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सफर / राजीव सरकार में पहली बार मंत्री बने थे चिदंबरम, कांग्रेस से अलग होना था राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट



पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (फाइल फोटो) पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)
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पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)

  • राजीव सरकार में पहली बार मंत्री बने थे चिदंबरम
  • मतभेदों के बाद 1996 में छोड़ दी थी कांग्रेस
  • अपनी अलग पार्टी भी बना चुके हैं पी. चिदंबरम

Dainik Bhaskar

Aug 22, 2019, 09:05 PM IST

नई दिल्ली. देश के पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी. चिदंबरम अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी मुश्किल में फंसे हुए हैं। आईएनएक्स मीडिया घूस मामले में गुरुवार को विशेष अदालत ने उन्हें 26 अगस्त तक सीबीआई रिमांड पर भेज दिया। उन पर साल 2007 में वित्त मंत्री रहने के दौरान रिश्वत लेकर INX मीडिया हाउस को गलत तरीके से विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) से मंजूरी दिलाने का आरोप है। इसके अलावा अन्य कई मामलों में भी केंद्रीय एजेंसियां उनके खिलाफ जांच कर रही हैं। चिदंबरम के राजनीतिक सफर की बात करें तो वे 1984 में पहली बार सांसद बने थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

औद्योगिक घराने से ताल्लुक रखते हैं चिदंबरम

 

73 साल के हो चुके पी. चिदंबरम का जन्म 16 सितंबर 1945 को तमिलनाडु के शिवगंगा में रहने वाले एक प्रतिष्ठित औद्योगिक परिवार में हुआ था। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज हायर सेकेंड्री स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री ली और फिर MBA करने के लिए हार्वर्ड बिजनेस स्कूल चले गए। वहां से लौटने के बाद उन्होंने पारिवारिक व्यापार से नहीं जुड़ने का फैसला लिया और राजनीति की डगर पकड़ी। साल 1967 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली।

 

1984 में पहली बार बने मंत्री

 

  • 1969 में जब कांग्रेस में टूट हुई तो भी वे इंदिरा गांधी के साथ ही बने रहे। 1984 में शिवगंगा लोकसभा सीट से वे पहली बार सांसद बने और राजीव गांधी सरकार में उन्हें वाणिज्य मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद नरसिम्हाराव सरकार के दौरान भी चिदंबरम को राज्य मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में काम किया। 
  • 1996 में पार्टी के कुछ फैसलों से असहमति होने पर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और 'तमिल मनिला कांग्रेस' को ज्वॉइन कर लिया। ये पार्टी कांग्रेस से टूटकर ही बनी थी। इसके बाद 13 पार्टियों के गठबंधन से बनी संयुक्त मोर्चा सरकार में उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया और इसी दौरान उन्होंने अपना पहला 'ड्रीम बजट' पेश किया था। 
  • इस बजट की खासियत ये थी कि उन्होंने सरकार की आय बढ़ाने के लिए टैक्स आधार को काफी बड़ा कर दिया था। ये बजट उस वक्त आया था, जब गठबंधन सरकार होने की वजह से आर्थिक सुधार को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि 1998 में ये सरकार गिर गई और इसके साथ ही बतौर वित्तमंत्री उनका पहला कार्यकाल भी खत्म हो गया। इसके बाद वे साल 2004 में मनमोहन सिंह के कार्यकाल वित्तमंत्री बनकर लौटे।

 

अपनी अलग पार्टी भी बना चुके हैं चिदंबरम

 

