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सदन का हंगामा सड़क पर लाया विपक्ष:राहुल बोले- राज्यसभा में पहली बार सांसदों को पीटा गया, शिवसेना ने कहा- लगा कि हम पाकिस्तान बॉर्डर पर हैं

नई दिल्ली9 महीने पहले

राज्यसभा में बुधवार को हुए हंगामे के अगले दिन गुरुवार को 15 विपक्षी दलों ने संसद से विजय चौक तक पैदल मार्च निकाला। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में पहली बार सांसदों को पीटा गया। उनसे धक्का-मुक्की की गई। विपक्ष की आवाज नहीं सुनी गई। वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। महिला सांसदों के साथ जो बर्ताव हुआ, वह लोकतंत्र के खिलाफ है। ऐसा लगा जैसे हम पाकिस्तान सीमा पर खड़े हैं।

पूरे मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में पेगासस और कृषि कानूनों के मुद्दे पर हंगामा होता रहा। अब सदन के बाद सड़क पर उतरकर विपक्ष ने सरकार पर लोकतंत्र की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया है।

सदन में हंगामे पर किस पार्टी ने क्या कहा
कांग्रेस: राहुल गांधी ने कहा- मानसून सेशन खत्म हो गया है। हमने पेगासस का मुद्दा उठाया। सरकार से कहा कि इस पर बहस की जाए, पर सरकार ने डिबेट से मना कर दिया। हमें संसद में नहीं बोलने दिया गया। देश के 60% लोगों की आवाज नहीं सुनी गई। संसद में हमें नहीं सुना गया इसलिए हम लोग यहां आए हैं। राज्यसभा में पहली बार सांसदों की पिटाई की गई। उनसे धक्का-मुक्की की गई। प्रधानमंत्री मोदी देश और देश की आत्मा को बेच रहे हैं। गरीबों, दलितों, किसानों और कामगारों की आवाज से उठा तूफान उन्हें सत्ता से बाहर कर देगा।

विपक्ष के नेताओं ने गुरुवार को राज्यसभा अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू से मुलाकात की। इस दौरान सभी विपक्षी नेताओं ने एक दिन पहले संसद में हुई घटना का मुद्दा उठाया।
विपक्ष के नेताओं ने गुरुवार को राज्यसभा अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू से मुलाकात की। इस दौरान सभी विपक्षी नेताओं ने एक दिन पहले संसद में हुई घटना का मुद्दा उठाया।

NCP: प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि संसद का सत्र शर्मनाक रहा है। शरद पवार ने राज्यसभा की प्रोसीडिंग पर कहा है कि उन्होंने अपने संसदीय जीवन में इस तरह की शर्मनाक घटनाओं को कभी नहीं देखा है।

समाजवादी पार्टी: विशंभर निषाद ने कहा कि संसद में मार्शल लगाए गए, महिला सांसदों से धक्का-मुक्की की गई। विपक्ष पेगासस, किसान बिल और महंगाई पर चर्चा चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं करने दिया गया।

RJD: मनोज झा ने कहा कि हम यहां इसलिए आए हैं, क्योंकि संसद में नहीं बोलने दिया गया। इंश्योरेंस बिल संसद ने नहीं पास किया, मार्शल लॉ ने पास किया है। हम बेरोजगारी, महंगाई का मुद्दा उठाना चाहते थे, लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाया गया।

DMK: सरकार जबरन इंश्योरेंस बिल पास कराना चाह रही थी। संसद की ऐसी तस्वीर कभी नहीं देखी। हमारी महिला सांसदों को घसीटा गया।

मार्च में राहुल गांधी के साथ अधीर रंजन चौधरी और शिवसेना सांसद संजय राउत भी मौजूद थे।
मार्च में राहुल गांधी के साथ अधीर रंजन चौधरी और शिवसेना सांसद संजय राउत भी मौजूद थे।

विपक्ष के आरोपों पर सरकार का जवाब विपक्ष के मार्च के बाद सरकार की ओर से जवाब आया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा- हमने विपक्ष से सहयोग की मांग की थी। बिल पास कराने के लिए भी साथ मांगा था, हम तो चाहते थे कि संसद सोमवार तक चले, पर ऐसा नहीं हुआ। लोकतंत्र की हत्या की बात करने वाले राहुल को देश से माफी मांगनी चाहिए। वो जानते हैं कि उन्होंने क्या किया है। टेबल पर चढ़कर सांसदों ने उपद्रव किया। महिला मार्शलों को चोट पहुंचाई गई। विपक्ष का तो एजेंडा ही यही था कि हंगामा करना है।

2 दिन पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुई कार्रवाई
लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्रवाई 13 अगस्त की बजाय 11 अगस्त को ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में 28% और लोकसभा में 22% कामकाज हुआ। लोकसभा में 96 घंटे में से 74 घंटे बर्बाद हो गए।

सांसदों के बर्ताव से दुखी हुए नायडू
मंगलवार को राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद प्रताप सिंह बाजवा और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह टेबल पर चढ़ गए थे। बाजवा ने रूल बुक चेयर पर फेंक दी थी। यह सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद हुआ। इस व्यवहार से राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर की बेअदबी होने से वे रातभर सो नहीं पाए।

आखिर में संसद चलाने को लेकर मोदी, शाह और सोनिया मिले
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बैठक बुलाई। बिड़ला के कक्ष में हुई इस बैठक का मकसद संसद चलाने के मुद्दे पर एक राय बनाना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी मौजूद रहे। बिड़ला ने कहा था कि जिस ढंग से कुछ सांसदों ने व्यवहार किया, वह ठीक नहीं था। संसद की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। इस बारे में सभी पार्टियों को सोचना चाहिए।

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