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बयान / जीडीपी पर भाजपा सांसद की टिप्पणी पर चिदंबरम बोले- देश की अर्थव्यवस्था को भगवान ही बचाए

भाजपा सांसनिशिकांत दुबे ने सोमवार को बताया कि अर्थव्यवस्था को आंकने के लिए जीडीपी का इस्तेमाल नहीं होगा। भाजपा सांसनिशिकांत दुबे ने सोमवार को बताया कि अर्थव्यवस्था को आंकने के लिए जीडीपी का इस्तेमाल नहीं होगा।
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भाजपा सांसनिशिकांत दुबे ने सोमवार को बताया कि अर्थव्यवस्था को आंकने के लिए जीडीपी का इस्तेमाल नहीं होगा।भाजपा सांसनिशिकांत दुबे ने सोमवार को बताया कि अर्थव्यवस्था को आंकने के लिए जीडीपी का इस्तेमाल नहीं होगा।

  • भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा था- अर्थव्यवस्था की वृद्धि को आंकने के लिए जीडीपी का इस्तेमाल भविष्य में नहीं होगा
  • पी. चिदंबरम ने कहा- जीडीपी की संख्या अप्रासंगिक है, आयात शुल्क बढ़ेगा, भाजपा का यह आर्थिक सुधार के उपाय हैं
  • केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सितंबर तिमाही के आंकड़े जारी किया था जिसमें जीडीपी ग्रोथ घटकर 4.5% रह गई थी

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 06:35 PM IST

नई दिल्ली. तिहाड़ में बंद कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने मंगलवार को अर्थव्यवस्था के सुधार को लेकर केंद्र सरकार के प्रस्ताव को लेकर नाखुशी जाहिर की। उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सोमवार को लोकसभा में दिए बयान पर ट्वीट किया, “जीडीपी की संख्या अप्रासंगिक है, व्यक्तिगत कर में कटौती की जाएगी, आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा। भाजपा का यह अर्थव्यवस्था में सुधार के उपाय हैं। भगवान ही भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाए।” निशिकांत दुबे ने सोमवार को लोकसभा में कहा था कि अर्थव्यवस्था की प्रगति को आंकने के लिए जीडीपी इंडिकेटर का इस्तेमाल भविष्य में नहीं किया जाएगा।

दुबे ने कहा था, “जीडीपी 1934 में आया। इससे पहले कोई जीडीपी नहीं थी...केवल जीडीपी को बाइबल, रामायण या महाभारत मान लेना सत्य नहीं है और भविष्य में जीडीपी का कोई बहुत ज्यादा उपयोग नहीं होगा। आज की नई थ्योरी है कि सस्टेनेबल इकोनॉमिक वेलफेयर आम आदमी का हो रहा है कि नहीं हो रहा। जीडीपी से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट, हैप्पीनेस हो रहा है कि नहीं।”

सितंबर तिमाही के आंकड़े 6 साल (26 तिमाही) में सबसे कम: सीएसओ

इससे पहले, 30 नवंबर को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सितंबर तिमाही के आंकड़े जारी किए थे। देश की जीडीपी ग्रोथ जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर 4.5% रह गई थी। यह 6 साल (26 तिमाही) में सबसे कम था। इससे कम 4.3% जनवरी-मार्च 2013 में रही थी। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट समीर नारंग के मुताबिक विकास दर में 1% कमी आने से प्रति व्यक्ति मासिक आय 105 रुपए घट जाती है।

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