  • साल 2001 में चिदंबरम ने 'तमिल मनिला कांग्रेस' को छोड़कर अपनी नई पार्टी बना ली, जिसका नाम उन्होंने 'कांग्रेस जननायक पेरावाई' रखा। हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर लिया। इसी साल कांग्रेस सत्ता में लौट आई और मनमोहन सरकार में चिदंबरम को दोबारा वित्त मंत्रालय मिल गया।
  • मनमोहन सरकार के पहले कार्यकाल में वे चार साल (2004 से 2008) तक वित्त मंत्री रहे। इसके बाद दिसंबर 2008 में मुंबई आतंकी हमलों के बाद उन्हें गृहमंत्री बना दिया गया, जुलाई 2012 तक उन्होंने ये मंत्रालय संभाला। इसके बाद वे फिर से वित्त मंत्री बने और यूपीए दो सरकार का कार्यकाल खत्म होने तक बने रहे।
  • बतौर वित्तमंत्री चिदंबरम ने अर्थव्यवस्था में आई मंदी, विकास की धीमी रफ्तार, राजकोषीय घाटे को कम करने और अर्थव्यवस्था में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए आर्थिक सुधारों की एक व्यापक श्रृंखला शुरू की, जिसके लिए उनके कार्यकाल को याद किया जाता है।


कांग्रेस छोड़ना बना टर्निंग प्वाइंट

 

  • चिदंबरम के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साल 1996 को माना जाता है, जब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तमिल मनीला कांग्रेस पार्टी को ज्वॉइन किया था। ये पार्टी 1996 में प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व में बनी गठबंधन सरकार का हिस्सा थी।
  • देवेगौड़ा सरकार में चिदंबरम पहली बार वित्त मंत्री बने और 1997 में उन्होंने अपना 'ड्रीम बजट' पेश किया। हालांकि ये सरकार जल्द ही गिर गई। साल 2001 में चिदंबरम ने टीएमसी को छोड़ अपनी खुद की पार्टी बना ली। हालांकि उन्हें इसका विलय कांग्रेस में करना पड़ा।

 

सात साल बाद दोबारा वित्त मंत्री बने

 

  • पहली बार वित्तमंत्री बनने के करीब सात साल बाद साल 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में उन्हें दोबारा वित्त मंत्रालय मिला। लेकिन चार साल बाद फिर उनका मंत्रालय बदल दिया गया।
  • चिदंबरम को उनके प्रशासनिक कौशल के लिए जाना जाता था। साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद शिवराज पाटिल को लेकर लोगों में काफी गुस्सा था, जिसके बाद पाटिल को हटाकर चिदंबरम को गृह मंत्रालय दे दिया गया। साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद चिदंबरम, मनमोहन सरकार में दोबारा केंद्रीय गृहमंत्री बने। साल 2012 तक वित्तमंत्रालय की जिम्मेदारी प्रणब मुखर्जी संभाल रहे थे, लेकिन जब उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया, तो चिदंबरम को एकबार फिर वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई।
  • चिदंबरम तमिलनाडु में अपनी परंपरागत सीट शिवगंगा से चुनाव लड़ते थे और वहां से सात बार चुनाव जीत चुके थे। लेकिन साल 2014 से शिवगंगा सीट से चिदंबरम की जगह उनके बेटे कार्ति चुनाव लड़ने लगे। वहीं चिदंबरम राज्यसभा के रास्ते संसद में आए।

 

सरकार बदलते ही हालात बदल गए

 

  • इसी साल भाजपा को लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली सरकार बनी। नई सरकार के आते ही जांच एजेंसियों ने INX मीडिया, एयरसेल-मैक्सिस डील और यूपीए-दो सरकार के दौरान खरीदे गए विमानों जैसे मामलों में चिदंबरम और उनके परिजनों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू कर दी। 
  • सीबीआई और ईडी फिलहाल उन्हीं फैसलों की जांच कर रही हैं, जिन्हें चिदंबरम ने बतौर वित्तमंत्री रहते हुए लिया था। 
  • INX मीडिया मामले में गिरफ्तारी की तलवार लटकते देख चिदंबरम 20 अगस्त को अग्रिम जमानत लेने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन उनकी याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। इस कोर्ट ने कहा था, 'एजेंसियों को दिए गए चिदंबरम के कपटपूर्ण जवाब उन्हें अग्रिम जमानत देने से रोकते हैं। वे इस केस में मुख्य साजिशकर्ता नजर आ रहे हैं।' 
  • इसके बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद रात को सीबीआई ने बेहद नाटकीय घटनाक्रम में चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया। वहीं गुरुवार को विशेष अदालत ने उन्हें 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड पर भेज दिया।
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