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फैसला / तेल उत्पादक देश 12 लाख बैरल प्रति दिन उत्पादन घटाएंगे, पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है



OPEC agrees to cut output by 1.2m barrels per day Petrol Price May Hike
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OPEC agrees to cut output by 1.2m barrels per day Petrol Price May Hike

  • ओपेक और सहयोगी देशों की बैठक में उत्पादन घटाने पर सहमति बनी
  • इस फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 5.4% तेजी आई
  • कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने के आसार

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 01:27 PM IST

विएना. कच्चे तेल की गिरती कीमतों को थामने के लिए तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक और उसके सहयोगी देश उत्पादन में कटौती करेंगे। दो दिन तक चली बैठक में शुक्रवार को इस बात पर सहमति बनी कि उत्पादन 12 लाख बैरल प्रति दिन कम किया जाए।

ईरान को उत्पादन घटाने से छूट मिलेगी

  1. ओपेक देश रोजाना 8 लाख बैरल तेल का उत्पादन घटाएंगे। रूस और अन्य सहयोगी देश उत्पादन में 4 लाख बैरल की कटौती करेंगे। साल 2019 के शुरुआती 6 महीने में यह कटौती की जाएगी। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान को प्रोडक्शन कम करने से छूट मिलेगी।

  2. यह कटौती उम्मीद से काफी ज्यादा है, इसीलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें शुक्रवार को 5.4% तक बढ़ गईं। माना जा रहा है कि भारत पर भी इसका असर पड़ेगा। आने वाले दिनों में यहां पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।

  3. भारत अपनी जरूरत का 80% क्रूड इंपोर्ट करता है। इसकी कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियों के लिए आयात महंगा हो जाता है। ओपेक और सहयोगी देश तेल उत्पादन में कटौती भी जनवरी से जून के दौरान करेंगे। इसी बीच देश में आम चुनाव होंगे।

  4. पेट्रोल-डीजल के रेट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार को अक्टूबर में एक्साइज ड्यूटी में 1.5 की कमी करनी पड़ी थी। एक रुपया तेल कंपनियों से कम करने को कहा गया। केंद्र की अपील पर एनडीए शासित 12 राज्यों से भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 2.5 रुपए की कमी की थी।

  5. 2 साल में 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ी
    नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच क्रूड सस्ता होने पर केंद्र सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई। इस दौरान पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 11.77 और डीजल पर ड्यूटी में 13.47 रुपए का इजाफा किया गया। तीन साल में एक्साइज ड्यूटी से केंद्र की कमाई दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से वित्त वर्ष 2014-15 में केंद्र को 99,184 करोड़ रुपए मिले। साल 2017-18 में यह राशि बढ़कर 2.29 लाख करोड़ रुपए हो गई।

  6. क्या है ओपेक ?

    यह 15 देशों का संगठन है। इसमें शामिल देश दुनिया की जरूरत का 44% क्रूड सप्लाई करते हैं। सभी सदस्य देश मिलकर समय-समय पर उत्पादन बढ़ाने या घटाने का फैसला करते हैं। ताकि, कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। कई बार ओपेक पर तेल की कीमतों में जानबूझकर उतार-चढ़ाव लाने के आरोप भी लग चुके हैं।

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