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राहत की खबर:एक्सपर्ट्स ने कहा- दो हफ्ते तक दूर हो जाएगी ऑक्सीजन की किल्लत; अस्पतालों में स्टोरेज टैंक बनाए तो आगे भी फायदा

6 महीने पहले
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देश में ऑक्सीजन किल्लत है। ऐसे में बीएचईएल के जीएम अनिल वार्शने, ऑल इंडिया इंडस्ट्री गैसेस मैन्युफैक्चरिंग एसो. के सुनील गुप्ता और अन्य एक्सपर्ट से भास्कर ने जानने की कोशिश की कि दिक्कत कब दूर होगी और उपाय क्या है...

देश में ऑक्सीजन की कमी कब तक दूर होगी?
अधिकतम एक से दो हफ्ते में ये समस्या सुलझ जाएगी। टैंकरों और ट्रेन से सप्लाई तेज हो चुकी है, जिससे मांग और आपूर्ति की चेन बराबर चलने लगी है। जिन शहरों के नजदीक औद्योगिक प्लांट हैं वहां की समस्या लगभग दूर होने को है।

जिन शहरों के पास प्लांट हैं किल्लत तो वहां भी है?
वहां ऑक्सीजन की नहीं, सिलेंडर की किल्लत है। लुधियाना में स्टील प्लांट के एमडी सचिन जैन कहते हैं कि हम आसपास के इलाकों में 60% ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं। सप्लाई पाइप लाइन से थी, तो भी उपलब्ध 1,500 सिलेंडर से मदद की जा रही है। जहां प्लांट हैं, वहां शॉर्टेज नहीं है।

अस्पतालों में ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध कैसे होगी?
हर अस्पताल के पास लिक्विड ऑक्सीजन टैंक होना चाहिए, जिससे स्टोरेज की दिक्कत न हो। इसमें लिक्विड ऑक्सीजन को गैस फाॅर्म में बदलने की प्रोसेस पर ही ध्यान देना होगा।

देश में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट कहां हैं?
बेहतर क्षमता वाले ज्यादातर प्लांट गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक में हैं। ये 5-10% ही लिक्विड ऑक्सीजन बनाते हैं जिसे बड़े-बड़े टैंकों में स्टोर करते हैं। इसका उपयोग इमरजेंसी में किया जाता है।

मेडिकल और इंडस्ट्री की ऑक्सीजन में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं। ये एक ही तरह के प्लांट में बनती हैं, टैंक और सिलेंडर में स्टोर होती हैं। मेडिकल ऑक्सीजन के लिए हर बैच को चेक और सर्टिफाई करना होता है। उद्योग के लिए 99.5% शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जबकि मेडिकल ऑक्सीजन के लिए 93% की।

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