सवाल- क्या दोषियों को फांसी पर लटकाने से ऐसे अपराध रुक जाएंगे?

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के राज्यसभा में नॉमिनेशन पर भी सवाल उठा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के राज्यसभा में नॉमिनेशन पर भी सवाल उठा चुके हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के राज्यसभा में नॉमिनेशन पर भी सवाल उठा चुके हैं।सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के राज्यसभा में नॉमिनेशन पर भी सवाल उठा चुके हैं।

  • 20 मार्च को चारों दोषियों को दी जानी है फांसी, तीन दोषी आईसीजे गए, एक की पत्नी ने तलाक की अर्जी दाखिल की
  • सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ने कहा- फांसी के बाद लोग अपराध के बारे में भूल जाते हैं

दैनिक भास्कर

Mar 19, 2020, 11:02 AM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ ने निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा पर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस कुरियन ने बुधवार को पूछा कि इन दोषियों को फांसी पर लटकाने से क्या इस तरह के अपराध कम हो जाएंगे? उन्होंने कहा कि ऐस दोषियों को हमेशा के लिए जेल भेज देना चाहिए। इस तरह से समाज को बताया जा सकता है कि अगर कोई भी इस तरह के अपराधों में लिप्त होता है तो वह हमेशा के लिए सलाखों के पीछे होगा। उन्होंने कहा कि फांसी दे देने पर लोग अपराध को भूल जाएंगे।

जस्टिस कुरियन ने बचन सिंह मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि फांसी की सजा तभी दी जाए, जब मामला काफी दुर्लभतम हो और सजा देने का कोई दूसरा विकल्प न बचा हो।

रंजन गोगोई के राज्यसभा नामांकन पर भी सवाल उठाया था
जस्टिस कुरियन जोसेफ ने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के राज्यसभा में नामांकन पर भी हैरानी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि वे हैरान हैं कि जिस जज ने कभी न्यायपालिका की निष्पक्षता और आजादी के लिए ऐसा साहस दिखाया था, उन्होंने ही आजादी के सिद्धांत से समझौता कर लिया। उन्होंने कहा था कि राज्यसभा नॉमिनेशन स्वीकार करके पूर्व सीजेआई ने न्यायपालिका की आजादी पर आम आदमी के यकीन को हिला दिया है और यह आजादी ही भारत के संविधान के मूल में हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना से लोगों के बीच ऐसी धारणा बन रही है कि न्यायपालिका में मौजूद न्यायाधीशों का एक धड़ा या तो निष्पक्ष नहीं रह गया है, या फिर भविष्य की योजनाओं पर काम कर रहा है।

फांसी से बचने के लिए निर्भया के दोषी पैंतरे अपना रहे

निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के दोषी फांसी टालने के लिए लगातार नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। चार दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पत्नी (पुनीता) ने मंगलवार को बिहार के औरंगाबाद जिले की कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। उसने याचिका में कहा- मेरे पति को 20 मार्च को फांसी होने वाली है। मैं विधवा की तरह नहीं जीना चाहती। मेरा पति निर्दोष है। मैं चाहती हूं कि फांसी से पहले कानूनी तौर पर हमारा तलाक हो जाए। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 19 मार्च तक स्थगित कर दी है। दोषी पवन, अक्षय और विनय ने फांसी पर रोक लगाने के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में अपील की है।

20 मार्च को दी जानी है फांसी 
तिहाड़ जेल प्रशासन ने निर्भया के गुनहगारों को फांसी देने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी पवन जल्लाद 17 मार्च को तिहाड़ जेल पहुंचे। फांसी से एक दिन पहले 19 मार्च को डमी को फांसी देकर टेस्टिंग की जाएगी। नए डेथ वॉरंट के मुताबिक, निर्भया के सभी दोषियों को 20 मार्च को सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी है। जेल अधिकारियों ने दोषियों के परिवार को इसकी सूचना दे दी है। मुकेश, पवन और विनय अपने परिजन से मिल चुके हैं। अक्षय के परिवार से अभी तक कोई सदस्य मिलने नहीं आया है। हालांकि, जेल अधिकारियों ने उसके परिवार को चिट्‌ठी लिखकर कहा है कि वे अगर चाहें तो आखिरी बार उससे मिल सकते हैं।
 

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