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7 साल बाद सोनिया से एक साथ मिले लालू-नीतीश:कहा- भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता जरूरी, 17 अक्टूबर के बाद फिर मिलेंगे

नई दिल्ली/ हिसार2 महीने पहले
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात के बाद लालू और नीतीश।

बिहार के CM नीतीश कुमार और RJD चीफ लालू यादव ने रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। मुलाकात के बाद नीतीश ने कहा कि हम देश में कई दलों को एकजुट करना चाहते हैं। सोनिया गांधी ने 17 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद फिर से मिलने के लिए कहा है।

वहीं, लालू ने कहा कि हमें बीजेपी को हटाना है और देश को बचाना है। जिस तरह से हमने बिहार में BJP को हटाया था, उसी तरह से हम सभी को एक साथ आना होगा। लालू-नीतीश की सोनिया से मुलाकात 7 साल बाद हुई है। अगस्त 2015 में पटना के गांधी मैदान में JDU, RJD और कांग्रेस महागठबंधन ने स्वाभिमान रैली में आयोजित की थी, जिसमें तीनों नेता एक मंच पर दिखे थे।

यह तस्वीर 30 अगस्त 2015 की है। पटना के गांधी मैदान में महागठबंधन की स्वाभिमान रैली के मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, नीतीश कुमार और लालू यादव।
यह तस्वीर 30 अगस्त 2015 की है। पटना के गांधी मैदान में महागठबंधन की स्वाभिमान रैली के मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, नीतीश कुमार और लालू यादव।

मोदी के खिलाफ एकजुट नहीं हो पाया विपक्ष, 10 राज्यों के 17 नेताओं को आना था, 5 ही पहुंचे
इससे पहले, रविवार देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की 109 वीं जयंती पर हरियाणा के फतेहाबाद में 'सम्मान दिवस रैली' हुई। रैली के लिए इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल) प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला ने नीतीश कुमार सहित 10 राज्यों के 17 नेताओं को निमंत्रण दिया था, लेकिन मंच पर 5 बड़े नेता ही दिखे। इनमें नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, NCP चीफ शरद पवार, SAD नेता सुखबीर सिंह बादल और CPI(M) महासचिव सीताराम येचुरी शामिल थे।

इनेलो की रैली में नीतीश कुमार ने कांग्रेस सहित सभी दलों से एक साथ आने की अपील की। नीतीश ने कहा कि ऐसा होने के बाद BJP को 2024 के लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलेगी। वहीं, तेजस्वी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा कि अब NDA कहां है? शिवसेना, अकाली दल, JDU जैसे भाजपा सहयोगियों ने लोकतंत्र बचाने के लिए इसे छोड़ दिया है।

इधर, सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह नया गठबंधन बनाने के लिए साथ आने का समय है। बादल ने आगे कहा कि SAD, शिवसेना और JDU ही असली NDA है, क्योंकि हमने इसकी स्थापना की थी। वहीं, शरद पवार ने कहा कि अब 2024 में सरकार बदलने का समय आ गया है।

ओम प्रकाश चौटाला से मुलाकात की वजह

नीतीश कुमार सितंबर की शुरुआत में गुरुग्राम में चौटाला के आवास पर पहुंचे थे।
नीतीश कुमार सितंबर की शुरुआत में गुरुग्राम में चौटाला के आवास पर पहुंचे थे।

नीतीश ने शिक्षक भर्ती घोटाले में सजा काटकर जेल से बाहर आए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला से इसी महीने मुलाकात की थी। चौटाला की पार्टी इनेलो हरियाणा की क्षेत्रीय पार्टी है, जहां लोकसभा की 10 सीटे हैं। चौटाला की गिनती बड़े जाट नेताओं में होती है। हरियाणा के साथ-साथ पश्चिमी यूपी की भी 5 से ज्यादा सीटों पर जाट वोटर्स का असर है।

कांग्रेस का साथ सबसे अहम

नीतीश कुमार ने 5 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। दोनों के बीच करीब 1 घंटे तक बातचीत चली थी।
नीतीश कुमार ने 5 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। दोनों के बीच करीब 1 घंटे तक बातचीत चली थी।

नीतीश कुमार ने इस महीने दिल्ली दौरे पर सबसे पहले राहुल गांधी से मुलाकात की थी। कांग्रेस वर्तमान में लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। 2019 में कांग्रेस को 52 सीटों पर जीत मिली, जबकि 210 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही। यानी कुल 262 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस भाजपा से सीधे मुकाबले में थी।

अमित शाह ने बिहार में चुनावी बिगुल फूंका

23 सितंबर को बिहार के पूर्णिया में रैली करने के बाद देर शाम अमित शाह ने विधानमंडल दल के सभी नेताओं के साथ मीटिंग की। यह मीटिंग करीब 1 घंटे चली।
23 सितंबर को बिहार के पूर्णिया में रैली करने के बाद देर शाम अमित शाह ने विधानमंडल दल के सभी नेताओं के साथ मीटिंग की। यह मीटिंग करीब 1 घंटे चली।

नीतीश विपक्ष को एकजुट करने में जुटे हैं। उधर, अमित शाह ने दो दिन पहले ही बिहार का दौरा कर चुनावी बिगुल फूंक दिया। पूर्णिया जिले में एक रैली मे शाह ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार की जनता लालू-नीतीश की जोड़ी का सफाया कर देगी। 2025 में भी भाजपा पूर्ण बहुमत से बिहार में सरकार बनाएगी।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए नीतीश RJD और कांग्रेस की गोदी में बैठ गए। नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नाडिस के साथ भी धोखा किया। मांझी के साथ धोखा किया। अब BJP को धोखा देकर लालू के पास चले गए। ये धोखा मोदी जी के साथ नहीं हुआ है। बिहार की जनता के साथ हुआ है।

500 से ज्यादा सीटों पर सीधी लड़ाई की तैयारी, दक्षिण से उत्तर तक घेराबंदी
नीतीश अगर विपक्ष को एकजुट करने में सफल रहते हैं और सभी दल एकजुट हो गए तो आगामी लोकसभा चुनाव में 500 से ज्यादा सीटों पर भाजपा से सीधी लड़ाई होगी। जिन दलों से नीतीश संपर्क साध रहे हैं, वे सभी दल दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक प्रभावी हैं।

रूरल एरिया पर ज्यादा फोकस, रणनीति सफल रही तो भाजपा को नुकसान संभव

देश के रूरल एरिया में लोकसभा की कुल 353 सीटें हैं, जिसमें 2019 में भाजपा को 207 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं कांग्रेस और अन्य के खाते में 126 सीटें गई थीं। सूत्रों के मुताबिक नीतीश और गठबंधन का पूरा फोकस इन रूरल एरिया पर है। यहां पर 2014 और 2009 के मुकाबले भाजपा सबसे ज्यादा कमजोर थी।

2009 में भाजपा को रूरल एरिया में सिर्फ 77 सीटों पर जीत मिली थी। जो 2014 में बढ़कर 190 और 2019 में 207 पर पहुंच गई। वहीं सेमी अर्बन की बात करें तो यहां 2009 में भाजपा को 20 सीटें मिली थीं, जबकि 2014 में यह बढ़कर 53 और 2019 में 58 पर पहुंच गई।

हाइली अर्बन यानी उच्च शहरी एरिया की बात करे तो यहां 2009 में भाजपा के पास 20 सीटें थीं, जो 2014 और 2019 में बढ़कर 40-40 सीटों पर पहुंच गई।