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कांग्रेस के G-23 का शक्ति प्रदर्शन:कांग्रेस को कमजोर बताने वाले नेताओं को सिंघवी की नसीहत- आने वाले चुनावों में पार्टी को मजबूत कर वफादारी दिखाएं

जम्मू2 महीने पहले

कांग्रेस लीडरशिप से नाराज पार्टी के सीनियर लीडर्स ने जम्मू में शांति सम्मेलन का आयोजन किया है। कार्यक्रम में पहुंचे कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस कमजोर हो रही है, हम इसे मजबूत करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। उन्होंने पार्टी की तरफ से गुलाम नबी आजाद के अनुभव का फायदा न लेने की बात भी कही। इसके थोड़ी देर बाद कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने पलटवार किया है। सिंघवी ने कहा कि बेहतर होता अगर ये नेता चार राज्यों (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम) और पुडुचेरी में पहुंचकर कांग्रेस की मदद करते। इन सभी जगहों पर विधानसभा चुनाव होने हैं।

सिंघवी ने कहा, 'वे सभी पार्टी के सम्मानित नेता है। हम उनकी इज्जत करते हैं। एक नेता (कपिल सिब्बल) ने 'यूज्ड' शब्द का इस्तेमाल किया। जिन्होंने यह कहा, वे कांग्रेस की परंपरा नहीं जानते। जिनके लिए (गुलाम नबी आजाद) इस शब्द का इस्तेमाल किया गया, वे 7 बार कांग्रेस से सांसद रहे है। सोनिया जी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इंदिरा जी ने केबिनेट में जगह दी।' सिंघवी ने कहा कि गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के महासचिव रहे और देशभर के 20 राज्यों के प्रभारी रहे।

कांग्रेस का G-23 क्या है, यह क्या चाहता है?
कांग्रेस हाईकमान से नाराज इन सीनियर नेताओं को G-23 के नाम से जाना जाता है। इन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में पार्टी को चलाने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। यही नेता शनिवार को जम्मू में इकट्ठे होकर अपनी ताकत दिखा रहे हैं। G-23 से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि नेताओं में हाल ही में राज्यसभा से रिटायर हुए गुलाम नबी आजाद के साथ हुए सलूक को लेकर भी नाराजगी है।

सिब्बल बोले- हम आजाद को संसद से जाने नहीं देना चाहते
सिब्बल ने कहा, 'गुलाम नबी आजाद साहब का असली रोल क्या है? हवाई जहाज को उड़ाने वाला व्यक्ति अनुभवी होता है, लेकिन उसके साथ एक इंजीनियर भी रहता है। इंजीनियर ही इंजन में खराबी का पता लगाकर उसे ठीक करता है। गुलाम नबी जी अनुभवी तो हैं ही, इंजीनियर भी हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं, जो हर राज्य के हर जिले में कांग्रेस की जमीनी हकीकत से वाकिफ हैं। हम उन्हें संसद से जाने नहीं देना चाहते.. मुझे समझ नहीं आता कि कांग्रेस उनके अनुभव का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही?

आजाद ने कहा- संसद के अंदर और बाहर लड़ाई जारी रहेगी
शांति सम्मेलन में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला बयान खुद आजाद का रहा। उन्होंने कहा, 'मैं राज्यसभा से रिटायर हुआ हूं, राजनीति से रिटायर नहीं हुआ और मैं संसद से पहली बार रिटायर नहीं हुआ हूं। आज कई बरसों बाद हम राज्य का हिस्सा नहीं हैं, हमारी पहचान खत्म हो गई है। राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए हमारी संसद के अंदर और बाहर लड़ाई जारी रहेगी। जब तब यहां चुने हुए नुमाइंदे मंत्री और मुख्यमंत्री नहीं होंगे बेरोजगारी, सड़कों और स्कूलों की ये हालत जारी रहेगी।' उनका यह बयान कांग्रेस हाईकमान को सीधी चुनौती माना जा रहा है।'

कांग्रेस को आजाद के मार्गदर्शन की जरूरत: मनीष तिवारी
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि आजाद एक संकल्पित कांग्रेसी नेता हैं। आजाद उन नेताओं में से हैं, जो कांग्रेस को समझते हैं। कांग्रेस और देश दोनों को ही गुलाम नबी आजाद के मार्गदर्शन की जरूरत है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि किसी प्रदेश को बांटकर दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिए गए हों। जम्मू कश्मीर को बांट दिया गया है। हम इसकी लड़ाई लड़ते रहेंगे।

