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दिल्ली में कोरोना मरीजों की जान पर खतरा:हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने कहा- GTB अस्पताल में केवल 4 घंटे की ऑक्सीजन बची, यहां 500 कोरोना मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं

नई दिल्ली2 महीने पहले

देश की राजधानी में भी ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि कोरोना मरीजों की जान पर बन आई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोशल मीडिया पर मंगलवार रात एक पोस्ट की है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली के GTB अस्पताल में सिर्फ 4 घंटे की सप्लाई के लायक ऑक्सीजन बची है, जबकि हॉस्पिटल में इस समय 500 से ज्यादा कोरोना मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार से अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ अस्पतालों में तो कुछ ही घंटों की ऑक्सीजन बाकी रह गई है। मैं केंद्र सरकार से हाथ जोड़कर गुजारिश करता हूं कि दिल्ली को तुरंत ऑक्सीजन मुहैया कराएं।

केजरीवाल की अपील के साथ ही डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी सोशल मीडिया के जरिए दिल्ली के हालात के बारे में बताया। उन्होंने लिखा कि ऑक्सीजन को लेकर सब अस्पतालों से फोन आ रहे हैं। सप्लाई करने वाले लोगों को अलग-अलग राज्यों में रोक दिया जा रहा है। ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर राज्यों के बीच जंगलराज न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को बेहद संवेदनशील और सक्रिय रहना होगा।

सिसोदिया ने बताया- किस हॉस्पिटल में कितनी ऑक्सीजन बची
सिसोदिया ने 18 अस्पतालों की एक लिस्ट भी साझा की। इसमें 8 प्रमुख सरकारी अस्पताल और 10 निजी अस्पतालों में बची हुई ऑक्सीजन का जिक्र था। लिस्ट कहती है कि मंगलवार शाम 6 बजे की स्थिति के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा अंबेडकर हॉस्पिटल में 24 घंटे की और निजी अस्पतालों में सबसे ज्यादा श्रीअग्रसेन हॉस्पिटल में 48 घंटे की ऑक्सीजन बची है। बाकी अस्पतालों में स्थिति गंभीर है।

ऑक्सीजन की कमी पर हाईकोर्ट भी सख्त
कोरोना के बीच ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इंडस्ट्री ऑक्सीजन सप्लाई के लिए इंतजार कर सकती हैं, कोरोना के मरीज नहीं। इस वक्त इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं। कोरोना टेस्टिंग से जुड़ी एक पिटीशन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि यह सुनने में आया है कि दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते वहां के डॉक्टर्स पर दबाव बनाया जा रहा है कि कोरोना मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन कम कर दी जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि ऐसी कौन सी इंडस्ट्रीज हैं जिन्हें ऑक्सीजन सप्लाई कम नहीं की जा सकती?

सरकार ने कहा- दिल्ली में 4 ऑक्सीजन प्लांट लगाएंगे
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इंडस्ट्रियल परपज के लिए ऑक्सीजन के इस्तेमाल पर 22 अप्रैल से रोक लगा दी गई है, लेकिन कुछ इंडस्ट्रीज को इससे अलग रखा गया है। सरकार ने यह भी बताया कि दिल्ली में मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाने के लिए पीएम केयर्स फंड के जरिए 4 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना है। साथ ही कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों को 1,390 वेंटीलेटर मुहैया करवाए गए हैं।

मेडिकल ऑक्सीजन क्या है?
कानूनी रूप से यह एक आवश्यक दवा है जो 2015 में जारी देश की अति आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है। इसे हेल्थकेयर के तीन लेवल- प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शीयरी​ के लिए आवश्यक करार दिया गया है। यह WHO की भी आवश्यक दवाओं की लिस्ट में शामिल है। प्रोडक्ट लेवल पर मेडिकल ऑक्सीजन का मतलब 98% तक शुद्ध ऑक्सीजन होता है, जिसमें नमी, धूल या दूसरी गैस जैसी अशुद्धि न हों।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक कोरोना महामारी से पहले भारत में रोज मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 1000-1200 मीट्रिक टन थी, यह 15 अप्रैल तक बढ़कर 4,795 मीट्रिक टन हो गई। ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIIGMA) के मुताबिक 12 अप्रैल तक देश में मेडिकल यूज के लिए रोज 3,842 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई हो रही थी।

तेजी से बढ़ी मांग के चलते ऑक्सीजन की सप्लाई में भारी दिक्कत हो रही है। पूरे देश में प्लांट से लिक्विड ऑक्सीजन को डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचाने के लिए केवल 1200 से 1500 क्राइजोनिक टैंकर उपलब्ध हैं। यह महामारी की दूसरी लहर से पहले तक के लिए तो पर्याप्त थे, मगर अब 2 लाख मरीज रोज सामने आने से टैंकर कम पड़ रहे हैं।

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