आनंद शर्मा ने कहा- पार्टी की भलाई के लिए आवाज उठा रहे
हम पार्टी की भलाई के लिए आवाज उठा रहे हैं। नई पीढ़ी को पार्टी से कनेक्ट होना चाहिए। हमने कांग्रेस के अच्छे दिन देखे हैं। अब हम अपनी उम्र ढलने के साथ पार्टी को कमजोर होते नहीं देखना चाहते।

राज बब्बर बोले- हमारा ग्रुप G-23 नहीं, गांधी-23 हैं
कार्यक्रम में पहुंचे राज बब्बर ने कहा, 'लोग हमें G-23 कहते हैं, लेकिन मैं इसे गांधी-23 कहता हूं। इस देश के कानून और संविधान को महात्मा गांधी की विचारधारा, संकल्प और सोच के मुताबिक बनाया गया था। कांग्रेस इसे पूरी ताकत से आगे ले जाने के लिए तैयार है। G-23 चाहता है कि कांग्रेस मजबूत बने।

कांग्रेस के कई राज्यों के दिग्गज नेता G-23 में शामिल
इन नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, कपिल सिब्बल, राज बब्बर, विवेक तन्खा, गुलाम नबी आजाद शामिल हैं। ये सभी नेता शनिवार को एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसमें मनीष तिवारी के भी पहुंचने की संभावना है। ये सभी नेता उत्तर भारत के हैं।

शुक्रवार की देर शाम G-23 ग्रुप के कई नेता जम्मू पहुंच गए थे।
शुक्रवार की देर शाम G-23 ग्रुप के कई नेता जम्मू पहुंच गए थे।

सोनिया को चिट्ठी लिख पार्टी में सुधार की मांग की थी
पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में G-23 नेताओं ने पार्टी में तुरंत सुधार करने की मांग की थी। इनमें जमीनी स्तर से लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) तक संगठन के चुनाव कराने की मांग की गई थी। आज एक बार फिर ये सभी नेता गांधी परिवार के खिलाफ एक साथ जमा हो रहे हैं। नेताओं का विरोध गांधी परिवार के उन करीबी लोगों से भी है, जो पार्टी संगठन और संसद में अहम पोजिशन पर बैठे हैं।

राहुल को सख्त मैसेज- उत्तर से दक्षिण तक भारत एक
केरल में राहुल गांधी के नॉर्थ-साउथ वाले बयान के बाद कांग्रेस के उत्तर भारतीय नेता नाराज हैं। G-23 से जुड़े एक सीनियर लीडर ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी में इस समय जो कुछ चल रहा है, वह पिछले साल दिसंबर में हुई पार्टी की वर्किंग कमेटी के फैसले के एकदम उलट है। पार्टी में अब तक कोई चुनाव या सुधार नजर नहीं आए हैं।' एक अन्य नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'यह राहुल गांधी के लिए सीधा मैसेज है। हम देश को दिखाना चाहते हैं कि उत्तर से दक्षिण तक भारत एक है।'

आजाद की जगह वाड्रा के वकील को राज्यसभा भेजा
गुलाम नबी आजाद को कांग्रेस ने राज्यसभा में दूसरा मौका नहीं दिया था। ग्रुप से जुड़े एक नेता ने कहा, 'जब दूसरी पार्टियों के नेता आजाद के लिए सीट छोड़ रहे थे, तब हमारी कांग्रेस पार्टी की लीडरशिप ने उनके प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाया। उनकी जगह रॉबर्ट वाड्रा के केस लड़ने वाले वकील को राज्यसभा भेज दिया गया।

राहुल के केरल में दिए किस बयान पर बवाल मचा था
राहुल ने मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में कहा था कि पहले 15 साल मैं उत्तर भारत से एक सांसद था। मुझे एक अलग प्रकार की राजनीति की आदत थी। मेरे लिए केरल आना बहुत रिफ्रेशिंग था, क्योंकि मुझे अचानक पता चला कि यहां के लोग मुद्दों में रुचि रखते हैं और न केवल सतही रूप से बल्कि मुद्दों के बारे में विस्तार से जानकारी भी रखते हैं। राहुल के इस बयान ने उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत की बहस छेड़ दी।

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